
भागलपुर शहर में लगातार बदलते मौसम और आंधी-बारिश की बढ़ती आशंका को देखते हुए वन विभाग ने सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। शहर के विभिन्न इलाकों में ऐसे सूखे, झुके हुए और रोगग्रस्त पेड़ों की पहचान की जा रही है जो किसी भी समय गिरकर लोगों की जान-माल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी कड़ी में रविवार को वन प्रमंडल भागलपुर की टीम ने तिलकामांझी चौक से कचहरी चौक तक विशेष अभियान चलाकर कई खतरनाक पेड़ों और सूखी डालियों की कटाई एवं छंटाई का कार्य किया।
वन विभाग का कहना है कि शहर में लगातार बढ़ती आवाजाही और मानसून से पहले आने वाली तेज आंधियों को देखते हुए यह अभियान जरूरी हो गया था। कई स्थानों पर सड़क किनारे खड़े पुराने पेड़ अंदर से पूरी तरह खोखले और कमजोर हो चुके थे। इन पेड़ों की डालियां बिजली तारों और मुख्य मार्गों के ऊपर झुकी हुई थीं, जिससे किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता था। ऐसे पेड़ों को चिह्नित कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इस अभियान का नेतृत्व भागलपुर वन क्षेत्र पदाधिकारी कुमार गौतम ने किया। उनके नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने शहर के कई इलाकों का निरीक्षण किया और उन पेड़ों की सूची तैयार की जो लोगों के लिए खतरा बन चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि कई पेड़ों में दीमक और अन्य बीमारियों का असर पाया गया, जबकि कुछ पेड़ पूरी तरह सूख चुके थे। इनकी कमजोर शाखाएं तेज हवा में टूटकर गिर सकती थीं।
रविवार को चलाए गए अभियान के दौरान सड़क किनारे मौजूद कई बड़े पेड़ों की सूखी शाखाओं को काटा गया। वन विभाग की टीम ने मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से सावधानीपूर्वक छंटाई का काम किया ताकि यातायात बाधित न हो और आसपास के लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। अभियान के दौरान नगर निगम की ओर से भी सहयोग प्रदान किया गया। सफाई और ट्रैफिक नियंत्रण में नगर निगम कर्मियों की भूमिका अहम रही।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक दिन का अभियान नहीं है बल्कि आने वाले दिनों में शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। शहर के कई अन्य स्थानों को भी चिन्हित किया गया है, जहां जल्द ही पेड़ों की कटाई और छंटाई की जाएगी। खासकर स्कूल, अस्पताल, बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अभियान के दौरान वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि हर सूखा पेड़ पूरी तरह अनुपयोगी नहीं होता। विभाग के अनुसार कुछ पुराने और सूखे वृक्ष प्राकृतिक पारिस्थितिकी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे पेड़ों को “स्टैग ट्री” की श्रेणी में रखा जाता है। इन पेड़ों में कई प्रकार के पक्षी और छोटे जीव अपना बसेरा बनाते हैं। विशेष रूप से कठफोड़वा जैसे कीटभक्षी पक्षी सूखे पेड़ों में घोंसला बनाकर रहते हैं।
वन अधिकारियों ने बताया कि शहरीकरण और पेड़ों की लगातार कटाई के कारण इन पक्षियों की संख्या तेजी से कम हो रही है। इसलिए विभाग केवल उन्हीं पेड़ों को हटाने का काम कर रहा है जो लोगों के लिए सीधा खतरा बन चुके हैं। जिन सूखे पेड़ों से किसी प्रकार का जोखिम नहीं है, उन्हें संरक्षित रखने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे।
भागलपुर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई बार तेज आंधी और बारिश के कारण पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कई बार मुख्य सड़कों पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित हुआ, जबकि कुछ मामलों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार मानसून से पहले ही वन विभाग ने सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है।
वन विभाग ने शहरवासियों से भी सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और आंधी या तेज बारिश के दौरान पुराने एवं सूखे पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। खासकर मोटरसाइकिल और चारपहिया वाहन चालकों को सड़क किनारे खड़े कमजोर पेड़ों से दूरी बनाकर रखने की सलाह दी गई है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि किसी इलाके में लोगों को कोई पेड़ खतरनाक स्थिति में दिखाई देता है तो उसकी सूचना तुरंत वन विभाग या नगर निगम को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। विभाग की कोशिश है कि संभावित दुर्घटनाओं को पहले ही रोका जाए और शहर में सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।
रविवार को चलाए गए इस अभियान में वन विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। इसमें वन क्षेत्र पदाधिकारी कुमार गौतम, वन परिसर पदाधिकारी दिनेश कुमार सिंह, वनरक्षी अमरेश कुमार, नीरज कुमार, आदित्य अभिनव, आदित्य कुमार सिंह समेत कई वनकर्मी शामिल रहे। टीम ने पूरे अभियान के दौरान पेड़ों की स्थिति का निरीक्षण कर तकनीकी आधार पर निर्णय लिया कि किन शाखाओं और पेड़ों को हटाना जरूरी है।
शहरवासियों ने भी इस पहल की सराहना की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात और तेज हवा के मौसम में सड़क किनारे खड़े कमजोर पेड़ हमेशा डर का कारण बने रहते हैं। ऐसे में वन विभाग का यह अभियान राहत देने वाला कदम है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन समय रहते बाकी संवेदनशील इलाकों में भी कार्रवाई करेगा ताकि किसी प्रकार की बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।


