
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने कई बड़े और सख्त फैसलों की घोषणा की है। बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस और सतर्कता जागरूकता सप्ताह के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए व्यापक रणनीति पेश करते हुए कहा कि ‘Triple T’ यानी ट्रांसपेरेंसी, टेक्नोलॉजी और ट्रस्ट के आधार पर बिहार को भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सुशासन तभी मजबूत होगा जब सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा, भ्रष्टाचार या अनियमितता के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
पटना स्थित में आयोजित इस राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर बिहार सतर्कता जागरूकता सप्ताह का औपचारिक शुभारंभ किया। कार्यक्रम का आयोजन निगरानी विभाग द्वारा किया गया, जिसमें निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के नए लोगो का भी अनावरण किया गया। समारोह के दौरान विभाग की उपलब्धियों और भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाइयों पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसमें पिछले वर्षों की कार्रवाई और भविष्य की कार्ययोजना को दर्शाया गया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार विकास का सबसे बड़ा शत्रु है। यदि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता नहीं होगी तो जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ आम नागरिकों तक नहीं पहुंच पाएगा। इसी सोच के साथ राज्य सरकार प्रशासनिक ढांचे को और अधिक जवाबदेह तथा प्रभावी बनाने के लिए कई संरचनात्मक बदलाव करने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि बिहार के सभी नौ प्रमंडलों में विशेष निगरानी न्यायालय स्थापित किए जाएंगे। इन अदालतों का उद्देश्य भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का त्वरित निपटारा करना होगा ताकि दोषियों को जल्दी सजा मिल सके और न्याय प्रक्रिया में अनावश्यक देरी समाप्त हो। सरकार का मानना है कि मामलों के शीघ्र निष्पादन से भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
इसके साथ ही अपराध और आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों में सरकारी गवाहों की सुरक्षा और सुविधा पर भी विशेष ध्यान देने की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी सरकारी गवाह को गवाही देने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना पड़ता है, तो उसके लिए परिवहन भत्ता उपलब्ध कराया जाएगा। यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कई मामलों में गवाहों को यात्रा संबंधी कठिनाइयों के कारण अदालत में उपस्थित होने में परेशानी होती है, जिससे मुकदमों में देरी होती है।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति को लागू करने की दिशा में एक और बड़ा निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के प्रत्येक जिले में निगरानी थाना स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा सभी अनुमंडलों में निगरानी ओपी (आउटपोस्ट) स्थापित करने की भी योजना है। इससे भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी और आम लोगों के लिए शिकायत दर्ज कराना आसान बनेगा।
मुख्यमंत्री ने आर्थिक अपराध इकाई और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को आधुनिक तकनीक अपनाने का निर्देश भी दिया। उन्होंने कहा कि इन एजेंसियों को साइबर फॉरेंसिक, डेटा विश्लेषण, डिजिटल ट्रैकिंग और विशेषज्ञों की सहायता से ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करनी चाहिए जो राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों के समकक्ष हो। उनका कहना था कि बिहार की एजेंसियां इतनी सक्षम बनें कि विशेष परिस्थितियों में और जैसी केंद्रीय एजेंसियों को भी इनके सहयोग की आवश्यकता महसूस हो।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का संदेश देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार में संलिप्त व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि जिन भ्रष्टाचारियों की संपत्तियां जब्त की जाएंगी, उन परिसरों का उपयोग सामाजिक कार्यों के लिए किया जाएगा। विशेष रूप से ऐसे परिसरों में विद्यालय संचालित करने की योजना पर काम किया जाएगा। यह कदम एक प्रतीकात्मक संदेश भी है कि अवैध कमाई से अर्जित संपत्ति अंततः समाज के कल्याण में उपयोग होगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। चाहे मंत्री हों, विधायक हों या प्रशासनिक व्यवस्था के उच्च अथवा निम्न स्तर के अधिकारी— यदि वे भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सरकार ने संकेत दिया कि जवाबदेही सभी स्तरों पर समान रूप से लागू होगी।
उन्होंने कहा कि गरीबों और वंचित वर्गों को न्याय दिलाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी दिशा में विभिन्न जनसहभागिता आधारित कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं ताकि आम नागरिक अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकें। सरकार का उद्देश्य केवल भ्रष्टाचार रोकना नहीं, बल्कि प्रशासन में भरोसा पैदा करना भी है।
मुख्यमंत्री ने सामाजिक स्तर पर नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई केवल कानून और जांच एजेंसियों के सहारे नहीं जीती जा सकती। इसके लिए समाज में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की संस्कृति विकसित करनी होगी। इसी उद्देश्य से विद्यालयों में भ्रष्टाचार विरोधी जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई गई है, ताकि बच्चों में शुरुआती स्तर से ही नैतिकता और पारदर्शिता के मूल्य विकसित किए जा सकें।
उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि शॉर्टकट की संस्कृति से बाहर निकलना होगा। आसान और अनुचित रास्तों की बजाय मेहनत, ईमानदारी और अनुशासन को अपनाना ही समाज और राज्य के दीर्घकालिक विकास का आधार बन सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री देश को विकसित भारत बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे हैं और बिहार भी इस राष्ट्रीय लक्ष्य में अपनी मजबूत भूमिका निभाएगा। साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि समृद्ध बिहार की दिशा में जो आधार तैयार किया गया था, उसे और आगे बढ़ाने का काम जारी है।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री सहित कई मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। राज्य के विभिन्न जिलों से प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। अंत में सभी उपस्थित अधिकारियों और कर्मियों ने सतर्कता शपथ ली, जिसमें ईमानदारी, पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करने का संकल्प दोहराया गया।
राज्य सरकार का मानना है कि ‘Triple T’ मॉडल केवल एक नारा नहीं बल्कि शासन व्यवस्था का नया ढांचा बनेगा। यदि पारदर्शिता, तकनीक और भरोसे को प्रशासन के केंद्र में रखा गया, तो बिहार में भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा और सुशासन को नई मजबूती मिलेगी।


