
सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिले में सोमवार देर रात आई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि एक पूरा परिवार खत्म हो गया। रीगा थाना क्षेत्र के रेवासी धनुषी टोला में एक विशाल पीपल का पेड़ मकान पर गिरने से एक ही परिवार के पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम है।
जानकारी के अनुसार, रेवासी धनुषी टोला निवासी सिकंदर सहनी का परिवार सोमवार रात घर में सो रहा था। देर रात अचानक तेज आंधी और बारिश शुरू हो गई। इसी दौरान घर के पास खड़ा वर्षों पुराना विशाल पीपल का पेड़ जड़ से उखड़कर सीधे मकान पर गिर पड़ा। पेड़ गिरते ही मकान का बड़ा हिस्सा ढह गया और परिवार के सदस्य मलबे में दब गए।
मौके पर ही चार लोगों की मौत
हादसे की तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद मलबा हटाया गया, लेकिन तब तक चार लोगों की मौत हो चुकी थी। मृतकों में सिकंदर सहनी की पत्नी पूजा देवी (28 वर्ष), सात वर्षीय पुत्र राजकुमार, पांच वर्षीय पुत्री शिवानी कुमारी और एक माह का नवजात पुत्र टाइगर कुमार शामिल हैं।
अस्पताल में टूटी आखिरी उम्मीद
मलबे में दबे दो वर्षीय वीरभद्र कुमार को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन गंभीर चोटों के कारण इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर पांच हो गई।
गांव में पसरा मातम, रो-रोकर बेहाल परिजन
एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। पड़ोसी, रिश्तेदार और ग्रामीण स्तब्ध हैं। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी त्रासदी कैसे हो गई। गांव में हर तरफ चीख-पुकार और मातम का माहौल है।
प्रशासन ने शुरू की राहत प्रक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
पुराने पेड़ को लेकर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यह पीपल का पेड़ काफी पुराना था और लंबे समय से मकान के बेहद करीब खड़ा था। लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण इसकी जड़ें कमजोर हो गई थीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि ऐसे जर्जर और खतरनाक पेड़ों की समय रहते पहचान कर उन्हें हटाया जाता तो शायद इतना बड़ा हादसा टल सकता था।
प्राकृतिक आपदा ने छीन ली पांच जिंदगियां
सीतामढ़ी की यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक ऐसी त्रासदी है जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। कुछ ही पलों में एक मां और उसके चार मासूम बच्चों की जिंदगी खत्म हो गई। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सुरक्षा और सतर्कता की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।
फिलहाल प्रशासन मामले की जांच कर रहा है और पीड़ित परिवार को राहत पहुंचाने की कार्रवाई जारी है।


