
पटना: जनता दल (यूनाइटेड) ने अनुशासनहीनता के आरोप में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व प्रदेश महासचिव अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह को पहले 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित किया था। अब बिहार सरकार ने भी उन्हें नागरिक परिषद से हटा दिया है। लगातार हुई इन दो कार्रवाइयों से जेडीयू में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
अशोक चौधरी के करीबी माने जाते थे छोटू सिंह
छोटू सिंह को मंत्री अशोक चौधरी का बेहद करीबी नेता माना जाता था। वह अक्सर उनके साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई देते थे और जेडीयू के अधिकांश आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाते थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यक्रमों में भी उनकी मौजूदगी अक्सर चर्चा का विषय रहती थी।
प्रदेश कमेटी में जगह नहीं मिलने के बाद बढ़ी नाराजगी
बताया जा रहा है कि नई प्रदेश कमेटी में जगह नहीं मिलने से छोटू सिंह नाराज थे। इसके बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी जतानी शुरू कर दी। आरोप है कि वह जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर पहुंचकर शिकायत करने के दौरान बहस पर उतर आए, जिसे पार्टी ने गंभीर अनुशासनहीनता माना।
जनसुनवाई में मंत्रियों के साथ बैठने को लेकर भी विवाद
सूत्रों के मुताबिक, जेडीयू कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रमों के दौरान छोटू सिंह का मंत्रियों के बगल में बैठना भी विवाद का कारण बना। इसको लेकर पार्टी के कई नेताओं ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद उन्हें ऐसे कार्यक्रमों से दूर रहने के निर्देश दिए गए थे।
जेडीयू ने दिया सख्त संदेश
पार्टी नेतृत्व का कहना है कि अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। छोटू सिंह पर की गई कार्रवाई को संगठन के भीतर स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि पार्टी लाइन से हटकर काम करने वाले नेताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
पार्टी में सख्ती का संकेत
जेडीयू के भीतर इस कार्रवाई को संगठनात्मक अनुशासन मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, प्रदेश कमेटी में जगह नहीं मिलने से कुछ अन्य नेताओं में भी नाराजगी की चर्चा है, लेकिन पार्टी फिलहाल अनुशासन बनाए रखने पर जोर देती दिख रही है।
छोटू सिंह पर पार्टी और सरकार—दोनों स्तरों पर हुई कार्रवाई ने बिहार की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।


