
बिहार के रोहतास जिले में खरीफ सीजन के बीच सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। काराकाट प्रखंड क्षेत्र में बरडीहा से सकला तक गुजरने वाली सकला रजवाहा नहर में पर्याप्त पानी नहीं छोड़े जाने से धान की नर्सरी सूखने लगी है। नहर से जुड़े सैकड़ों गांवों के हजारों एकड़ खेतों में सिंचाई प्रभावित होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
रोहतास को बिहार का ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, लेकिन इसी जिले में सिंचाई व्यवस्था चरमराने से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द नहर में पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया तो इस वर्ष धान की खेती पर गंभीर संकट आ सकता है।
किसानों के अनुसार, नहर में पानी का प्रवाह बेहद कम होने से खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इसका सीधा असर धान की तैयार नर्सरी पर पड़ रहा है और बिचड़े सूखने की कगार पर हैं। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति रही तो उन्हें दोबारा नर्सरी तैयार करनी पड़ेगी, जिससे लागत और बढ़ जाएगी।
स्थानीय किसान अशोक तिवारी, जगदीश तिवारी, गोरख तिवारी, सुरेंद्र शर्मा और आनंद तिवारी ने बताया कि इस वर्ष धान के बीज की कीमत लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। वहीं डीजल की बढ़ती कीमतों ने ट्रैक्टर, पंपसेट और अन्य कृषि कार्यों का खर्च भी बढ़ा दिया है। ऐसे में नर्सरी खराब होने से किसानों पर दोहरी मार पड़ेगी।
किसानों का कहना है कि इस बार मानसून भी अपेक्षित बारिश नहीं दे पाया है। खेत पहले से सूखे हैं और अब नहरों में पर्याप्त पानी नहीं मिलने से हालात और खराब हो गए हैं। उनका आरोप है कि सिंचाई विभाग जरूरत के मुताबिक पानी उपलब्ध नहीं करा रहा है।
किसानों ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से सकला रजवाहा नहर में तत्काल पर्याप्त पानी छोड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो हजारों एकड़ में धान की खेती प्रभावित होगी और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
वहीं सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता अजय कुमार सिंह ने दावा किया कि नहरों में पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार जल प्रवाह सुनिश्चित किया गया है। उनके अनुसार वर्तमान में लगभग 7000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है और किसानों के लिए पानी की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। विभाग का लक्ष्य इस वर्ष 4.61 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करना है।
हालांकि किसानों का कहना है कि कागजों पर पानी छोड़े जाने के दावों के बावजूद खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। उनका आरोप है कि “मानसून और सरकार दोनों ने अन्नदाता को निराश किया है।” अब पूरे क्षेत्र के किसानों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।


