NEET विवाद पर बिहार में बढ़ी राजनीतिक गर्मी, डिप्टी सीएम बोले- राहुल गांधी की हर बात को गंभीरता से लेना बंद करें

देशभर में NEET परीक्षा को लेकर मचे विवाद के बीच बिहार में भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को घेर रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार और उसके सहयोगी दल इस मामले में जांच और कार्रवाई का भरोसा दिला रहे हैं। इसी बीच बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी का बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उनके बयानों को गंभीरता से लेना बंद कर देना चाहिए।

पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार छात्रों के हितों को लेकर पूरी तरह गंभीर है और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर सरकार लगातार नजर बनाए हुए है और छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले विदेश दौरे पर हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को हल्के में ले रही है। उनके अनुसार सरकार की प्राथमिकता छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखना है और इसी कारण मामले की जांच तेज गति से आगे बढ़ रही है।

विजय कुमार चौधरी ने कहा कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी की खबर सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। जांच एजेंसियों को सक्रिय किया गया और कई स्तरों पर जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो दोबारा परीक्षा कराने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि किसी छात्र के साथ अन्याय न हो।

इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लगातार हमलों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को हर मुद्दे पर बयान देने की आदत हो गई है और अब उनके हर बयान को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। विजय चौधरी ने कहा कि हर बार राहुल गांधी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देने से उनकी राजनीतिक अहमियत बढ़ती है।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को छात्रों के भविष्य के मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय जांच प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए। उनके अनुसार सरकार किसी भी दोषी को बचाने के पक्ष में नहीं है और यदि कोई परीक्षा प्रणाली के साथ छेड़छाड़ में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

उधर बिहार सरकार के मंत्री संजय सरावगी ने भी NEET मामले पर केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA को संसदीय समिति के सामने बुलाया गया था और मामले की विस्तृत समीक्षा की जा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय समिति की कार्यवाही गोपनीय होती है और पूरी रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

संजय सरावगी ने कहा कि मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI को सौंप दी गई है। एजेंसी लगातार कार्रवाई कर रही है और अब तक कई लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

मंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल NEET परीक्षा को लेकर पिछले कुछ दिनों से देशभर में विवाद जारी है। कई राज्यों से परीक्षा में कथित धांधली, पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। इसके बाद विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार और NTA को घेर रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों के बीच भी परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है और परीक्षा प्रणाली में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है।

इन बयानों के बाद भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने कांग्रेस पर पलटवार शुरू कर दिया है। बिहार में भी यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। एक ओर विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है, तो दूसरी ओर सरकार जांच और कार्रवाई का हवाला देकर विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रही है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा होता है। यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो छात्रों का भरोसा प्रभावित होता है। इसी कारण सरकार और जांच एजेंसियों पर निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा है।

वहीं छात्रों और अभिभावकों के बीच भी इस पूरे मामले को लेकर चिंता बनी हुई है। कई छात्र दोबारा परीक्षा की संभावना को लेकर असमंजस में हैं, जबकि कुछ छात्र निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल पूरे देश की नजर CBI जांच और आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और संसदीय समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी कितनी बड़ी थी और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे।

बिहार में राजनीतिक बयानबाजी भले तेज हो गई हो, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही बना हुआ है कि लाखों छात्रों का भरोसा दोबारा कैसे कायम किया जाएगा। अब सरकार, जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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