
बिहार सरकार ने किसान रजिस्ट्री और एग्री स्टैक अभियान को लेकर अपनी तैयारी और तेज कर दी है। राज्य में पीएम-किसान योजना से जुड़े किसानों के डिजिटल सत्यापन और डेटा एकीकरण को लेकर सोमवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि 27 मई तक राज्य में किसान रजिस्ट्री के नए पंजीकरण का आंकड़ा 2 लाख से 2.5 लाख के बीच पहुंचना चाहिए।
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बिहार सरकार इस अभियान को मिशन मोड में चला रही है। सरकार का उद्देश्य राज्य के सभी पात्र किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है ताकि भविष्य में उन्हें योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और तेज तरीके से मिल सके।
बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि किसान रजिस्ट्री राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और तय समय सीमा के भीतर लक्ष्य हासिल करना अनिवार्य होगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि किसान रजिस्ट्री सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे किसानों की पहचान, भूमि रिकॉर्ड, सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं को एकीकृत करने में मदद मिलेगी।
समीक्षा बैठक के दौरान कुछ जिलों के खराब प्रदर्शन पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताई। विशेष रूप से जमुई, सारण और सीवान जिलों की धीमी प्रगति पर सवाल उठाए गए। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपनी कार्यप्रणाली में तुरंत सुधार करें और अभियान को तेजी से आगे बढ़ाएं।
उन्होंने कहा कि जिन जिलों में प्रगति धीमी है वहां जिला प्रशासन को अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। पंचायत स्तर तक निगरानी बढ़ाने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में एग्री स्टैक परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। एग्री स्टैक को कृषि क्षेत्र का डिजिटल ढांचा माना जा रहा है, जिसके तहत किसानों का एकीकृत डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इसमें भूमि रिकॉर्ड, फसल संबंधी जानकारी और सरकारी योजनाओं का डेटा शामिल किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को निर्देश दिया कि लंबित मामलों का जल्द निपटारा किया जाए ताकि एग्री स्टैक का काम प्रभावित न हो। उन्होंने शेष 11,400 से अधिक गांवों के जियो-रेफरेंसिंग विलेज मैप्स और रिविजनल सर्वे मैप्स से जुड़े कार्यों में तेजी लाने को कहा।
अधिकारियों का कहना है कि इन डिजिटल मैप्स के जरिए भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन आसान होगा और किसानों की जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जा सकेगा। इससे भविष्य में भूमि विवाद और योजना लाभ में होने वाली गड़बड़ियों को भी कम किया जा सकेगा।
बैठक में यह भी बताया गया कि वर्तमान में कम एनएमएस यानी लो नेटवर्क मैनेजमेंट सिस्टम के कारण बड़ी संख्या में किसान रजिस्ट्री नामांकन लंबित पड़े हैं। राज्य में कुल 7 लाख 88 हजार 116 किसान रजिस्ट्री नामांकन अभी सत्यापन की प्रक्रिया में हैं।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि इन सभी लंबित मामलों का जल्द से जल्द डिजिटल और भौतिक सत्यापन पूरा किया जाए ताकि पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। उन्होंने कहा कि तकनीकी कारणों से किसानों को परेशान नहीं होना चाहिए और प्रशासन को हर स्तर पर सहयोगात्मक रवैया अपनाना होगा।
बिहार में किसान रजिस्ट्री अभियान की मौजूदा स्थिति पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों के अनुसार राज्य में पीएम-किसान योजना के कुल 86.36 लाख लाभार्थियों में से अब तक 49.7 लाख किसानों का रजिस्ट्रेशन पूरा किया जा चुका है। यह कुल लक्ष्य का करीब 57.6 प्रतिशत है।
सरकार का कहना है कि 12 मई 2026 से मिशन मोड में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत अब तक लगभग 1 लाख 96 हजार 929 नए पंजीकरण किए जा चुके हैं। यह राज्य के औसत प्रदर्शन का लगभग 2.3 प्रतिशत है।
प्रदर्शन के मामले में गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण और पूर्वी चंपारण जिलों को सबसे बेहतर बताया गया। गोपालगंज में 8,411 किसान रजिस्ट्रेशन, पश्चिमी चंपारण में 7,461 और पूर्वी चंपारण में 6,539 नए पंजीकरण किए गए हैं।
वहीं दूसरी ओर जमुई, नवादा और भोजपुर जैसे जिलों की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी पाई गई। जमुई में सिर्फ 1,339, नवादा में 1,937 और भोजपुर में 2,244 नए किसान पंजीकरण दर्ज किए गए हैं। मुख्य सचिव ने इन जिलों को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसान रजिस्ट्री और एग्री स्टैक परियोजना भविष्य में कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। यदि किसानों का सटीक और डिजिटल डेटा तैयार हो जाता है तो सरकार योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचा सकेगी। इससे फर्जीवाड़े और डुप्लीकेट लाभार्थियों की समस्या भी कम होगी।
कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से किसानों को ऋण, बीमा, फसल सहायता और सब्सिडी जैसी सेवाओं का लाभ जल्दी मिलेगा। साथ ही सरकार को भी कृषि नीति बनाने में सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बैठक के अंत में स्पष्ट कहा कि अभियान को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों और जिला प्रशासन को मिशन मोड में काम करने और आपसी समन्वय के साथ निर्धारित लक्ष्य हासिल करने का निर्देश दिया।
फिलहाल बिहार सरकार की यह पहल कृषि क्षेत्र को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यदि अभियान तय लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ता है तो लाखों किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।


