वीबी-जी राम जी योजना का शुभारंभ: 15 दिन में रोजगार नहीं मिलने पर मजदूरों को मिलेगा बेरोजगारी भत्ता

पटना, 02 जुलाई। बिहार में ग्रामीण रोजगार और आजीविका को नई मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका गारंटी अधिनियम, 2025 (वीबी-जी राम जी) का गुरुवार को पटना स्थित अभिवेशन भवन में भव्य शुभारंभ किया गया। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण समारोह में विभागीय मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने योजना को ग्रामीण भारत और विशेष रूप से बिहार के मजदूरों के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह पहल रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नया अध्याय लिखेगी।

मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि मनरेगा के 20 वर्षों के लंबे अनुभव के बाद अब वीबी-जी राम जी के रूप में एक नई यात्रा की शुरुआत हुई है। इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि यदि कोई मजदूर रोजगार के लिए आवेदन करता है और उसे निर्धारित समयसीमा यानी 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो वह बेरोजगारी भत्ता पाने का हकदार होगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लाखों श्रमिक परिवारों को आर्थिक सुरक्षा का नया आधार मिलेगा।

उन्होंने बताया कि बेरोजगारी भत्ते के तहत पहले 30 दिनों के लिए मजदूरों को निर्धारित मजदूरी का एक-चौथाई (25 प्रतिशत) भत्ता दिया जाएगा। इसके बाद शेष वित्तीय वर्ष के लिए यह राशि बढ़ाकर आधा (50 प्रतिशत) कर दी जाएगी। इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि काम की मांग करने वाले मजदूरों को बिना आय के लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अकुशल मजदूरों को भुगतान की जाने वाली बेरोजगारी भत्ता राशि का वहन राज्य सरकार करेगी और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों या एजेंसियों से इसकी वसूली 30 दिनों के भीतर की जाएगी।

योजना में मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए एक और महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है। मंत्री के अनुसार, यदि किसी अकुशल मजदूर का मास्टर रोल बंद हो जाने के बाद 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान नहीं होता, तो बकाया राशि पर प्रतिदिन 0.05 प्रतिशत की दर से स्वतः क्षतिपूर्ति देय होगी। यह व्यवस्था भुगतान में देरी को रोकने और मजदूरों के श्रम का समय पर सम्मान सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

वीबी-जी राम जी योजना को मनरेगा से अलग बताते हुए मंत्री ने कहा कि दोनों योजनाओं में कई बुनियादी अंतर हैं। मनरेगा में केंद्र सरकार द्वारा मांग आधारित फंडिंग की जाती थी, जबकि नई योजना में राज्यों की जनसंख्या, प्रति व्यक्ति आय और पिछड़ेपन को आधार बनाकर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही प्रत्येक राज्य के लिए एक निश्चित बजट तय किया जाएगा। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक स्पष्टता और वित्तीय स्थिरता आएगी।

नई योजना की एक विशेषता यह भी है कि ग्राम पंचायतों को उनकी स्थानीय जरूरतों, विकास सूचकांक और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर तीन श्रेणियों—ए, बी और सी में विभाजित किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास कार्य केवल एक समान ढर्रे पर न चलें, बल्कि प्रत्येक पंचायत की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप योजनाएं तैयार और लागू की जाएं। सरकार का मानना है कि इससे विकेंद्रीकृत विकास मॉडल को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास करना है। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और जीविका दीदियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन ग्रामीण विकास के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यह योजना न केवल बिहार बल्कि देशभर के करोड़ों ग्रामीण श्रमिक परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती है।

रोजगार गारंटी के मामले में भी वीबी-जी राम जी योजना मनरेगा से आगे निकलती दिख रही है। जहां मनरेगा के तहत मजदूरों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलती थी, वहीं नई योजना में अकुशल कामगारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। इससे ग्रामीण परिवारों की वार्षिक आय में वृद्धि होने की उम्मीद है।

वित्तीय भागीदारी के स्तर पर भी बड़ा बदलाव किया गया है। मनरेगा में अकुशल मजदूरी की पूरी राशि केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन वीबी-जी राम जी योजना में अकुशल मजदूरी मद की 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन करेगी। यह राज्य की बढ़ी हुई जिम्मेदारी को दर्शाता है और यह संकेत भी देता है कि बिहार सरकार ग्रामीण रोजगार को प्राथमिकता दे रही है।

मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत नौ महीने के लिए केंद्रांश के रूप में 6715 करोड़ 83 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। वहीं इसी अवधि के लिए राज्य सरकार ने 4477 करोड़ 22 लाख रुपये का प्रावधान किया है। इतने बड़े वित्तीय निवेश से स्पष्ट है कि सरकार इस योजना को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए गंभीर है।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने जल-जीवन-हरियाली मिशन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्यभर में अब तक 20 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 1.25 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर हुए पौधरोपण का परिणाम है कि बिहार का हरित क्षेत्र 9 प्रतिशत से बढ़कर 16 प्रतिशत तक पहुंच गया है। विभाग आने वाले समय में इसे 33 प्रतिशत तक पहुंचाने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रहा है।

ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव ने मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वीबी-जी राम जी योजना ग्रामीण विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने की नहीं, बल्कि पारदर्शी और समावेशी विकास मॉडल स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उनके अनुसार, बिहार के मजदूर न केवल राज्य बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी बड़ी भागीदारी निभाएंगे।

कार्यक्रम में जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि वीबी-जी राम जी योजना की आयुक्त ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर जल-जीवन-हरियाली मिशन निदेशक , बीआरडीएस के मुख्य कार्यपालन पदाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, वीबी-जी राम जी योजना बिहार के ग्रामीण श्रमिकों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। रोजगार की गारंटी, बेरोजगारी भत्ता, भुगतान में देरी पर क्षतिपूर्ति और पंचायत आधारित विकास मॉडल जैसी विशेषताएं इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली एक दूरदर्शी योजना बनाती हैं। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह योजना जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव छोड़ती है और ग्रामीण बिहार को किस हद तक आत्मनिर्भर बनाने में सफल होती है।

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