
भागलपुर स्थित ऐतिहासिक बाबा बूढ़ानाथ मंदिर परिसर में बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रख्यात समाजसेवी पद्मश्री किशोर कुणाल की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा श्रद्धालुओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने उनके जीवन, कार्यों और समाज के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने धार्मिक संस्थाओं के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसेवा के क्षेत्र में जो कार्य किए, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
श्रद्धांजलि सभा का आयोजन बाबा बूढ़ानाथ मंदिर परिसर में किया गया, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और मंदिर से जुड़े सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पद्मश्री किशोर कुणाल के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि के साथ हुई। इसके बाद उपस्थित लोगों ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए तथा उनके द्वारा समाज के लिए किए गए कार्यों को विस्तार से याद किया।
वक्ताओं ने कहा कि किशोर कुणाल केवल एक प्रशासनिक अधिकारी या धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष भर नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपनी दूरदर्शिता और संवेदनशील सोच के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास के साथ-साथ उन्होंने जनहित से जुड़े अनेक कार्यों को भी प्राथमिकता दी। यही कारण है कि आज भी लोग उन्हें सम्मान और आदर के साथ याद करते हैं।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि बिहार में धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन और विकास को नई दिशा देने में किशोर कुणाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके कार्यकाल में कई मंदिरों और धार्मिक स्थलों के विकास को गति मिली। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं को केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें सामाजिक सेवा और जनकल्याण से जोड़ने का भी प्रयास किया। इस सोच ने उन्हें आम लोगों के बीच विशेष पहचान दिलाई।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने उनके सामाजिक सरोकारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए किए गए उनके प्रयास हमेशा याद किए जाएंगे। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनकी सोच और पहल ने हजारों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की उनकी कार्यशैली आज भी कई लोगों के लिए प्रेरणादायक मानी जाती है।
बाबा बूढ़ानाथ मंदिर के प्रबंधक बाल्मीकि सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पद्मश्री किशोर कुणाल का जीवन सेवा, समर्पण और सकारात्मक सोच का प्रतीक था। उन्होंने हमेशा समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए कार्य किया। धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व विरले ही जन्म लेते हैं, जिनकी सोच और कार्य वर्षों तक लोगों को प्रेरित करते रहते हैं।
कार्यक्रम में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि किशोर कुणाल ने प्रशासनिक सेवा में रहते हुए ईमानदारी और पारदर्शिता का उदाहरण प्रस्तुत किया। बाद में धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय रहकर उन्होंने जनसेवा को अपना उद्देश्य बनाया। यही कारण है कि आज भी विभिन्न वर्गों के लोग उनके प्रति गहरा सम्मान रखते हैं।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उनके साथ जुड़े अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वे हमेशा लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते थे और उनके समाधान के लिए प्रयासरत रहते थे। उनकी विनम्रता, सरलता और सेवा भावना ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई।
सामाजिक कार्यकर्ता ठाकुर मोहित सिंह ने कहा कि किशोर कुणाल का जीवन इस बात का उदाहरण है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो व्यक्ति प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ समाज के लिए भी बड़ा योगदान दे सकता है। उन्होंने धार्मिक आस्था और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच एक संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया, जिसकी आज भी सराहना की जाती है।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि समाज को ऐसे महान व्यक्तित्वों के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। युवाओं को उनके जीवन संघर्ष, कार्यशैली और सेवा भाव के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए ताकि वे भी समाज और राष्ट्र के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सकें। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए कार्यों से होती है और इस दृष्टि से किशोर कुणाल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्रद्धांजलि सभा के अंत में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि उनके द्वारा दिखाए गए सेवा और जनकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह श्रद्धा और सम्मान से ओतप्रोत रहा। उपस्थित लोगों ने कहा कि पद्मश्री किशोर कुणाल भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके कार्य, विचार और समाज के प्रति उनका समर्पण हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।
इस अवसर पर मंदिर प्रबंधक बाल्मीकि सिंह, मनोरमा सिंह, रमन सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता ठाकुर मोहित सिंह, विशाल कुमार सहित कई गणमान्य लोग और श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि पद्मश्री किशोर कुणाल का जीवन समाजसेवा, धार्मिक चेतना और मानवीय मूल्यों का अद्भुत संगम था, जिसे आने वाली पीढ़ियां लंबे समय तक याद रखेंगी।


