
भागलपुर, 2 जुलाई। भागलपुर जिले के रंगरा प्रखंड में डिग्री कॉलेज के स्थानांतरण को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। रंगरा स्थित तेजनारायण उच्च विद्यालय परिसर से डिग्री कॉलेज को स्थानांतरित किए जाने के खिलाफ छात्रों और ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। इसी क्रम में कॉलेज स्थानांतरण के विरोध में शुरू किया गया अनिश्चितकालीन आमरण अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। छात्रों का कहना है कि जब तक स्थानांतरण आदेश वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
मंगलवार को शुरू हुए इस आमरण अनशन में दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में छात्र, छात्राएं, अभिभावक और ग्रामीण अनशन स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों का समर्थन किया। अनशन पर बैठे प्रमुख छात्र नेताओं में , और शामिल हैं। तीनों छात्र लगातार अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन पर डटे हुए हैं।
आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि डिग्री कॉलेज को रंगरा से हटाकर विनोबा भावे महाविद्यालय स्थानांतरित करने का फैसला क्षेत्र के छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है। उनका कहना है कि रंगरा प्रखंड के हजारों छात्र-छात्राएं इसी कॉलेज पर उच्च शिक्षा के लिए निर्भर हैं। ऐसे में कॉलेज के स्थानांतरण से उनकी पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ेगा और उच्च शिक्षा प्राप्त करना कठिन हो जाएगा।
अनशन स्थल पर छात्रों और ग्रामीणों की एकजुटता लगातार बढ़ती दिख रही है। दूसरे दिन भी सैकड़ों लोग अनशनकारियों के साथ बैठे रहे और एक स्वर में सरकार से स्थानांतरण आदेश वापस लेने की मांग करते रहे। विशेष रूप से छात्राओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। कई छात्राएं अनशन स्थल पर बैठकर भावुक हो गईं और रोते हुए अपने शिक्षा के अधिकार की रक्षा की मांग करती नजर आईं। इससे आंदोलन का भावनात्मक पक्ष और मजबूत हो गया है।
अनशनकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि यह आंदोलन अचानक नहीं शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि आमरण अनशन से पहले छात्रों ने चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया था। इसमें विशाल मशाल जुलूस, पुतला दहन, आक्रोश मार्च और हस्ताक्षर अभियान जैसे कार्यक्रम शामिल थे। आशुतोष सिंह ने कहा कि इन सभी आंदोलनों में क्षेत्र के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, लेकिन सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई। मजबूर होकर अब छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं।
उन्होंने कहा, “हमारी मांग पूरी होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा। रंगरा के लोग पहले भी एकजुट होकर मशाल जुलूस और प्रदर्शन कर चुके हैं। अब भी सभी छात्र-छात्राएं और ग्रामीण हमारे साथ मजबूती से खड़े हैं। जब तक डिग्री कॉलेज रंगरा में ही संचालित करने का आदेश नहीं मिलता, हम पीछे नहीं हटेंगे।”
अनशनकारी अनुज चौरसिया ने कहा कि स्थानांतरण के विरोध में पूरे रंगरा प्रखंड में जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर वर्ग के लोग—छात्र, शिक्षक, अभिभावक और आम नागरिक—एक ही मांग को लेकर एकजुट हैं कि डिग्री कॉलेज को रंगरा के तेजनारायण उच्च विद्यालय परिसर में ही संचालित किया जाए। अनुज ने कहा कि कॉलेज भवन निर्माण और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी उसका स्थानांतरण करना क्षेत्र की जनता के साथ छल और धोखा है।
उन्होंने कहा, “यह समझ से परे है कि जब सारी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी थीं, तब अचानक कॉलेज को स्थानांतरित क्यों किया गया। यह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अगर सरकार यह निर्णय वापस नहीं लेती तो आंदोलन और तेज होगा।”
मृदुल शर्मा ने स्थानांतरण के नए स्थान को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि जिस तीनटैंगा दियारा क्षेत्र में कॉलेज स्थानांतरित किया जा रहा है, वह हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित रहता है। उनका कहना है कि यह क्षेत्र साल में तीन महीने से अधिक समय तक जलभराव और बाढ़ की समस्या झेलता है। ऐसे में वहां नियमित रूप से कॉलेज संचालित करना बेहद कठिन होगा।
मृदुल शर्मा ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कॉलेज संचालन से छात्रों को भारी परेशानी होगी। खासकर दूर-दराज के गांवों से आने वाले छात्रों और छात्राओं के लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि पूरे रंगरा क्षेत्र में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है और लोग आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।
अनशन स्थल पर मौजूद ग्रामीणों और आंदोलनकारियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि पहले शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी। सभी ने बिहार के उच्च शिक्षा मंत्री और स्थानीय विधायक से अपील की कि वे हस्तक्षेप कर स्थानांतरण आदेश को तत्काल रद्द कराएं और रंगरा में ही कॉलेज शुरू कराने की दिशा में कदम उठाएं।
हालांकि आंदोलनकारियों ने चेतावनी भी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। छात्रों ने साफ कहा कि आमरण अनशन के साथ-साथ आगे सड़क जाम, बड़ा धरना और व्यापक जन आंदोलन जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
इस आंदोलन को स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी समर्थन मिल रहा है। पूर्व विधायक समेत कई स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अनशन स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। इनके अलावा सियाराम मंडल, मोहम्मद फारुख, मोहम्मद भोलू, राकेश ठाकुर, राजन ठाकुर, बंटी ठाकुर, रोजी ठाकुर, पंकज जायसवाल, मोहम्मद हाकीम, सिकंदर मंडल, गुलशन झा, आनंद सिंह, दिवाकर सिंह, प्रियतोष सिंह, राजेश शर्मा और अन्य सैकड़ों ग्रामीणों ने अपनी सहमति और समर्थन व्यक्त किया।
हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं और क्षेत्रवासियों की मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि रंगरा में डिग्री कॉलेज का मुद्दा अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्रीय अस्मिता और भविष्य की लड़ाई बन चुका है। फिलहाल सभी की नजर सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।


