
देश की सेवा करते हुए 2006 में जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में आतंकियों द्वारा बिछाई गई लैंड माइंस की चपेट में आने से भारतीय सेना के सूबेदार सोमन राणा ने अपना दाहिना पैर खो दिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। जिस हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी, उसी को उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।
गया के लक्खीबाग निवासी 44 वर्षीय सोमन राणा आज भारत के शीर्ष सीटिंग पैरा शॉट पुट खिलाड़ी हैं। उनका चयन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (ग्लासगो) के लिए हुआ है, जहां वे भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह बिहार के लिए भी ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि पहली बार राज्य का कोई पैरा एथलीट कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेगा।
देश सेवा में पैर गंवाया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी
सोमन राणा कहते हैं कि जब भी उन्हें अपने कृत्रिम पैर का ख्याल आता है, तो वे खुद से कहते हैं कि यह दिव्यांगता नहीं, बल्कि देश सेवा के लिए दिया गया उनका छोटा-सा बलिदान है। यही सोच उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देती रही।
परिवार, खासकर उनकी पत्नी का साथ उनके संघर्ष का सबसे बड़ा सहारा बना। आज वे हर दिन 8 घंटे से अधिक अभ्यास कर रहे हैं ताकि कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत सकें।
साधारण किसान परिवार से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
सोमन राणा का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। बचपन में पढ़ाई के साथ खेतों में माता-पिता का हाथ भी बंटाते थे। पिता सोन बहादुर राणा का सपना था कि बेटा सरकारी नौकरी करे। मेहनत के दम पर सोमन भारतीय सेना में भर्ती हुए और फिर देश सेवा के दौरान घायल होने के बाद भी सेना नहीं छोड़ी।
पैरा खेलों में बनाया नया मुकाम
2017 में उन्होंने पुणे स्थित आर्मी पैरा स्पोर्ट्स नोड में प्रशिक्षण शुरू किया। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।
- 2023 एशियन पैरा गेम्स (चीन) – रजत पदक
- 2025 खेलो इंडिया – स्वर्ण पदक
- 2024 पैरालंपिक – पांचवां स्थान
- 2017 से अब तक 9 राष्ट्रीय स्वर्ण पदक
- वर्तमान में कॉमनवेल्थ गेम्स क्वालीफिकेशन में विश्व रैंकिंग नंबर-1
अब उनका लक्ष्य 16.60 मीटर का रिकॉर्ड तोड़कर भारत के लिए गोल्ड जीतना है।
प्रधानमंत्री मोदी से मिली थी प्रेरणा

सोमन राणा ने बताया कि वर्ष 2022 में सेना के एक कार्यक्रम के दौरान उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई थी। प्रधानमंत्री ने उनका हौसला बढ़ाते हुए आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी थी। सोमन कहते हैं कि वह पल उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणाओं में से एक है।
पिता को बेटे पर गर्व
पिता सोन बहादुर राणा कहते हैं कि जब बेटे के घायल होने की खबर मिली थी, तब भी उन्हें विश्वास था कि उनका बेटा एक दिन फिर देश का नाम रोशन करेगा। आज वही बेटा कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पदक जीतने की तैयारी कर रहा है।
अब पूरे बिहार और देश को उम्मीद है कि सूबेदार सोमन राणा ग्लासगो में तिरंगा लहराकर देश के नाम एक और स्वर्णिम इतिहास लिखेंगे।


