
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की चर्चित पुलिस पाठशाला अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक शोध का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन गई है। रेड लाइट एरिया में संचालित इस अनूठी पहल के कार्यों का अध्ययन अब देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के शोधार्थी करेंगे।
इसी क्रम में कोलकाता के विश्व भारती विश्वविद्यालय से रिसर्च स्कॉलर शशांक मुजफ्फरपुर पहुंचे हैं। वे रेड लाइट एरिया के बच्चों की शिक्षा, सामाजिक बदलाव और पुलिस पाठशाला की भूमिका पर विस्तृत शोध करेंगे।
शशांक ने बताया कि उन्हें पुलिस पाठशाला की जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता पार्थ सुनेश के माध्यम से मिली थी। संस्था के कार्यों का अध्ययन करने के बाद उन्होंने अपनी 90 दिनों की इंटर्नशिप के लिए इसी संस्थान का चयन किया।
उन्होंने कहा कि सेक्स वर्कर्स के बच्चों की चुनौतियां सामान्य समाज से अलग हैं। ऐसे बच्चों की शिक्षा, सपनों और सामाजिक संघर्ष को समझना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार पुलिस पाठशाला ने इन बच्चों के भीतर आत्मविश्वास जगाया है और उन्हें बेहतर भविष्य का सपना देखने की प्रेरणा दी है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता नसीमा खातून ने कहा कि पुलिस पाठशाला अब केवल स्थानीय बच्चों के लिए नहीं, बल्कि देशभर के शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए भी सीखने का मंच बन रही है। उनका मानना है कि समुदाय के बीच रहकर किए गए अध्ययन से समाज को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे शोध भविष्य में समाज की सोच बदलने में मदद करेंगे और सेक्स वर्कर्स के बच्चों को भी सम्मान, समान अवसर और बेहतर पहचान दिलाने की दिशा में नई राह खोलेंगे।


