
मुजफ्फरपुर: प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि अस्पताल के आईसीयू में गंभीर तकनीकी लापरवाही बरती गई थी। सूत्रों के मुताबिक, जिस वायरिंग की क्षमता केवल दो एयर कंडीशनर (एसी) चलाने की थी, उसी पर एक साथ छह एसी संचालित किए जा रहे थे। इसी वजह से ओवरलोडिंग हुई और शॉर्ट सर्किट के बाद भीषण आग लग गई।
जिलाधिकारी द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच समिति अपनी रिपोर्ट सौंपने की तैयारी में है। जांच में सामने आया है कि आग सबसे पहले आईसीयू के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में लगी और फिर तेजी से वेंटिलेटर समेत अन्य हिस्सों में फैल गई। कुछ ही मिनटों में पूरा आईसीयू धुएं और आग की चपेट में आ गया।
फायर सेफ्टी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
जांच टीम को अस्पताल की अग्निशमन व्यवस्था में भी कई खामियां मिली हैं। अस्पताल प्रबंधन से फायर सेफ्टी उपकरणों, फायर हाइड्रेंट सिस्टम और कर्मचारियों के प्रशिक्षण से संबंधित दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका। इससे अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अस्पताल नहीं दिखा सका भवन का नक्शा
मामले को और गंभीर तब माना गया जब अस्पताल प्रशासन भवन का स्वीकृत नक्शा तक उपलब्ध नहीं करा सका। नगर निगम की टीम ने चार दिनों तक इंतजार करने के बाद अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया कि अस्पताल प्रबंधन नक्शा प्रस्तुत करने में विफल रहा। इससे आशंका जताई जा रही है कि भवन में बिना अनुमति के अतिरिक्त निर्माण कराया गया हो सकता है।
2014 में हुआ था अस्पताल का उद्घाटन
जानकारी के अनुसार प्रसाद हॉस्पिटल का उद्घाटन वर्ष 2014 में हुआ था। जांच एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि बाद के वर्षों में भवन में हुए निर्माण कार्य नियमानुसार स्वीकृत थे या नहीं। माना जा रहा है कि यह बिंदु भी जांच रिपोर्ट का अहम हिस्सा बनेगा।
कई दस्तावेज अब तक नहीं मिले
सिविल सर्जन ने भी स्वीकार किया है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा मांगी गई कई महत्वपूर्ण जानकारियां और दस्तावेज अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इससे जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की संभावना भी मजबूत होती दिख रही है।
7 मरीजों की गई थी जान
गौरतलब है कि 5 जून की अहले सुबह करीब 3 बजे प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में भीषण आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में अब तक सात मरीजों की मौत हो चुकी है। घटना के बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया था और कई विभागों की टीमें अलग-अलग स्तर पर जांच में जुटी हुई हैं।
अब सभी की निगाहें जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस दर्दनाक हादसे के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी।


