
पटना: बिहार के लाखों सरकारी शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अब शिक्षकों को अपने घर के नजदीक पदस्थापन का अवसर मिलेगा। इसके लिए शिक्षा विभाग जिला कैडर व्यवस्था लागू करने जा रहा है, जिसके तहत शिक्षक अपनी पसंद का जिला चुन सकेंगे।
रामगढ़ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि 25 जून के बाद शिक्षकों के मोबाइल पर एक विशेष नोटिफिकेशन भेजा जाएगा। इसके माध्यम से शिक्षक अपनी पसंद का जिला चयन कर सकेंगे। जिला चयन के बाद संबंधित शिक्षक उसी जिले के कैडर का हिस्सा बन जाएंगे और भविष्य में उसी जिले में उनकी सेवा मानी जाएगी।
महिला और पुरुष शिक्षकों के लिए अलग व्यवस्था
शिक्षा मंत्री ने बताया कि महिला शिक्षकों को उनके निकटतम पंचायत क्षेत्र में पदस्थापित करने की योजना है, जबकि पुरुष शिक्षकों की पोस्टिंग निकटतम प्रखंड में की जाएगी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिक्षकों द्वारा घर से दूर पदस्थापन की समस्या उठाई जा रही थी, जिसे दूर करने के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को केवल दो या तीन नहीं बल्कि लगभग 30 विकल्प दिए जाएंगे, ताकि वे अपनी सुविधा के अनुसार स्थान का चयन कर सकें।
जिला बदलने पर खत्म होगी वरिष्ठता
मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिला चयन के बाद शिक्षक उसी जिले के माने जाएंगे। यदि कोई शिक्षक बाद में जिला बदलना चाहता है, तो उसे अपनी वरिष्ठता छोड़नी होगी। सरकार का उद्देश्य शिक्षकों की पदस्थापन प्रक्रिया को स्थायी और पारदर्शी बनाना है।
“सरस्वती माता का मंत्रालय है शिक्षा विभाग”
अपने संबोधन में शिक्षा मंत्री ने भ्रष्टाचार पर भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग सरस्वती माता का मंत्रालय है और यहां किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी को केवल धन कमाने की मानसिकता से काम करना है तो वह दूसरे विभाग का विकल्प तलाश सकता है, क्योंकि शिक्षा विभाग में केवल बच्चों के भविष्य निर्माण पर ध्यान दिया जाएगा।
शिक्षकों की निगरानी करेगी एआई तकनीक
शिक्षा मंत्री ने बताया कि स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और गतिविधियों की निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रणाली लागू की जाएगी। यदि कोई शिक्षक विद्यालय परिसर से बाहर जाता है तो उसकी जानकारी स्वतः दर्ज होगी।
उन्होंने कहा कि स्कूल समय के दौरान बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थित रहने पर उपस्थिति प्रभावित होगी और संबंधित कार्रवाई भी की जा सकती है।
छात्रों के प्रदर्शन से होगा शिक्षकों का मूल्यांकन
नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों का मूल्यांकन केवल उपस्थिति के आधार पर नहीं बल्कि छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन और प्रगति रिपोर्ट के आधार पर भी किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
हर प्रखंड में बनेगा मॉडल विद्यालय
शिक्षा मंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य के प्रत्येक प्रखंड में एक मॉडल विद्यालय विकसित किया जाएगा। जिन विद्यालयों के पास भूमि की समस्या है या जिनका हाल में उन्नयन हुआ है, उनकी सूची तैयार कर विशेष विकास कार्य किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएगी, लेकिन बच्चों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बिहार सरकार के इस फैसले को राज्य के लाखों शिक्षकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। लंबे समय से घर से दूर रहकर सेवा देने वाले शिक्षकों को अब अपने परिवार के नजदीक रहने और बेहतर ढंग से कार्य करने का अवसर मिल सकेगा।


