बिहार में ट्रैफिक चालान के मामलों का जल्द होगा निपटारा, अब स्थायी लोक अदालत में होगी सुनवाई; सभी जिलों को जारी हुए निर्देश

पटना। बिहार में ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब संधि योग्य (कंपाउंडेबल) ट्रैफिक चालानों की सुनवाई स्थायी लोक अदालत (Permanent Lok Adalat) में की जाएगी। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (BSLSA) ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकारों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य वर्षों से लंबित ट्रैफिक चालान मामलों का तेजी से निपटारा करना, अदालतों पर बढ़ते बोझ को कम करना और वाहन चालकों को सरल एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है।

राज्य विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार यह फैसला पटना उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। उच्च न्यायालय ने बड़ी संख्या में लंबित ट्रैफिक चालानों को देखते हुए इनके शीघ्र निष्पादन के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद राज्य विधिक सेवा प्राधिकार ने सभी जिलों में स्थायी लोक अदालतों के माध्यम से इन मामलों की सुनवाई शुरू कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के सदस्य सचिव धर्मेंद्र कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी पत्र में कहा गया है कि सभी संधि योग्य ट्रैफिक चालानों की सुनवाई अब स्थायी लोक अदालत में कराई जाएगी। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकारों को स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकार, जिला परिवहन कार्यालय, यातायात पुलिस और अन्य संबंधित विभाग मिलकर ट्रैफिक चालान मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया को सरल और व्यवस्थित बनाएंगे। इससे मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा और लोगों को लंबे समय तक अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में ई-चालान प्रणाली लागू होने के बाद ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है। ऐसे में हजारों चालान लंबे समय से लंबित पड़े हुए हैं। नई व्यवस्था लागू होने से इन मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी जिले में उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन के दौरान किसी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी कठिनाई आती है, तो उसकी सूचना तत्काल बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार को भेजी जाएगी। इसके बाद आवश्यक मार्गदर्शन और समाधान उपलब्ध कराया जाएगा ताकि प्रक्रिया बाधित न हो।

निर्देश जारी होने के बाद पटना जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। पटना सिविल कोर्ट परिसर स्थित स्थायी लोक अदालत में ट्रैफिक चालान मामलों की सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। लोगों की सुविधा के लिए अदालत परिसर में सूचना-पट भी लगाया गया है, जिससे वाहन चालकों को नई व्यवस्था की जानकारी आसानी से मिल सके।

वर्तमान में पटना की स्थायी लोक अदालत में अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार पांडे के नेतृत्व में तीन सदस्यीय पीठ कार्यरत है। इस पीठ में सदस्य रेशमा प्रसाद और संजय शुक्ला भी शामिल हैं। यही पीठ ट्रैफिक चालानों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी और नियमानुसार उनका निपटारा करेगी।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि स्थायी लोक अदालत का उद्देश्य विवादों का त्वरित, सरल और कम खर्च में समाधान उपलब्ध कराना है। यहां सामान्य न्यायालयों की तुलना में प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल होती है, जिससे आम नागरिकों को भी राहत मिलती है। ट्रैफिक चालान जैसे मामलों के लिए यह व्यवस्था अधिक प्रभावी मानी जा रही है।

नई व्यवस्था से सबसे अधिक लाभ उन वाहन चालकों को मिलेगा जिनके चालान लंबे समय से लंबित हैं। अब उन्हें मामलों के निपटारे के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना नहीं करना पड़ेगा। यदि मामला संधि योग्य श्रेणी में आता है तो उसका निपटारा अपेक्षाकृत कम समय में किया जा सकेगा।

परिवहन और यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए केवल चालान काटना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय पर उनका निष्पादन भी आवश्यक है। यदि चालान वर्षों तक लंबित रहते हैं तो पूरी व्यवस्था की प्रभावशीलता प्रभावित होती है। स्थायी लोक अदालत के माध्यम से सुनवाई शुरू होने से इस समस्या का समाधान मिलने की संभावना है।

इस व्यवस्था से न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम होगा। सामान्य अदालतों में लंबित मामलों की संख्या अधिक होने के कारण ट्रैफिक चालानों की सुनवाई में काफी समय लग जाता था। अब ऐसे मामलों को अलग व्यवस्था के तहत सुनने से नियमित अदालतों को भी राहत मिलेगी।

राज्य विधिक सेवा प्राधिकार ने सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकारों को निर्देश दिया है कि वे जिला परिवहन पदाधिकारी, यातायात पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि सुनवाई की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संचालित हो।

कानूनी जानकारों के अनुसार स्थायी लोक अदालत में केवल उन्हीं मामलों की सुनवाई होगी जो कानून के अनुसार संधि योग्य हैं। गंभीर प्रकृति के ट्रैफिक अपराध या अन्य आपराधिक मामलों की सुनवाई पूर्व निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगी।

बिहार सरकार और राज्य विधिक सेवा प्राधिकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी, लोगों को समय पर राहत मिलेगी और ट्रैफिक नियमों के पालन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही डिजिटल चालान प्रणाली और त्वरित सुनवाई के बेहतर समन्वय से पूरे राज्य में यातायात प्रबंधन और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि यदि उनके खिलाफ कोई संधि योग्य ट्रैफिक चालान लंबित है तो वे संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकार या स्थायी लोक अदालत से संपर्क कर मामले की जानकारी प्राप्त करें। समय पर सुनवाई में भाग लेने और नियमानुसार चालान का निपटारा कराने से अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से बचा जा सकेगा। आने वाले दिनों में यह व्यवस्था राज्य के सभी जिलों में प्रभावी रूप से लागू होने की उम्मीद है, जिससे हजारों लंबित ट्रैफिक चालान मामलों का शीघ्र समाधान संभव हो सकेगा।

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