“हाफ एनकाउंटर कर देते…” भरत तिवारी मुठभेड़ पर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का बड़ा बयान, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

आरा/बक्सर: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब राजनीतिक रंग पकड़ लिया है। बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

बक्सर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में शिक्षा मंत्री ने कहा कि युवक का व्यवहार सही नहीं था, लेकिन पुलिस को कार्रवाई से पहले उसके आपराधिक इतिहास की पूरी जानकारी लेनी चाहिए थी।

“एनकाउंटर जरूरी था तो हाफ एनकाउंटर करते”

मिथिलेश तिवारी का बयान अब चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा,

“उस बच्चे ने सोशल मीडिया पर जो व्यवहार दिखाया, वह उचित नहीं था। पुलिस को उसके आपराधिक इतिहास का पता लगाना चाहिए था। अगर एनकाउंटर जरूरी भी था तो हाफ एनकाउंटर कर देते।”

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बिहार सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है और जांच के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

चार पुलिसकर्मी निलंबित, जांच जारी

शिक्षा मंत्री ने बताया कि घटना के बाद सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

बुधवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक युवक पुलिस के सामने पिस्टल लेकर खड़ा दिखाई दे रहा था। बाद में उसकी पहचान भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के रूप में हुई।

पुलिस के अनुसार, भरत तिवारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित किया था और पुलिस कार्रवाई के दौरान फायरिंग की थी। पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी, जिसमें वह घायल हो गया।

घायल अवस्था में उसे पहले आरा सदर अस्पताल और बाद में बेहतर इलाज के लिए पटना पीएमसीएच भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

सरेंडर के दावे से बढ़ा विवाद

मामले में नया मोड़ तब आया जब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भरत तिवारी खुद को सरेंडर करने की बात करता दिखाई दिया। इसी आधार पर परिजन और ग्रामीण पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि भरत तिवारी के खिलाफ पहले कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और वह आत्मसमर्पण करने की स्थिति में था। ऐसे में पुलिस की गोलीबारी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

शव पहुंचते ही भड़का आक्रोश

गुरुवार को जब भरत तिवारी का शव गांव पहुंचा तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। कुछ स्थानों पर पथराव की भी खबर सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर स्थिति को नियंत्रित किया।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

भरत तिवारी एनकाउंटर अब केवल पुलिस कार्रवाई का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून, मानवाधिकार और पुलिस जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। सरकार की ओर से जांच जारी है और पूरे मामले पर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है।

अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह स्पष्ट करेगी कि यह पुलिस की मजबूरी में की गई कार्रवाई थी या फिर मामले में कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है।

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