बापू टावर में ‘प्रश्न के रूप में म्यूजियम’ पर विशेष व्याख्यान, संग्रहालयों को संवाद और सामाजिक विमर्श का केंद्र बनाने पर जोर

पटना: राजधानी पटना स्थित बापू टावर में शनिवार को संग्रहालयों की बदलती भूमिका और समकालीन समाज में उनकी प्रासंगिकता पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। देश की जानी-मानी संग्रहालयविद अवनी सेठी ने ‘प्रश्न के रूप में म्यूजियम’ विषय पर अपने विचार रखते हुए संग्रहालयों को केवल ऐतिहासिक वस्तुओं के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखने, बल्कि उन्हें समाज के महत्वपूर्ण प्रश्नों और संवाद का जीवंत मंच बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में इतिहासकारों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, बुद्धिजीवियों और बड़ी संख्या में इतिहास एवं संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों ने भाग लिया।

बापू टावर के अत्याधुनिक सभागार में आयोजित इस व्याख्यान की अध्यक्षता प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. इम्तियाज अहमद ने की। कार्यक्रम का उद्देश्य संग्रहालयों की पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर आधुनिक समय में उनकी नई भूमिका और सामाजिक उपयोगिता पर चर्चा करना था। व्याख्यान के दौरान वक्ता ने अपने अनुभवों और विभिन्न संग्रहालय परियोजनाओं के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया कि आज के दौर में संग्रहालय केवल अतीत की स्मृतियों को संजोने वाले संस्थान नहीं, बल्कि वर्तमान समाज के जटिल मुद्दों पर विचार-विमर्श के महत्वपूर्ण केंद्र भी बन सकते हैं।

अपने संबोधन में अवनी सेठी ने अहमदाबाद और रायपुर में स्थापित कॉन्फ्लिक्टोरियम म्यूजियम की परिकल्पना, निर्माण और संचालन से जुड़े अनुभव विस्तार से साझा किए। उन्होंने बताया कि इस संग्रहालय की स्थापना का उद्देश्य केवल वस्तुओं का प्रदर्शन करना नहीं था, बल्कि समाज में मौजूद संघर्षों, मतभेदों, असमानताओं और संवाद की आवश्यकता को रचनात्मक तरीके से लोगों के सामने प्रस्तुत करना था।

उन्होंने कहा कि समय के साथ संग्रहालयों की अवधारणा में भी बदलाव आना आवश्यक है। पहले संग्रहालयों को मुख्य रूप से प्राचीन सभ्यताओं, ऐतिहासिक धरोहरों और दुर्लभ वस्तुओं के संरक्षण के स्थान के रूप में देखा जाता था, लेकिन वर्तमान समय में समाज जिन चुनौतियों और प्रश्नों से गुजर रहा है, उन्हें भी संग्रहालयों के माध्यम से सामने लाया जा सकता है। इससे लोगों को इतिहास के साथ-साथ वर्तमान को समझने का भी अवसर मिलता है।

अवनी सेठी ने कहा कि संग्रहालय यदि लोगों को सोचने, सवाल पूछने और संवाद करने के लिए प्रेरित करें तो उनकी उपयोगिता कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि म्यूजियम केवल देखने की जगह नहीं, बल्कि सीखने, विचार करने और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम भी होना चाहिए।

व्याख्यान के दौरान उन्होंने वर्ष 2013 में अहमदाबाद में स्थापित कॉन्फ्लिक्टोरियम की यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि शुरुआत में यह एक प्रयोग के रूप में शुरू किया गया था, लेकिन समय के साथ इसे देशभर में नई सोच वाले संग्रहालय के रूप में पहचान मिली। इसके बाद रायपुर में भी इसी अवधारणा पर कार्य किया गया, जहां लोगों की सहभागिता और संवाद को प्राथमिकता दी गई।

कार्यक्रम के दौरान अवनी सेठी ने बापू टावर का भी अवलोकन किया और यहां विकसित आधुनिक प्रदर्शनी व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के जीवन, विचारों और मूल्यों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों के जरिए जिस प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है, वह दर्शकों को एक नया अनुभव प्रदान करता है। उनके अनुसार इस प्रकार की तकनीकी प्रस्तुति युवाओं को इतिहास और गांधीवादी विचारधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे इतिहासकार प्रो. इम्तियाज अहमद ने अपने संबोधन में कहा कि अवनी सेठी का व्याख्यान संग्रहालयों के बारे में नई दृष्टि विकसित करने वाला रहा। उन्होंने कहा कि आमतौर पर संग्रहालयों को केवल ऐतिहासिक वस्तुओं के प्रदर्शन तक सीमित समझा जाता है, लेकिन इस व्याख्यान ने यह स्पष्ट किया कि आधुनिक संग्रहालय समाज, संस्कृति और समकालीन मुद्दों पर गंभीर विमर्श के प्रभावी मंच भी बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बौद्धिक कार्यक्रम छात्रों, शोधार्थियों और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होते हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को इतिहास, संस्कृति और सामाजिक बदलावों को व्यापक दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिलता है।

बापू टावर के निदेशक विनय कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बापू टावर केवल महात्मा गांधी के जीवन और विचारों को प्रदर्शित करने वाला केंद्र नहीं है, बल्कि इसे ज्ञान, शोध और बौद्धिक संवाद के महत्वपूर्ण मंच के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के व्याख्यान, संगोष्ठियों और विचार-विमर्श कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाएगा, ताकि समाज के विभिन्न वर्गों को संग्रहालयों और सांस्कृतिक विरासत के नए आयामों से परिचित कराया जा सके।

कार्यक्रम का संचालन उपनिदेशक ललित कुमार सिंह ने किया। पूरे आयोजन के दौरान विषय की गंभीरता और गरिमा बनाए रखते हुए वक्ताओं तथा उपस्थित अतिथियों के बीच संवाद को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया गया। अंत में प्रशाखा पदाधिकारी प्रत्यूष चंद्र मिश्र ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर पटना के बड़ी संख्या में शिक्षाविद, बुद्धिजीवी, इतिहासकार, शोधार्थी, विद्यार्थी, सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े लोग तथा बापू टावर के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से संग्रहालयों की बदलती भूमिका, आधुनिक तकनीक के उपयोग और समाज में संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा हुई, जिसे उपस्थित लोगों ने अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया।

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