पूर्वी चंपारण: वाटर पार्क परियोजना पर बढ़ा विवाद, जमीन बचाने सड़क पर उतरे किसान; सुधाकर सिंह ने सरकार को दी चेतावनी

पूर्वी चंपारण के पिपराकोठी में प्रस्तावित वाटर पार्क परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। अपनी पुश्तैनी और खेती योग्य जमीन बचाने की मांग को लेकर किसान एक बार फिर सड़क पर उतर आए। आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। शुक्रवार को आरजेडी सांसद एवं पूर्व मंत्री सुधाकर सिंह किसानों के आंदोलन में शामिल हुए और सरकार पर किसानों की सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण करने का आरोप लगाया।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीणों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर नारेबाजी की। “जमीन हमारी है, किसी की जागीर नहीं”, “नहीं चाहिए वाटर पार्क, बचाओ हमारी खेती” और “जबरन भूमि अधिग्रहण बंद करो” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

किसानों का कहना है कि वर्षों से वे इसी जमीन पर खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं और यही उनकी आजीविका का मुख्य आधार है। उनका आरोप है कि पहले उनकी जमाबंदी रद्द की गई और अब बिना सहमति के भूमि की नापी कर अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

आंदोलन को संबोधित करते हुए सुधाकर सिंह ने कहा कि विकास के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन छीनना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की सहमति के बिना जबरन भूमि अधिग्रहण करना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने जबरदस्ती की तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

सुधाकर सिंह ने 22 जून की घटना का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि अपनी जमीन बचाने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया था, जिसमें कई लोग घायल हुए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

किसानों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास किसानों की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार यदि कोई परियोजना लागू करना चाहती है तो पहले किसानों से संवाद करे, उनकी सहमति ले और कानून के अनुसार सभी प्रक्रियाओं का पालन करे।

सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि किसान सभा किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को पूरे बिहार में व्यापक रूप दिया जाएगा।

फिलहाल किसान भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया रोकने, जमाबंदी बहाल करने और 22 जून की पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं, पूरे मामले पर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

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