
बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर सरकार ने अपना रुख और कड़ा कर दिया है। राज्य के मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने स्पष्ट कहा है कि बिहार में शराबबंदी खत्म करने का कोई सवाल नहीं है, बल्कि कानून को और प्रभावी तथा सख्त बनाया जा रहा है।
दरभंगा दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में मंत्री ने बताया कि हाल ही में पटना में शराबबंदी की समीक्षा बैठक हुई, जिसमें तस्करी रोकने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
5 प्रमुख चेक पोस्ट पर बढ़ेगी सख्ती
मंत्री ने बताया कि राज्य के पांच प्रमुख चेक पोस्टों पर निगरानी और कड़ी की जाएगी। रेलवे, एयरपोर्ट और सीमा सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक कर बाहर से आने वाली विदेशी शराब पर पूरी तरह नकेल कसने की रणनीति बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि बड़े स्कैनर लगाए जाएंगे ताकि वाहनों, सामान और पार्सलों की प्रभावी जांच हो सके। किसी भी माध्यम से शराब लाने की कोशिश होने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
शराब कंपनियों के मालिकों पर भी दर्ज होगी FIR
मदन सहनी ने कहा कि यदि किसी कंपनी की शराब बिहार में तस्करी के जरिए पहुंचती पाई जाती है तो केवल तस्करों पर ही नहीं, बल्कि संबंधित कंपनी के मालिकों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अधिकारियों की टीम दूसरे राज्यों में जाकर भी कार्रवाई करेगी। साथ ही आय से अधिक संपत्ति और शराब कारोबार से जुड़े मामलों में स्पीडी ट्रायल चलाने पर भी जोर दिया जाएगा।
ट्रेनों और अन्य माध्यमों पर विशेष निगरानी
समीक्षा बैठक में बिहार आने वाली प्रमुख ट्रेनों में नियमित जांच अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। रेलवे स्टेशनों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि राज्य में बड़ी मात्रा में शराब सड़क मार्ग से भी पहुंचती है। ऐसे में सड़क मार्ग पर निगरानी और चेकिंग को लेकर सरकार की आगे की रणनीति पर भी लोगों की नजर बनी हुई है।
सरकार का स्पष्ट संदेश
राज्य सरकार का कहना है कि शराबबंदी कानून को कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत किया जाएगा। तस्करी, अवैध कारोबार और शराब की सप्लाई चेन से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी ताकि बिहार में शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।


