
भागलपुर, 20 मई 2026। भागलपुर जिले में जनजातीय समुदायों तक सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। “जनजातीय गरिमा उत्सव 2026” के अंतर्गत शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य दूरस्थ और जनजातीय बाहुल्य गांवों में रहने वाले लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना और उनकी समस्याओं को सीधे समझकर समाधान की दिशा में काम करना है। “सबसे दूर, सबसे पहले” थीम पर आधारित यह अभियान अब जमीनी स्तर पर व्यापक रूप से चलाया जा रहा है।
जिला प्रशासन के अनुसार इस विशेष जनभागीदारी अभियान की शुरुआत 18 मई 2026 को जिला पदाधिकारी भागलपुर द्वारा की गई थी। इसके बाद लगातार विभिन्न प्रखंडों और गांवों में प्रशासनिक टीमों द्वारा भ्रमण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचे।
अभियान के तहत बुधवार को भागलपुर जिले के तीन प्रखंडों के 62 जनजातीय बाहुल्य गांवों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। इस दौरान प्रखंड स्तरीय अधिकारियों, कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनजातीय समुदाय के गणमान्य लोगों ने गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद किया।
प्रशासनिक टीमों ने घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों को सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों ने लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, पेंशन, राशन, छात्रवृत्ति और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ के बारे में विस्तार से समझाया। साथ ही लोगों को यह भी बताया गया कि वे योजनाओं का लाभ लेने के लिए कहां संपर्क करें और आवश्यक दस्तावेज क्या होंगे।
अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं है, बल्कि ग्रामीणों की वास्तविक समस्याओं को समझना भी है। इसी कारण टीमों ने लोगों से व्यक्तिगत बातचीत कर उनकी समस्याओं को नोट किया। कई ग्रामीणों ने राशन कार्ड, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं, सड़क, पेयजल और शिक्षा से जुड़ी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं।
जिला प्रशासन की ओर से कहा गया कि इन समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी संभव है जब जरूरतमंद लोगों तक उनका लाभ सही समय पर पहुंचे।
अभियान के दौरान ग्रामीणों को ग्राम स्थित आदि सेवा केंद्रों के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने लोगों को बताया कि जन सुनवाई कार्यक्रम के दौरान वे अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के समक्ष रख सकते हैं। इसके लिए ग्रामीणों को निर्धारित तिथियों की जानकारी दी गई और उन्हें अधिक संख्या में जन सुनवाई में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।
जनजातीय समुदाय के गणमान्य लोगों ने भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने अपने गांवों के लोगों को सरकारी योजनाओं से जुड़ने और प्रशासन के साथ संवाद करने के लिए प्रोत्साहित किया। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से अभियान को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में कई बार योजनाओं की जानकारी लोगों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाती। भाषा, भौगोलिक दूरी और संसाधनों की कमी के कारण कई परिवार सरकारी लाभ से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में घर-घर जाकर संवाद आधारित अभियान काफी प्रभावी साबित हो सकते हैं।
अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया। ग्रामीणों को टीकाकरण, मातृ स्वास्थ्य, पोषण, सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली सुविधाओं और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। कई जगहों पर स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को भी नोट किया गया।
शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों ने ग्रामीणों को बच्चों की नियमित पढ़ाई, छात्रवृत्ति योजनाओं और स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में बताया। विशेष रूप से जनजातीय बच्चों की शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने अभिभावकों से बच्चों को स्कूल भेजने की अपील की।
समाज कल्याण विभाग की योजनाओं के तहत वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग सहायता और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। कई लोगों ने इन योजनाओं से जुड़ी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं, जिन्हें नोट कर आगे कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
इस अभियान की एक खास पहल पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी देखने को मिली। गांवों और टोलों में जागरूकता अभियान के साथ-साथ वृक्षारोपण कार्यक्रम भी चलाया गया। अधिकारियों और ग्रामीणों ने मिलकर पौधे लगाए और लोगों से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की।
विशेषज्ञों का कहना है कि जनभागीदारी आधारित ऐसे अभियान प्रशासन और आम लोगों के बीच विश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब अधिकारी सीधे गांवों में जाकर लोगों से संवाद करते हैं, तो समस्याओं की वास्तविक स्थिति सामने आती है और समाधान की प्रक्रिया भी तेज होती है।
जिला प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा। अन्य जनजातीय बहुल क्षेत्रों में भी इसी तरह घर-घर जाकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रशासन की कोशिश है कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं से वंचित न रह जाए।
अधिकारियों का मानना है कि जनजातीय क्षेत्रों का विकास केवल योजनाएं बनाकर संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जमीनी स्तर पर संवाद और सक्रिय भागीदारी जरूरी है। यही कारण है कि इस अभियान में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थानीय समुदाय को भी जोड़ा गया है।
फिलहाल भागलपुर में चल रहा यह अभियान जनजातीय समुदायों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। जिला प्रशासन को उम्मीद है कि इस अभियान के माध्यम से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सकेगा।


