
देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E-20) को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने संसद में बड़ा बयान दिया है। राज्यसभा में सरकार ने बताया कि देश में कितनी गाड़ियां E-20 पेट्रोल के उपयोग के अनुरूप हैं, इसका कोई आधिकारिक आकलन नहीं किया गया है।
वहीं सोशल मीडिया पर E-20 पेट्रोल को लेकर चल रही चर्चाओं और आलोचनाओं के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मेटा और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के खिलाफ अदालत का रुख किया है।
सरकार ने क्या कहा?
राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि सरकार के पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि देश में कितने प्रतिशत वाहनों के इंजन E-20 पेट्रोल के अनुरूप हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक E-20 पेट्रोल के कारण इंजन खराब होने की कोई आधिकारिक रिपोर्ट सरकार के पास नहीं आई है। उन्होंने माना कि E-20 के उपयोग से वाहनों के माइलेज में लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
वैज्ञानिक परीक्षण के बाद लागू हुई एथेनॉल नीति
सुरेश गोपी ने बताया कि एथेनॉल मिश्रण नीति को लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और तकनीकी संस्थानों द्वारा व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण किए गए थे।
उन्होंने कहा कि विभिन्न अध्ययनों में यह पाया गया कि E-20 पेट्रोल के उपयोग से पुराने वाहनों की कार्यक्षमता में कोई असामान्य गिरावट या गंभीर तकनीकी नुकसान नहीं हुआ।
सोशल मीडिया पर क्या हैं दावे?
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हुई हैं, जिनमें दावा किया गया है कि E-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से फ्यूल टैंक, इंजन, फ्यूल पंप और अन्य पुर्जों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा वाहन की स्मूथ ड्राइविंग और माइलेज प्रभावित होने की बातें भी कही जा रही हैं।
हालांकि सरकार ने कहा है कि इन दावों की पुष्टि करने वाली कोई आधिकारिक रिपोर्ट उसके पास उपलब्ध नहीं है।
कब से इस्तेमाल हो रहा है E-20 पेट्रोल?
सरकार के अनुसार E-20 पेट्रोल पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों से देश के विभिन्न हिस्सों में उपलब्ध है, जबकि E-19/E-20 ईंधन का उपयोग भी ढाई वर्ष से अधिक समय से किया जा रहा है।
बताया गया कि इस दौरान वाहन निर्माता कंपनियां अपनी वारंटी शर्तों के तहत वाहनों की सर्विसिंग करती रही हैं और बड़े पैमाने पर इंजन या पुर्जों में असामान्य घिसाव की कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई है।
E-20 पेट्रोल के फायदे
- प्रदूषण और हानिकारक गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है।
- उच्च ऑक्टेन रेटिंग के कारण इंजन में बेहतर दहन होता है।
- पेट्रोलियम आयात पर देश की निर्भरता कम होती है।
- गन्ना और अन्य फसलों से एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को लाभ मिलता है।
- विदेशी मुद्रा की बचत होती है और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।
E-20 पेट्रोल के संभावित नुकसान
- सामान्य पेट्रोल की तुलना में माइलेज में 3 से 8 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
- पुराने (विशेषकर BS-4 से पहले के) वाहनों में रबर सील, गास्केट और फ्यूल पंप पर अतिरिक्त असर पड़ सकता है।
- एथेनॉल की पानी सोखने की क्षमता के कारण जंग लगने का खतरा बढ़ सकता है।
- पुराने वाहनों में रखरखाव और मरम्मत का खर्च बढ़ने की आशंका रहती है।
बहस जारी, सरकार ने दोहराया अपना पक्ष
E-20 पेट्रोल को लेकर देशभर में बहस जारी है। एक ओर सरकार इसे पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हित में बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ वाहन मालिक इसके माइलेज और पुराने इंजनों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल सरकार का कहना है कि वैज्ञानिक परीक्षणों और उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर E-20 से इंजन को व्यापक नुकसान होने के प्रमाण नहीं मिले हैं, हालांकि माइलेज में मामूली कमी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


