
पटना, 21 मई 2026। बिहार में गन्ना खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर नई रणनीति तैयार की है। गन्ना उद्योग विभाग अब किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराने, आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और खेती की लागत कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को तेजी से लागू करने जा रहा है। गुरुवार को पटना में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसानों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और सभी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से खेतों तक पहुंचना चाहिए।
विभागीय कार्यालय में आयोजित इस बैठक में गन्ना विकास कार्यक्रमों, बीज उत्पादन, यंत्रीकरण, क्षेत्र विस्तार और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में विभागीय सचिव धर्मेंद्र सिंह ने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी मंत्री को दी। समीक्षा के बाद मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसानों को प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण गन्ना बीज समय पर उपलब्ध कराना विभाग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
मंत्री संजय कुमार ने कहा कि यदि किसानों को बेहतर गुणवत्ता का बीज मिलेगा तो उत्पादन क्षमता स्वतः बढ़ेगी और किसानों की आमदनी में सुधार होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ब्रीडर सीड और प्रमाणित गन्ना बीज तैयार करने वाली संस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए। साथ ही समयबद्ध ऑडिट और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को सख्ती से लागू करने को कहा गया ताकि किसानों तक केवल भरोसेमंद और वैज्ञानिक तरीके से तैयार बीज ही पहुंचे।
बैठक में गन्ना उद्योग मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग की योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी या बिचौलियों के हस्तक्षेप का सामना नहीं करना चाहिए। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि योजनाओं की निगरानी जमीनी स्तर तक की जाए और लाभुक किसानों से लगातार संपर्क बनाए रखा जाए।
बैठक में गुड़ प्रोत्साहन योजना को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना के तहत प्राप्त आवेदनों का जल्द निष्पादन किया जाए और पात्र किसान-उद्यमियों को शीघ्र लाइसेंस उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। गुड़ उत्पादन और उससे जुड़े छोटे उद्योग किसानों की अतिरिक्त आय का बड़ा माध्यम बन सकते हैं।
मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में केन केयर पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करें ताकि सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल पाएगा।
गन्ना खेती को आधुनिक बनाने के लिए विभाग अब “गन्ना रथ अभियान” भी शुरू करने जा रहा है। इस अभियान के तहत गांव-गांव जाकर किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, वैज्ञानिक पद्धतियों और उत्पादन बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी जाएगी। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए।
विशेष रूप से उन पंचायतों पर फोकस किया जाएगा जहां नई चीनी मिलों की स्थापना प्रस्तावित है। विभाग का मानना है कि यदि किसानों को समय पर जानकारी और तकनीकी सहायता मिलेगी तो वे गन्ना उत्पादन को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्योग दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
मंत्री संजय कुमार ने कहा कि वे स्वयं गन्ना उत्पादक क्षेत्रों का दौरा करेंगे और किसानों से सीधे संवाद कर जमीनी स्थिति का आकलन करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि गन्ना खेती केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहे, बल्कि इसे आधुनिक और लाभकारी कृषि मॉडल के रूप में विकसित किया जाए।
बैठक में गन्ना यंत्रीकरण योजना को लेकर भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि यंत्रों की पहुंच सुनिश्चित की जाए। इसके लिए कस्टम हायरिंग सेंटर और कृषि उद्यमी यंत्र बैंक की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
विभाग के अनुसार गन्ना यंत्रीकरण योजना के तहत किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर 50 से 70 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। वहीं कस्टम हायरिंग सेंटर के जरिए किसानों को रियायती दरों पर आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
गन्ना उद्योग विभाग ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में कई नई पहल भी शुरू की हैं। विभाग ने भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ और एसआरआई पूसा के साथ मिलकर उन्नत गन्ना बीज उत्पादन की प्रक्रिया शुरू की है। इसका उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराना और उत्पादन बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री गन्ना विकास योजना में भी इस वर्ष कई बदलाव किए गए हैं। विभाग अब चीनी और गैर-चीनी मिल क्षेत्रों में गन्ना फसल क्षेत्र विस्तार योजना लागू कर रहा है। इसके तहत किसानों को बीज उपलब्ध कराने पर 470 रुपये प्रति क्विंटल की सहायता राशि दी जाएगी। साथ ही गन्ना बीज परिवहन के लिए भी अनुदान का प्रावधान किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में गन्ना खेती की बड़ी संभावनाएं हैं। यदि किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज और समय पर सरकारी सहायता मिले तो राज्य में चीनी उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को नई मजबूती मिल सकती है। बिहार के कई जिलों में गन्ना खेती पहले से ही प्रमुख फसलों में शामिल है और अब सरकार इसे और व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है।
बैठक में संयुक्त ईखायुक्त वेदव्रत कुमार सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं की प्रगति और आगामी कार्ययोजना पर भी प्रस्तुति दी। विभाग का दावा है कि आने वाले समय में गन्ना खेती को आधुनिक तकनीक और सरकारी सहयोग के जरिए नई दिशा दी जाएगी, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को गति मिलेगी।


