
बिहार में रसोई गैस, पाइप्ड नेचुरल गैस और पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को लेकर राज्य सरकार लगातार निगरानी बनाए हुए है। इसी क्रम में सोमवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में राज्य की ऊर्जा और ईंधन आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में आम लोगों तक गैस और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने, पाइप्ड नेचुरल गैस नेटवर्क के विस्तार को गति देने तथा एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (सीएमजी) की आठवीं बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ तेल एवं गैस कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में एलपीजी, पीएनजी और पेट्रोलियम उत्पादों की मौजूदा स्थिति का आकलन करना और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार करना था।
राज्य में ईंधन आपूर्ति सामान्य, घबराने की जरूरत नहीं
बैठक में समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि बिहार में वर्तमान समय में पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की आपात या गंभीर स्थिति नहीं है। सरकार ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रूप से काम कर रही है और आम उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि राज्य के सभी जिलों में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति नियमित रूप से जारी है। इसके अलावा घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति भी सामान्य रूप से संचालित हो रही है। सरकार ने जनता से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से ईंधन या गैस का भंडारण न करें।
टेलीकॉम और निर्माण कार्यों के लिए डीजल आपूर्ति रहेगी निर्बाध
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राज्य में चल रहे सभी महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों और दूरसंचार सेवाओं के संचालन के लिए डीजल की आपूर्ति में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आने दी जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया कि मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए टेलीकॉम टावरों को पर्याप्त मात्रा में डीजल उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही सड़क, पुल, भवन और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में लगे उपकरणों को भी नियमित रूप से ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा ताकि विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो।
मजदूरों की सुविधा के लिए 5 किलो वाले गैस सिलेंडर की अनुमति
बैठक में निर्माण स्थलों और अनुबंध आधारित कार्यों में लगे श्रमिकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 5 किलोग्राम क्षमता वाले एफटीएल गैस सिलेंडरों के वितरण की अनुमति प्रदान की गई।
सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में ऐसे श्रमिक अस्थायी रूप से विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य करते हैं, जिन्हें छोटे और आसानी से उपयोग किए जा सकने वाले गैस सिलेंडरों की आवश्यकता होती है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इन सिलेंडरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि श्रमिकों को खाना बनाने और अन्य आवश्यक कार्यों में सुविधा मिल सके।
पीएनजी नेटवर्क विस्तार में बिहार की तेज प्रगति
बैठक के दौरान पाइप्ड नेचुरल गैस नेटवर्क की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि बिहार में पीएनजी विस्तार की दिशा में लगातार सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
राज्य के 38 जिलों में से अब 21 जिले गैस नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। इस प्रकार आधे से अधिक जिलों में पाइप्ड नेचुरल गैस की पहुंच स्थापित हो चुकी है। हाल ही में दरभंगा को भी गैसफाइड जिलों की सूची में शामिल किया गया है, जिससे इस क्षेत्र के उपभोक्ताओं को स्वच्छ और सुविधाजनक ईंधन उपलब्ध होने का रास्ता खुला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएनजी नेटवर्क का विस्तार होने से घरेलू उपभोक्ताओं को सिलेंडर पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी और सुरक्षित गैस आपूर्ति की सुविधा मिलेगी। साथ ही औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
एक महीने में 10 हजार से अधिक नए कनेक्शन
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 1 जून 2026 तक बिहार में कुल 1.19 लाख घरेलू पीएनजी कनेक्शन सक्रिय हो चुके हैं। यह संख्या राज्य में गैस नेटवर्क के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
केवल मई 2026 के दौरान ही 10,623 नए कनेक्शन चालू किए गए। अधिकारियों ने बताया कि यह वृद्धि पिछले कई महीनों की तुलना में उल्लेखनीय है और आने वाले समय में इस गति को और बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
औद्योगिक क्षेत्र को भी मिल रहा लाभ
पीएनजी नेटवर्क का विस्तार केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है बल्कि औद्योगिक क्षेत्र भी इसका लाभ उठा रहा है। बैठक में जानकारी दी गई कि सारण जिले के बेला स्थित भारतीय रेल के रेल व्हील प्लांट में सफलतापूर्वक पीएनजी आपूर्ति शुरू कर दी गई है।
इससे उद्योगों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध होने के साथ-साथ उत्पादन लागत में भी कमी आने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक औद्योगिक इकाइयों को गैस आधारित ऊर्जा प्रणाली से जोड़ा जाए।
एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त अभियान
बैठक में एलपीजी सिलेंडरों की अवैध बिक्री, जमाखोरी और व्यावसायिक उपयोग को रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियान की भी समीक्षा की गई।
अधिकारियों ने बताया कि राज्यभर में बड़े पैमाने पर निरीक्षण अभियान संचालित किया गया है। अब तक गैस एजेंसियों और अन्य स्थानों पर कुल 68,935 निरीक्षण किए जा चुके हैं। जांच के दौरान 2,348 सिलेंडर जब्त किए गए हैं।
इसके अलावा आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 6ए के तहत 40 मामले दर्ज किए गए हैं जबकि विभिन्न जिलों में कुल 155 प्राथमिकियां भी दर्ज की गई हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग और अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध
बैठक में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर भी विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों के अनुसार राज्य के सभी 3,590 पेट्रोल पंप पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं।
1 जून 2026 की सुबह तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बिहार में 3.5 से 4.5 दिनों का बैकअप स्टॉक मौजूद है। इसके अतिरिक्त तेल कंपनियों के टर्मिनलों पर भी पर्याप्त भंडारण क्षमता उपलब्ध है, जिससे उपभोक्ताओं की मांग आसानी से पूरी की जा सकती है।
मुख्य सचिव ने दिए कई अहम निर्देश
बैठक के अंत में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने विभिन्न एजेंसियों और संबंधित विभागों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीएनजी कनेक्शन के लिए लंबित लगभग 32,849 आवेदनों का जल्द निपटारा किया जाए। इसके लिए कंपनियां अतिरिक्त जनशक्ति और ठेकेदारों की नियुक्ति कर कार्यों में तेजी लाएं।
उन्होंने दरभंगा और सीवान जैसे जिलों में भूमि विवाद अथवा प्रशासनिक कारणों से रुकी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। जिला प्रशासन को स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित कर समस्याओं का समाधान करने को कहा गया।
साथ ही घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी में लंबित मामलों को कम करने और कंट्रोल रूम में प्राप्त शिकायतों का प्रतिदिन समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
सरकार का मानना है कि इन कदमों से राज्य में गैस और ईंधन आपूर्ति व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा आम लोगों के साथ-साथ उद्योगों और विकास परियोजनाओं को भी सीधा लाभ मिलेगा।


