पूर्व रेलवे का बड़ा स्वच्छता अभियान, गंदगी फैलाने वालों पर अब मौके पर ही लगेगा जुर्माना

रेलवे परिसरों में स्वच्छता बनाए रखने की दिशा में पूर्व रेलवे ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। यात्रियों, विक्रेताओं और आम नागरिकों के बीच स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए शुरू किए गए अभियान को अब और प्रभावी बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में पूर्व रेलवे ने अपने स्वच्छता अभियान के तीसरे चरण की शुरुआत करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत रेलवे परिसर में गंदगी फैलाने या थूकने वालों पर मौके पर ही कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना लगाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि यात्रियों को भी स्वच्छता मिशन का सक्रिय भागीदार बनाना है।

पूर्व रेलवे द्वारा अप्रैल माह से व्यापक और सतत स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व में शुरू किया गया था। अभियान की शुरुआत से ही इसका फोकस रेलवे परिसरों, प्लेटफॉर्म, ट्रैक और आसपास के क्षेत्रों को साफ-सुथरा बनाए रखने पर रहा है। रेलवे प्रशासन का मानना है कि स्वच्छता केवल कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि इसमें यात्रियों और आम नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।

अभियान के पहले चरण में जनसंपर्क आधारित जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। इस दौरान रेलवे की विभिन्न टीमों ने जमीनी स्तर पर जाकर यात्रियों, विक्रेताओं और रेलवे परिसरों के आसपास रहने वाले लोगों से सीधा संवाद किया। लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि रेलवे ट्रैक और स्टेशन परिसर में कचरा फेंकना केवल गंदगी बढ़ाना नहीं है, बल्कि इससे स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े खतरे भी पैदा हो सकते हैं।

इस चरण में रेलवे कर्मचारियों ने कई स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें साफ-सफाई के महत्व पर चर्चा की गई। लोगों को कूड़ा निर्धारित स्थानों पर डालने, प्लास्टिक कचरे का उचित निपटान करने और सार्वजनिक स्थानों पर थूकने जैसी आदतों से बचने की सलाह दी गई। इस प्रयास का सकारात्मक असर देखने को मिला और लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी।

पहले चरण की सफलता के बाद पूर्व रेलवे ने दूसरे चरण में एक अभिनव पहल शुरू की, जिसे “30 मिनट चैलेंज” नाम दिया गया। इस पहल का संदेश था— “इसे देखें, इसकी सूचना दें, हम कार्रवाई करेंगे।” इस व्यवस्था के तहत किसी भी रेल उपयोगकर्ता को यदि रेलवे परिसर में कहीं कचरा दिखाई देता था, तो वह उसकी फोटो और स्थान की जानकारी रेलवे को भेज सकता था।

इस पहल की सबसे खास बात इसकी तेज प्रतिक्रिया प्रणाली रही। शिकायत मिलने के बाद संबंधित स्थान की सफाई 30 मिनट के भीतर सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया। रेलवे प्रशासन ने इस चुनौती को प्रभावी तरीके से लागू किया और कुल 126 शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की। हर शिकायत पर तय समय के भीतर सफाई कर यह संदेश दिया गया कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है।

अब इन दोनों चरणों की सफलता के बाद पूर्व रेलवे तीसरे और सबसे सशक्त चरण में प्रवेश कर रही है। इस नए चरण का नाम “ईस्टर्न रेलवे इज़ वॉचिंग यू” रखा गया है। यह चरण पहले के मुकाबले अधिक सख्त और प्रभावी माना जा रहा है क्योंकि इसमें केवल जागरूकता ही नहीं बल्कि प्रत्यक्ष दंडात्मक कार्रवाई भी शामिल है।

इस चरण का औपचारिक शुभारंभ 4 जुलाई को हावड़ा में किया जाएगा। इसके तहत रेलवे परिसर में गंदगी फैलाने, कचरा फेंकने या थूकने वाले लोगों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करते हुए पकड़ा जाता है, तो रेलवे प्रशासन उसे तुरंत चिन्हित कर मौके पर ही जुर्माना लगाएगा।

रेलवे प्रशासन का मानना है कि केवल जागरूकता अभियान कई बार पर्याप्त नहीं होता। जब तक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक व्यवहार में स्थायी बदलाव लाना मुश्किल हो सकता है। इसी सोच के तहत तीसरे चरण में निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई है।

इस अभियान की एक खास बात यह है कि इसमें यात्रियों को भी निगरानी तंत्र का हिस्सा बनाया गया है। अब आम रेल उपयोगकर्ता भी स्वच्छता अभियान में सीधे योगदान दे सकेंगे। यदि कोई यात्री किसी व्यक्ति को रेलवे परिसर में कचरा फैलाते या थूकते हुए देखता है, तो वह उस व्यक्ति की तस्वीर और घटना का सटीक स्थान पूर्व रेलवे के समर्पित व्हाट्सऐप नंबर 9002022780 पर भेज सकता है।

सूचना मिलने के बाद रेलवे प्रशासन संबंधित व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा। यह व्यवस्था न केवल निगरानी को मजबूत बनाएगी, बल्कि यात्रियों में जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करेगी। इससे रेलवे प्रशासन को वास्तविक समय में शिकायतें प्राप्त होंगी और कार्रवाई तेज हो सकेगी।

इस पहल का एक प्रेरक पहलू “कैप्टन क्लीन” सम्मान भी है। जो यात्री गंदगी फैलाने वालों की सूचना देकर स्वच्छता बनाए रखने में योगदान देंगे, उन्हें “कैप्टन क्लीन” की उपाधि दी जाएगी। इसके साथ ही पूर्व रेलवे उनकी जागरूकता और जिम्मेदारी की सराहना करते हुए आधिकारिक प्रशंसा-पत्र देकर सम्मानित भी करेगी।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि स्वच्छता किसी एक संस्था का दायित्व नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार स्वच्छ और स्वस्थ यात्रा वातावरण तभी संभव है जब रेलवे और यात्री दोनों मिलकर जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि तीसरे चरण के जरिए यात्रियों को रेलवे की आंखें और कान बनने का अवसर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए सामुदायिक भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। जब नागरिक स्वयं निगरानी और जागरूकता का हिस्सा बनते हैं, तो नियमों का पालन अधिक प्रभावी तरीके से होता है। रेलवे जैसे बड़े सार्वजनिक तंत्र में यह मॉडल लंबे समय तक सकारात्मक परिणाम दे सकता है।

फिलहाल पूर्व रेलवे का यह नया अभियान साफ संकेत देता है कि अब स्वच्छता को लेकर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जागरूकता, तकनीक और नागरिक सहभागिता के संयोजन से यह पहल रेलवे परिसरों को अधिक स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य रेलवे जोनों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

  • ये भी पढ़े..

    पूर्वी चंपारण: वाटर पार्क परियोजना पर बढ़ा विवाद, जमीन बचाने सड़क पर उतरे किसान; सुधाकर सिंह ने सरकार को दी चेतावनी

    Share Add as a preferred…

    मेदांता अस्पताल पहुंचे अनंत सिंह, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव का जाना हाल, पेसमेकर इंप्लांट के बाद डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी

    Share Add as a preferred…