
पटना। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह उत्तर प्रदेश के एक पुलिस अधिकारी के साथ उनकी कथित फोन पर हुई तीखी बातचीत है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में मुकेश सहनी अपने प्रस्तावित उत्तर प्रदेश दौरे को लेकर पुलिस अधिकारी से बहस करते हुए सुनाई दे रहे हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने प्रशासनिक अनुमति की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के किसी भी राज्य या जिले में जाने के लिए किसी नागरिक को अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती। वहीं पुलिस अधिकारी कथित तौर पर प्रशासनिक नियमों का हवाला देते हुए अनुमति की बात करते सुनाई देते हैं।
वीडियो सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और बातचीत के संबंध में अभी तक किसी आधिकारिक एजेंसी की ओर से विस्तृत बयान भी जारी नहीं किया गया है।
जानकारी के अनुसार यह पूरा विवाद उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में मुकेश सहनी के प्रस्तावित रात्रि प्रवास को लेकर सामने आया। बताया जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर उनके कार्यक्रम की जानकारी लेने के लिए पुलिस अधिकारी और मुकेश सहनी के बीच फोन पर बातचीत हुई। इसी बातचीत का कथित वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वायरल वीडियो में मुकेश सहनी कथित तौर पर कहते हुए सुनाई देते हैं कि उनका महाराजगंज में केवल रात्रि प्रवास प्रस्तावित है और वे उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में लोगों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कोई सार्वजनिक सभा या राजनीतिक रैली नहीं है, इसलिए इसके लिए अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
वीडियो में पुलिस अधिकारी की ओर से कथित रूप से यह कहा जाता है कि प्रशासनिक दृष्टि से इस प्रकार के कार्यक्रम की जानकारी और आवश्यक अनुमति लेना जरूरी है। इसी बात पर मुकेश सहनी आपत्ति जताते हुए कहते हैं कि भारत के किसी भी नागरिक को देश के किसी भी राज्य में आने-जाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है और सामान्य यात्रा या निजी कार्यक्रम के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं होती।
बातचीत के दौरान मुकेश सहनी का स्वर और अधिक तीखा होता दिखाई देता है। वायरल वीडियो में वह कथित तौर पर कहते हैं कि यदि उन्हें उत्तर प्रदेश आने या लोगों से मिलने से रोका जाएगा तो वे इसके खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा तो उसके लिए नियमों के अनुसार अनुमति ली जाएगी, लेकिन केवल रात्रि प्रवास या लोगों से मिलने के लिए अनुमति मांगना उचित नहीं है।
वीडियो में मुकेश सहनी यह भी कहते हुए सुनाई देते हैं कि यदि उनके कार्यक्रम में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न की गई तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास संविधान द्वारा दिए गए अधिकार हैं और वे उन्हीं अधिकारों के तहत देश में कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र हैं।
वायरल वीडियो में एक जगह मुकेश सहनी कथित तौर पर कहते हैं, “मैं चूड़ियां पहनकर नहीं बैठा हूं।” यह बयान सोशल मीडिया पर सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस अधिकारी किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि नहीं हैं और उन्हें कानून के दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए।
वीडियो में वह पुलिस अधिकारी को यह भी कहते सुनाई देते हैं कि पूरी बातचीत रिकॉर्ड की जा रही है और यदि उनके कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न हुई तो वे न्यायालय में इस मुद्दे को उठाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और सभी अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्य करना चाहिए।
बातचीत के अंतिम हिस्से में भी दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस जारी रहती है। वायरल वीडियो में मुकेश सहनी यह कहते हुए भी सुनाई देते हैं कि देर रात उनका समय बर्बाद किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम करेगा तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित होगी।
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे जनप्रतिनिधि और प्रशासन के बीच अधिकारों को लेकर विवाद बता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि पूरे मामले की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।
अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वीडियो किस समय रिकॉर्ड किया गया, बातचीत किन परिस्थितियों में हुई और इसमें शामिल पुलिस अधिकारी कौन थे। प्रशासन की ओर से भी अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सूत्रों के अनुसार संबंधित मामले में प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है। वहीं मुकेश सहनी की ओर से भी इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल और विभिन्न राज्यों में नेताओं के लगातार दौरों के बीच प्रशासनिक अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे समय-समय पर विवाद का कारण बनते रहे हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय प्रशासन कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ औपचारिक प्रक्रियाओं का पालन करने की बात करता है, जबकि राजनीतिक दल कई बार इसे नागरिक अधिकारों और राजनीतिक गतिविधियों से जोड़कर देखते हैं।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और बातचीत के पूरे संदर्भ को लेकर भी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में इस प्रकरण पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान और प्रशासन की ओर से जारी होने वाली जानकारी के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।


