जिला विकास समिति की बैठक में सहकारिता योजनाओं की समीक्षा, किसानों तक लाभ पहुंचाने पर जोर

भागलपुर में सहकारिता विभाग की योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति को लेकर जिला विकास समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। समीक्षा भवन में आयोजित इस बैठक में जिले में संचालित विभिन्न सहकारी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सरकार द्वारा संचालित सहकारिता योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों और आम नागरिकों तक समय पर पहुंच सके।

बैठक जिला पदाधिकारी अलंकृता पांडे की उपस्थिति में संपन्न हुई। इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे और सहकारिता क्षेत्र में चल रहे कार्यों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त करने में सहकारिता विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी कारण योजनाओं के कार्यान्वयन में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतने के निर्देश दिए गए।

बैठक में जिला सहकारिता पदाधिकारी ने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि जिले में पैक्सों के कंप्यूटरीकरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिन पैक्सों में कंप्यूटरीकरण का कार्य पूरा नहीं हो सका है, वहां भी प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के लिए कार्रवाई जारी है। अधिकारियों का मानना है कि कंप्यूटरीकरण से पैक्सों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनेगी।

पैक्सों के डिजिटलीकरण को सहकारिता क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे रिकॉर्ड प्रबंधन बेहतर होगा, लेन-देन की निगरानी आसान होगी और किसानों को सेवाएं अधिक तेज एवं सुगम तरीके से उपलब्ध हो सकेंगी। डिजिटल व्यवस्था भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को कम करने में भी सहायक मानी जा रही है।

बैठक में कॉमन सर्विस सेंटर सेवाओं के विस्तार की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए CSC नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। इसके माध्यम से किसानों और ग्रामीण नागरिकों को कई सरकारी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा सकती हैं, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।

ऑनलाइन लेन-देन को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया। डिजिटल भुगतान प्रणाली के विस्तार से पारदर्शिता बढ़ेगी और वित्तीय प्रक्रियाएं सरल होंगी। सहकारिता समितियों में ऑनलाइन लेन-देन के बढ़ते उपयोग को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बैठक में जन औषधि केंद्रों की स्थिति और उनके विस्तार पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक सस्ती दवाएं पहुंचाने के लिए इन केंद्रों की संख्या और प्रभावशीलता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र और किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ के गठन एवं संचालन की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि एफपीओ किसानों को सामूहिक शक्ति प्रदान करने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। इनके जरिए किसान उत्पादन, विपणन और संसाधन प्रबंधन में बेहतर स्थिति हासिल कर सकते हैं।

सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सहकारी संस्थाओं की सदस्यता बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। बैठक में राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पोर्टल पर समितियों के डेटा अपडेट करने की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने कहा कि अद्यतन डेटा उपलब्ध रहने से योजनाओं की निगरानी और नीति निर्माण में काफी सुविधा होती है।

बैठक में बहुउद्देशीय सेवाओं के विस्तार और पैक्सों को मॉडल पैक्स के रूप में विकसित करने की दिशा में चल रहे कार्यों की भी जानकारी दी गई। मॉडल पैक्स की अवधारणा का उद्देश्य इन्हें केवल खरीद केंद्र तक सीमित न रखकर बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित करना है। इससे किसानों को एक ही मंच पर अनेक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

जिला केंद्रीय सहकारी बैंक से संबंधित योजनाओं की समीक्षा भी बैठक का प्रमुख हिस्सा रही। बैंकिंग सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच बढ़ाने से वित्तीय समावेशन को बल मिलेगा।

आधार आधारित भुगतान प्रणाली यानी एईपीएस की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। यह प्रणाली ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं को सरल और सुलभ बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। इसके माध्यम से लोग आधार प्रमाणीकरण के जरिए आसानी से वित्तीय लेन-देन कर पा रहे हैं।

बैठक में गोदाम निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी की गई। कृषि उत्पादों के सुरक्षित भंडारण के लिए पर्याप्त गोदाम होना बेहद आवश्यक माना जाता है। बेहतर भंडारण व्यवस्था किसानों को फसल खराब होने से बचाने और उचित मूल्य प्राप्त करने में मदद करती है।

मुख्यमंत्री हरित कृषि यंत्र योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस योजना का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों तक पहुंच उपलब्ध कराना है, जिससे कृषि उत्पादकता में वृद्धि हो सके। अधिकारियों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

जन वितरण प्रणाली की दुकानों के संचालन, धान और गेहूं अधिप्राप्ति तथा ऑन सिस्टम ऑडिट की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि खाद्यान्न वितरण और खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसके अलावा बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना पर भी चर्चा हुई। यह योजना किसानों को सब्जी उत्पादन के बाद बेहतर विपणन और मूल्य संवर्धन के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।

बैठक में बताया गया कि 29 जून से 6 जुलाई 2026 तक जिलेभर में सहकारिता सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जिनमें सहकारिता जागरूकता अभियान, पौधारोपण, वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम, सहकारिता विषयक सेमिनार, क्विज प्रतियोगिता, फिल्म स्क्रीनिंग और सोशल मीडिया अभियान शामिल हैं।

अधिकारियों ने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि सामूहिक विकास का मजबूत माध्यम है। यदि योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो, तो यह किसानों और ग्रामीण समाज के लिए बड़े बदलाव का कारण बन सकती है।

बैठक के अंत में सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि योजनाओं का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करें और अधिक से अधिक पात्र लोगों तक लाभ पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करें। प्रशासन का स्पष्ट संदेश था कि सहकारिता योजनाओं के जरिए ग्रामीण विकास और किसानों की आर्थिक मजबूती को नई दिशा दी जाएगी।

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