15 जून तक हर खराब चापाकाल होगा चालू, मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दिया अल्टीमेटम; किसान रजिस्ट्री और सीमा सुरक्षा पर भी सख्त निर्देश

पटना। बिहार में बढ़ती गर्मी और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने खराब पड़े चापाकालों की मरम्मत को लेकर बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला किया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि 15 जून 2026 तक राज्य के सभी खराब चापाकाल हर हाल में चालू कर दिए जाएं। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

सोमवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने राज्य के विभिन्न विकासात्मक और प्रशासनिक मुद्दों की गहन समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में बिहार के सभी जिलाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग तथा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भी मौजूदगी रही।

बैठक के दौरान पेयजल व्यवस्था, किसान रजिस्ट्री, पीएम-किसान योजना, भारत-नेपाल सीमा से जुड़े सुरक्षा प्रबंध और ज्ञान भारतम सर्वेक्षण की प्रगति जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को मिशन मोड में कार्य करते हुए तय समय सीमा के भीतर परिणाम देने का निर्देश दिया।

पेयजल संकट रोकने के लिए राज्यव्यापी अभियान

गर्मी के मौसम में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा रहा। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के किसी भी गांव या मोहल्ले में लोगों को पीने के पानी के लिए परेशानी नहीं झेलनी चाहिए। इसके लिए खराब पड़े चापाकालों की पहचान कर उनकी तत्काल मरम्मत की जाए।

उन्होंने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को निर्देश दिया कि इस कार्य को सामान्य प्रक्रिया के बजाय विशेष अभियान के रूप में संचालित किया जाए। विभाग को अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने, तकनीकी कर्मियों की संख्या बढ़ाने और आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया ताकि मरम्मत कार्य तेजी से पूरा हो सके।

मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि दक्षिण बिहार के जिलों में जलस्तर गिरने की आशंका अपेक्षाकृत अधिक रहती है, इसलिए वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाए। उन्होंने कार्यपालक अभियंताओं को कार्यालयों में बैठने के बजाय सीधे फील्ड में जाकर काम की निगरानी करने का निर्देश दिया।

हर दिन होगी प्रगति की समीक्षा

बैठक में यह तय किया गया कि चापाकाल मरम्मत अभियान की प्रतिदिन निगरानी की जाएगी। संबंधित अधिकारी रोजाना प्रगति रिपोर्ट तैयार करेंगे और विभागीय स्तर पर उसकी समीक्षा होगी।

सरकार का मानना है कि नियमित निगरानी से कार्यों में तेजी आएगी और समय सीमा के भीतर सभी खराब चापाकालों को चालू किया जा सकेगा। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

किसान रजिस्ट्री की धीमी रफ्तार पर नाराजगी

बैठक में कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा के दौरान किसान रजिस्ट्री की प्रगति को लेकर चिंता व्यक्त की गई। मुख्य सचिव ने पाया कि निर्धारित लक्ष्य की तुलना में पंजीकरण की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।

राज्य में किसान रजिस्ट्री के लिए कुल 86.36 लाख किसानों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि अब तक लगभग 51.58 लाख किसानों का ही पंजीकरण हो पाया है। यह कुल लक्ष्य का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा है।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित आवेदनों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए। उन्होंने कहा कि अंचल स्तर से लेकर जिला स्तर तक सभी अधिकारी प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि पात्र किसानों का पंजीकरण समय पर पूरा हो।

पिछड़े जिलों को विशेष निर्देश

समीक्षा के दौरान कुछ जिलों में किसान रजिस्ट्री की प्रगति बेहद धीमी पाई गई। इस पर मुख्य सचिव ने संबंधित जिलाधिकारियों को विशेष रूप से सतर्क किया।

सारण, जमुई, सीवान और पूर्वी चंपारण जैसे जिलों में लक्ष्य की तुलना में कम उपलब्धि दर्ज होने पर अधिकारियों को कार्यशैली में सुधार लाने और अभियान को तेज करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि इन जिलों में विशेष शिविर आयोजित कर अधिक से अधिक किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।

इसके अलावा अररिया जिले में लंबित आवेदनों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाए जाने पर वहां विशेष समीक्षा अभियान चलाने को कहा गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लंबित मामलों के कारणों की पहचान कर उनका शीघ्र समाधान किया जाए।

पीएम-किसान योजना के लाभार्थियों पर भी फोकस

बैठक में पीएम-किसान योजना से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि किसान रजिस्ट्री और पीएम-किसान जैसी योजनाएं सीधे किसानों के हितों से जुड़ी हैं। इसलिए पात्र किसानों को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा का सामना नहीं करना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिले, इसके लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।

भारत-नेपाल सीमा पर चौकसी बढ़ाने का निर्देश

बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने भारत-नेपाल सीमा से सटे जिलों के जिलाधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े क्षेत्रों में प्रशासनिक निगरानी मजबूत रहनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा संबंधी चुनौती से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखा जाए।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि सीमा क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण और निगरानी अभियान चलाए जाएं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को समय रहते रोका जा सके।

ज्ञान भारतम सर्वेक्षण को लेकर भी सख्ती

राज्य में चल रहे ज्ञान भारतम सर्वेक्षण की प्रगति की भी बैठक में समीक्षा की गई। अधिकारियों को बताया गया कि इस सर्वेक्षण की अंतिम तिथि 15 जून 2026 निर्धारित है और अब लक्ष्य पूरा करने के लिए बहुत कम समय बचा है।

मुख्य सचिव ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि वे शेष अवधि में विशेष अभियान चलाकर अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि बिहार के प्रत्येक जिले का योगदान इस सर्वेक्षण में महत्वपूर्ण है और सभी अधिकारियों को इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहिए।

इसके लिए जिलों को अलग-अलग कार्ययोजनाएं तैयार करने और नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रगति बढ़ाने की सलाह दी गई।

लापरवाही बर्दाश्त नहीं, परिणाम चाहिए

बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार की प्राथमिकता जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि पेयजल, किसान कल्याण और प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल कागजी प्रगति दिखाने के बजाय धरातल पर परिणाम दिखाई देने चाहिए। निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा करना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।

सरकार के इस सख्त रुख के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में चापाकाल मरम्मत, किसान रजिस्ट्री और अन्य प्राथमिक योजनाओं को लेकर जिलों में प्रशासनिक गतिविधियां और तेज होंगी, जिससे आम लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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