
कोलकाता, 2 जुलाई 2026। पूर्व रेलवे की रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने एक बेहद संवेदनशील और रहस्यमय मामले का सफलतापूर्वक खुलासा करते हुए यात्रियों की सुरक्षा के प्रति अपनी सतर्कता और पेशेवर दक्षता का शानदार उदाहरण पेश किया है। बरहरवा–आजिमगंज पैसेंजर ट्रेन के दिव्यांगजन कोच में लगी आग की गुत्थी को आरपीएफ ने कुछ ही दिनों में सुलझाकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। यह मामला शुरुआत में पूरी तरह रहस्य से घिरा हुआ था, क्योंकि घटनास्थल पर आग लगने के स्पष्ट कारणों का कोई ठोस सबूत नहीं मिला था।
घटना 21 जून 2026 की है। दोपहर का समय सामान्य था और ट्रेन संख्या 53434 डाउन (बरहरवा–आजिमगंज पैसेंजर) बरहरवा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 से रवाना हुई ही थी कि अचानक कुछ मिनटों बाद आपातकालीन चेन खींचे जाने से ट्रेन रुक गई। शुरुआत में यात्रियों को समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है, लेकिन जल्द ही सूचना फैली कि इंजन के ठीक पीछे स्थित दिव्यांगजन कोच के शौचालय में आग लग गई है। देखते ही देखते कोच में अफरा-तफरी मच गई और यात्री घबराकर बाहर निकलने लगे।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ड्यूटी पर मौजूद आरपीएफ जवान तत्काल हरकत में आए। कांस्टेबल मृत्युंजय कुमार, उपनिरीक्षक लाल बहादुर माझी और कांस्टेबल अनिल कुमार तेजी से कोच के भीतर पहुंचे। जब उन्होंने शौचालय का निरीक्षण किया तो एक चौंकाने वाला दृश्य सामने आया। पश्चिमी शैली के कमोड का फाइबर से बना ढक्कन फर्श पर रखा हुआ था और वही जल रहा था। आश्चर्य की बात यह थी कि वहां कोई कागज, कपड़ा या अन्य ज्वलनशील सामग्री मौजूद नहीं थी। न ही पेट्रोल, केरोसिन या किसी अन्य ज्वलनशील पदार्थ की गंध पाई गई। इससे यह स्पष्ट हो गया कि आग सामान्य दुर्घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कोई असामान्य कारण था।
घटनास्थल से आरोपी पहले ही फरार हो चुका था, जिससे जांच और जटिल हो गई। आरपीएफ पोस्ट बरहरवा ने तुरंत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 153 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती चुनौती यह थी कि न तो प्रत्यक्षदर्शियों के पास आरोपी का स्पष्ट विवरण था और न ही कोई प्रत्यक्ष सबूत मौजूद था। ऐसे में जांच पूरी तरह तकनीकी विश्लेषण और खुफिया जानकारी पर निर्भर हो गई।
पूर्व रेलवे की आरपीएफ टीम ने अत्यंत सूक्ष्म और पेशेवर ढंग से जांच को आगे बढ़ाया। बरहरवा और साहिबगंज रेलवे स्टेशनों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की गहन जांच की गई। हालांकि फुटेज में संदिग्ध व्यक्ति के ट्रेन में चढ़ने का स्पष्ट दृश्य नहीं मिला, फिर भी जांच टीम ने हार नहीं मानी। अधिकारियों ने संदिग्ध के कपड़ों के रंग, उसकी गतिविधियों और विशेष रूप से उसकी चलने की शैली (गेट एनालिसिस) का बारीकी से अध्ययन किया। यही तकनीकी विश्लेषण बाद में इस केस को सुलझाने की सबसे बड़ी कुंजी साबित हुआ।
पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक के मार्गदर्शन में जांच को और तेज किया गया। आरपीएफ टीम ने तकनीकी निगरानी के साथ-साथ जमीनी स्तर पर खुफिया तंत्र को सक्रिय किया। स्थानीय सूत्रों से सूचना एकत्र की गई और संदिग्ध की गतिविधियों पर नजर रखी गई। लगातार निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर आरपीएफ ने आरोपी तक पहुंचने के लिए जाल बिछाया।
लगभग एक सप्ताह की सतत निगरानी के बाद 29 जून 2026 को बड़ी सफलता हाथ लगी। वही संदिग्ध व्यक्ति साहिबगंज स्टेशन पर एक बार फिर उसी ट्रेन के आसपास देखा गया। आरपीएफ टीम पहले से अलर्ट थी, इसलिए बिना समय गंवाए उसे हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ में आरोपी ने जो खुलासा किया, उसने पूरे मामले की तस्वीर साफ कर दी।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि वह ट्रेन के दिव्यांगजन कोच के शौचालय में बीड़ी पी रहा था। बीड़ी बुझाने के लिए उसने उसे प्लास्टिक के ढक्कन पर रगड़ा। घर्षण और गर्मी के कारण फाइबर का ढक्कन सुलगने लगा और कुछ ही क्षणों में उसमें आग लग गई। जब आग तेजी से फैलने लगी तो आरोपी घबरा गया। पकड़े जाने के डर से उसने धीमी गति से चल रही ट्रेन से छलांग लगा दी और फरार हो गया।
इस स्वीकारोक्ति के बाद स्पष्ट हो गया कि पूरी घटना किसी सुनियोजित तोड़फोड़ का परिणाम नहीं, बल्कि एक बेहद लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना हरकत का नतीजा थी। हालांकि, यह लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती थी। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता, तो कोच में मौजूद यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती थी और रेलवे संपत्ति को भारी नुकसान हो सकता था।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को माननीय रेलवे न्यायिक मजिस्ट्रेट (RJM), साहिबगंज के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अदालत ने आरोपी को 24 जुलाई 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अब मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
पूर्व रेलवे के आईजी-सह-प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त ने बरहरवा आरपीएफ टीम की सराहना करते हुए कहा कि टीम ने अत्यंत कम समय में तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज और जमीनी खुफिया सूचनाओं का प्रभावी उपयोग कर आरोपी को गिरफ्तार किया। उनके अनुसार यह जांच आधुनिक सुरक्षा तंत्र और मानवीय दक्षता के उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण है।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने यात्रियों से अपील करते हुए कहा कि रेलवे में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और यात्रियों अथवा रेलवे संपत्ति को खतरे में डालने वाले किसी भी कृत्य के प्रति शून्य-सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रेनों के भीतर धूम्रपान पूर्णतः प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है।
उन्होंने कहा कि यह घटना इस बात का उदाहरण है कि एक छोटी-सी लापरवाही कितनी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है। इसलिए सभी यात्रियों को जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार करना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि, धुएं या आग जैसी स्थिति की सूचना तुरंत आरपीएफ या ट्रेन कर्मचारियों को देनी चाहिए।
यह पूरी घटना एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—रेल सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यात्रियों की सजगता भी उतनी ही आवश्यक है। पूर्व रेलवे की त्वरित कार्रवाई और आरपीएफ की कुशल जांच ने एक बार फिर साबित किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे हर स्तर पर सतर्क और प्रतिबद्ध है।


