थावे मंदिर विकास कार्य में भारी लापरवाही पर सख्त हुए मुख्य सचिव, अभियंताओं पर कार्रवाई और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी

बिहार के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल थावे दुर्गा मंदिर परिसर के विकास कार्य में हो रही देरी को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। गोपालगंज स्थित इस महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन परियोजना की धीमी प्रगति पर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने गहरी नाराजगी जताते हुए कई कड़े प्रशासनिक निर्देश जारी किए हैं। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने साफ कहा कि आस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार राज्य योजना के तहत थावे मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और पर्यटन विकास का कार्य चल रहा है। सरकार का उद्देश्य इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करना है। लेकिन समीक्षा के दौरान पाया गया कि प्रशासनिक स्वीकृति की समय-सीमा बीतने के बावजूद निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है।

मुख्य सचिव ने बैठक में अधिकारियों से परियोजना की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली। रिपोर्ट सामने आने के बाद उन्होंने परियोजना की मॉनिटरिंग में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और संवेदक पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि समय पर काम पूरा नहीं हुआ तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में सबसे बड़ा फैसला उन अभियंताओं के खिलाफ लिया गया जो परियोजना की निगरानी में विफल पाए गए। मुख्य सचिव ने संबंधित कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता की सेवाएं तत्काल प्रभाव से उनके मूल विभाग को वापस करने का निर्देश दिया। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना की धीमी प्रगति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

मुख्य सचिव ने निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार को भी अंतिम चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर काम की गति नहीं बढ़ाई गई और पर्याप्त मैनपावर नहीं लगाया गया तो संवेदक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने साफ कहा कि जरूरत पड़ने पर करारनामा रद्द कर संवेदक को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।

सरकार ने परियोजना को लेकर नई समय सीमा भी तय कर दी है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि मंदिर परिसर से जुड़े सभी लंबित निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्य अगले तीन महीनों के भीतर हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। इसके लिए पर्यटन विभाग और निर्माण एजेंसियों को नियमित निगरानी करने को कहा गया है।

बैठक में परियोजना की भौतिक प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। अधिकारियों के अनुसार पूरे प्रोजेक्ट के लिए कुल 2,897 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इनमें से 2,416.59 लाख रुपये की राशि का इकरारनामा किया जा चुका है।

मंदिर परिसर में स्थानीय दुकानदारों के लिए कुल 200 दुकानों के निर्माण की योजना बनाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 113 दुकानों का निर्माण पूरी तरह पूरा हो चुका है, जबकि 28 दुकानों का काम लगभग 65 प्रतिशत तक पहुंचा है।

तालाब विकास और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों की स्थिति भी समीक्षा के दौरान सामने रखी गई। अधिकारियों ने बताया कि तालाब विकास का कार्य लगभग 50 प्रतिशत पूरा हुआ है। वर्तमान में वहां फाउंटेन, रिटेनिंग वॉल और स्टेप सिटिंग में ग्रेनाइट लगाने का काम चल रहा है। वहीं सार्वजनिक सुविधाओं का कार्य करीब 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है।

हालांकि कई महत्वपूर्ण हिस्सों में काम बेहद धीमी गति से चलने पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताई। चिल्ड्रेन पार्क का निर्माण केवल 50 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है। इसके अलावा पैदल पार पथ का काम मात्र 20 प्रतिशत और लेजर लाइट एवं साउंड शो का काम केवल 15 प्रतिशत पूरा हुआ है।

सबसे अधिक नाराजगी बाह्य विद्युतीकरण के कार्य को लेकर जताई गई। समीक्षा में सामने आया कि इस हिस्से में अब तक कोई काम शुरू ही नहीं हुआ है और इसकी प्रगति शून्य प्रतिशत है। मुख्य सचिव ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए तत्काल काम शुरू करने का आदेश दिया।

थावे दुर्गा मंदिर बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। नवरात्र और अन्य पर्वों के दौरान लाखों भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में सरकार इस स्थल को आधुनिक पर्यटन और धार्मिक सुविधा केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना समय पर पूरी हो जाती है तो इससे गोपालगंज जिले में धार्मिक पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है। इससे स्थानीय व्यापार, रोजगार और छोटे कारोबारियों को भी फायदा होगा। मंदिर परिसर में दुकानों, पार्क, प्रकाश व्यवस्था और आधुनिक सुविधाओं के निर्माण से श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि थावे मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं बल्कि बिहार की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि परियोजना की गुणवत्ता और समय सीमा दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

उन्होंने पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्वयं नियमित रूप से कार्यों की निगरानी करें। इसके अलावा मुख्य सचिव ने यह भी संकेत दिया कि वह स्वयं जल्द ही स्थल का निरीक्षण करने जाएंगे ताकि जमीनी स्तर पर प्रगति का आकलन किया जा सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से इस परियोजना के पूरा होने का इंतजार किया जा रहा है। लोगों को उम्मीद है कि सरकार की सख्ती के बाद अब निर्माण कार्य में तेजी आएगी और थावे मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा सकेगा।

फिलहाल मुख्य सचिव की सख्त चेतावनी के बाद संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अगले तीन महीनों में परियोजना कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और क्या तय समय सीमा के भीतर काम पूरा हो पाता है।

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