
भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड अंतर्गत बिलौटी गांव निवासी नवयुवक स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी की मृत्यु की घटना अत्यंत दुःखद, हृदयविदारक एवं चिंताजनक है। इस घटना ने समाज के प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर दिया है। मैं इस घटना से अत्यंत मर्माहत हूं और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।
प्राप्त जानकारी एवं सार्वजनिक रूप से सामने आए वीडियो के आधार पर यह गंभीर प्रश्न उठता है कि यदि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, तो उसके बाद उसके साथ कानून सम्मत प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को न्यायपूर्ण सुनवाई और विधिसम्मत कार्रवाई का अधिकार प्रदान करता है। कानून के शासन में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या प्रक्रिया से इतर कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती।
मैं माननीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी से आग्रह करता हूं कि इस मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच सुनिश्चित कराएं। यदि जांच में किसी भी स्तर पर पुलिस प्रशासन या अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध अथवा दोषपूर्ण पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
साथ ही बिहार सरकार से भी मांग करता हूं कि इस पूरे प्रकरण की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सत्य सामने आ सके और जनता का कानून एवं प्रशासन पर विश्वास मजबूत बना रहे। कानून का राज तभी स्थापित होगा जब दोषी चाहे किसी भी पद या प्रभाव में हों, उनके विरुद्ध समान रूप से कार्रवाई हो।
युवाओं को न्याय व्यवस्था पर भरोसा दिलाना तथा समाज में कानून के प्रति सम्मान बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। किसी भी नागरिक के साथ न्यायिक प्रक्रिया से इतर व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।
मैं दिनांक 22 जून 2026 को बिलौटी गांव पहुंचकर स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी के परिजनों से मुलाकात करूंगा और उन्हें अपनी संवेदनाएं व्यक्त करूंगा।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
अश्विनी कुमार चौबे
पूर्व केंद्रीय मंत्री, भारत सरकार


