हर माह के अंतिम रविवार को होगा पंचायत विकास दिवस, समग्र विकास और जनभागीदारी को मिलेगी नई दिशा: मुख्यमंत्री

पटना, 28 जून 2026। बिहार में पंचायतों के समग्र विकास, जनभागीदारी और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। अब राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को “पंचायत विकास दिवस” आयोजित किया जाएगा। इस नई पहल का उद्देश्य पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं की समीक्षा, स्थानीय समस्याओं की पहचान और समाधान के लिए सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को मजबूत बनाना है।

इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुंगेर जिले के टेटिया बम्बर प्रखंड अंतर्गत टेटिया ग्राम पंचायत से किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को भी सुना और ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित किया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पंचायत विकास दिवस बिहार के ग्रामीण विकास मॉडल में एक नई क्रांति साबित होगा। उन्होंने कहा कि अब वर्ष में 12 ऐसे अवसर मिलेंगे जब पंचायत प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और ग्रामीण एक मंच पर बैठकर पंचायतों की समस्याओं, जरूरतों और विकास योजनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह व्यवस्था स्थानीय शासन को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाएगी।

उन्होंने कहा कि पंचायत विकास दिवस केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकास का ऐसा जनांदोलन है जो गांवों की तस्वीर बदल सकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार पहले से ही महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग शिविर आयोजित कर रही है, जिसके माध्यम से जनता की समस्याओं का समाधान किया जाता है। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग साढ़े तीन लाख से अधिक लंबित आवेदनों का निपटारा किया जा चुका है। उसी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए पंचायत विकास दिवस शुरू किया गया है, जो पंचायत स्तर की समस्याओं के समाधान का नया मंच बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को गरीबी मुक्त, स्वच्छ, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, जल प्रबंधन, पेयजल, स्वच्छता, हरित विकास, सामाजिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर नियमित चर्चा होगी। इन चर्चाओं के आधार पर पंचायत स्तर पर कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी और विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी।

उन्होंने सांसदों, विधायकों, जिला परिषद सदस्यों, पंचायत समिति सदस्यों, मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य और पंच सहित सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे ग्राम सभाओं में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि पंचायतों का विकास तभी संभव है जब निर्णय प्रक्रिया में जनता की सीधी भागीदारी हो।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायत विकास दिवस के पहले आयोजन की थीम “महिला हितैषी पंचायत” रखी गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी के बिना किसी भी पंचायत का समावेशी विकास संभव नहीं है। सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है और जीविका समूहों के माध्यम से लाखों महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से वे न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, बल्कि सामाजिक नेतृत्व की भूमिका भी निभा रही हैं। महिला हितैषी पंचायत का लक्ष्य महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसरों को मजबूत बनाना है।

शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी प्रखंडों में मॉडल स्कूल स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उनके अपने क्षेत्र में उपलब्ध हो सके।

उन्होंने कहा कि सरकार का सपना है कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता इतनी बेहतर हो कि निजी विद्यालयों के छात्र भी वहाँ पढ़ाई करना चाहें। इसी दिशा में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। डिग्री कॉलेज खुलने से ग्रामीण छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीबों के लिए आवास, बुनियादी सुविधाओं और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में केंद्र से बिहार को बड़ी आर्थिक सहायता प्राप्त होगी, जिससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे को और मजबूत किया जाएगा।

आवास योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में करोड़ों गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही बिहार में भी पिछले दो दशकों में बड़ी संख्या में लोगों को आवास सुविधा मिली है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और समृद्ध बिहार के सपने को साकार करने के लिए आत्मनिर्भर पंचायत और आत्मनिर्भर गांव आवश्यक हैं।

ऊर्जा क्षेत्र में सरकार की पहल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध करा रही है। भविष्य में सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देकर लोगों को दीर्घकालिक और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

कानून व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और कानून का राज हर हाल में कायम रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षित समाज ही विकास का आधार बन सकता है।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अस्पतालों की व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने लक्ष्य रखा कि 15 अगस्त से ऐसी व्यवस्था लागू हो जिससे अनुमंडल और जिला अस्पतालों में ही बेहतर इलाज संभव हो सके और मरीजों को अनावश्यक रेफरल की जरूरत न पड़े।

उन्होंने मुंगेर क्षेत्र में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने तारापुर की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे क्षेत्र की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए पूरी शक्ति से काम करेंगे।

कार्यक्रम को गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार, सांसद अरुण कुमार भारती तथा पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

पंचायत विकास दिवस की शुरुआत के साथ बिहार सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अब ग्रामीण विकास केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनता की सीधी भागीदारी के साथ पंचायत स्तर पर विकास की नई इबारत लिखी जाएगी। यह पहल आने वाले समय में बिहार के गांवों को आत्मनिर्भर, समृद्ध और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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