CJP प्रदर्शन मामला पहुँचा सुप्रीम कोर्ट: पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन और पुलिस कार्रवाई पर CJI की सख्त टिप्पणियाँ, कई राज्यों की घटनाएँ भी सुनवाई में शामिल

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी विभिन्न जनहित याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े कई गंभीर आरोपों का उल्लेख किया। इनमें पैलेट गन के कथित इस्तेमाल, इलेक्ट्रिक बैटन, प्रदर्शनकारियों, वकीलों और पत्रकारों पर कथित हमलों सहित कई मुद्दे शामिल रहे।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ अदालत में मौजूद रहे। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि याचिकाओं में बिहार, मध्य प्रदेश और नागपुर में प्रदर्शन के दौरान हुई कथित घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।

CJI ने उठाए गंभीर सवाल

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सभी याचिकाओं में कई समान मुद्दे सामने आए हैं। उन्होंने विशेष रूप से उस आरोप का उल्लेख किया, जिसमें पैलेट गन के कथित इस्तेमाल से 19 वर्षीय युवक की एक आंख की रोशनी चली जाने की बात कही गई है।

अदालत ने सुनवाई के दौरान इलेक्ट्रिक बैटन के कथित इस्तेमाल, एक युवती के गंभीर रूप से घायल होकर आईसीयू में भर्ती होने, वकीलों और एक पत्रकार पर कथित हमले जैसे आरोपों का भी जिक्र किया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने पत्रकार पर कथित हमले से संबंधित एक रिपोर्ट भी देखी थी।

महिलाओं से दुर्व्यवहार और सादी वर्दी में पुलिस के आरोप

याचिकाओं में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान सादी वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मियों ने हिंसा की, महिलाओं के साथ कथित छेड़छाड़ हुई और एक महिला पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा हमला किया गया। इन आरोपों का भी अदालत ने संज्ञान लिया।

‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार’

वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर अलग याचिका दायर की है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मुद्दा स्पष्ट है। उन्होंने टिप्पणी की कि छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है।

हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और कई बार प्रदर्शनों में ऐसे लोग भी शामिल हो जाते हैं जिनका मूल आंदोलन से कोई संबंध नहीं होता, लेकिन बाद में वे खुद को आयोजक के रूप में प्रस्तुत करने लगते हैं।

स्वतंत्र जांच पर भी उठे सवाल

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि प्रदर्शन में घायल हुए कुछ पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों के लिए पहले से नियम और दिशा-निर्देश मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी पालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

बिना नेम प्लेट के ड्यूटी का भी आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन स्थल पर सादी वर्दी में हथियारबंद लोग मौजूद थे। वहीं अधिवक्ता शादान फरासत ने आरोप लगाया कि कई वर्दीधारी पुलिसकर्मी भी बिना नाम-पट्टिका (नेम प्लेट) के ड्यूटी पर तैनात थे।

फिलहाल मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है और अदालत सभी पक्षों की दलीलें सुन रही है।

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