श्रावणी मेला 2026 के लिए बिजली विभाग अलर्ट, कांवरिया पथ पर बनेगा विशेष पावर नेटवर्क

पटना, 21 मई 2026। बिहार में आगामी श्रावणी मेला 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। लाखों कांवरियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा तथा सुविधा को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा विभाग ने इस बार बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत और आधुनिक बनाने का फैसला लिया है। गुरुवार को विद्युत भवन, पटना में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में श्रावणी मेले के दौरान निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में विशेष रूप से सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले कांवरिया पथ की बिजली व्यवस्था को लेकर व्यापक रणनीति तैयार की गई।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता ऊर्जा सचिव सह बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अजय यादव ने की। बैठक में साउथ बिहार और नॉर्थ बिहार डिस्कॉम के वरिष्ठ अधिकारी, भागलपुर, बांका, मुंगेर और सुल्तानगंज विद्युत आपूर्ति प्रमंडल के अधिकारी तथा संबंधित प्रशासनिक इकाइयों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक में ऊर्जा सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि श्रावणी मेले से जुड़े सभी विद्युत मेंटेनेंस कार्य 30 जून 2026 तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए बिजली व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। इस बार विभाग का लक्ष्य केवल बिजली आपूर्ति बनाए रखना नहीं बल्कि सुरक्षित और त्वरित सेवा व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है।

ऊर्जा विभाग ने बांका जिले में कांवरिया पथ पर बिजली आपूर्ति को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त चार 11 केवी डेडीकेटेड फीडर लगाने का निर्णय लिया है। इन फीडरों में कवर्ड कंडक्टर यानी सुरक्षित तारों का उपयोग किया जाएगा ताकि खुले तारों से दुर्घटना की संभावना कम हो सके। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना के तहत लगभग 1738 नए बिजली पोल लगाए जाएंगे।

बैठक में यह भी तय किया गया कि कांवरिया पथ पर मौजूद 11 केवी की ओवरहेड लाइनों को धीरे-धीरे कवर्ड वायर सिस्टम में बदला जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। श्रावणी मेले के दौरान लाखों लोग पैदल यात्रा करते हैं और भारी भीड़ के कारण बिजली दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे में सुरक्षित बिजली ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है।

ऊर्जा सचिव अजय यादव ने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि श्रावणी मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग पूरी तैयारी के साथ काम कर रहा है ताकि कांवरियों को स्थिर और भरोसेमंद बिजली सेवा मिल सके। इसके लिए विभागीय अधिकारी और कर्मचारी लगातार निगरानी और रखरखाव का कार्य करेंगे।

बैठक में मेला क्षेत्र के बेहतर संचालन के लिए सुल्तानगंज, बांका, भागलपुर और मुंगेर को मिलाकर कुल 16 जोन बनाने का निर्णय लिया गया। इन जोनों में अलग-अलग टीमों की तैनाती की जाएगी, जो बिजली आपूर्ति और तकनीकी समस्याओं पर लगातार नजर रखेंगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई करना संभव होगा।

समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए बांका, भागलपुर और मुंगेर में तीन मुख्य कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। ये कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रहेंगे और बिजली आपूर्ति से जुड़ी किसी भी समस्या पर तुरंत कार्रवाई करेंगे। विभाग का कहना है कि इन कंट्रोल रूम के जरिए जिलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा ताकि किसी भी खराबी को कम समय में ठीक किया जा सके।

बैठक में मोबाइल यूनिट, क्विक रिस्पॉन्स टीम, ट्रॉली माउंटेड ट्रांसफॉर्मर और अतिरिक्त मानवबल की व्यवस्था पर भी विशेष चर्चा हुई। विभाग ने फैसला लिया कि मेला क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में तकनीकी टीमें तैनात की जाएंगी ताकि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में तुरंत मरम्मत कार्य शुरू किया जा सके।

अधिकारियों के अनुसार 33 केवी, 11 केवी और एलटी लाइन के रखरखाव तथा ट्रांसफॉर्मरों के संधारण का कार्य भी 30 जून तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि मेला शुरू होने से पहले पूरी बिजली व्यवस्था तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार हो।

श्रावणी मेला बिहार और झारखंड के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर पैदल देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम तक यात्रा करते हैं। इस दौरान कांवरिया पथ पर भारी भीड़ रहती है और प्रशासन के सामने सुरक्षा तथा बुनियादी सुविधाओं को बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली व्यवस्था श्रावणी मेले के दौरान सबसे महत्वपूर्ण सेवाओं में से एक होती है। रोशनी, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा निगरानी, कंट्रोल रूम, जलापूर्ति और शिविर संचालन जैसी कई व्यवस्थाएं बिजली पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में मजबूत विद्युत व्यवस्था पूरे मेले के संचालन के लिए बेहद जरूरी है।

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस बार तकनीकी निगरानी को और मजबूत किया जाएगा। संवेदनशील स्थानों पर विशेष टीमों की तैनाती होगी और हर जोन में तकनीकी कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा। इसके अलावा बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार रखी जाएगी।

बैठक में यह भी कहा गया कि विभागीय अधिकारी जिला प्रशासन के साथ लगातार समन्वय बनाकर काम करेंगे। मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर और आपूर्ति लाइनें भी तैयार रखी जाएंगी। बिजली विभाग का लक्ष्य है कि पूरे मेले के दौरान बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

ऊर्जा सचिव अजय यादव ने अंत में कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी कार्य समयसीमा के भीतर पूरे हों और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। विभाग का दावा है कि इस बार श्रावणी मेले में बिजली व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत, सुरक्षित और तकनीकी रूप से बेहतर होगी।

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