
पटना, 20 मई 2026। बिहार सरकार ने राज्य में स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 9347 लाभुकों का चयन किया है। इस चयन प्रक्रिया को पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड रैंडमाइजेशन प्रणाली के माध्यम से संपन्न कराया गया, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। चयनित लाभुकों को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर उद्यमी बनाने की तैयारी की जा रही है।
इस संबंध में आयोजित कार्यक्रम में बिहार सरकार की उद्योग एवं खेल मंत्री ने चयनित लाभुकों की घोषणा की। सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री उद्यमी योजना राज्य के युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।
सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध 74 परियोजनाओं के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे। जिलावार निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कंप्यूटर आधारित रैंडमाइजेशन प्रक्रिया के जरिए नए लाभुकों का औपबंधिक चयन किया गया। अधिकारियों ने बताया कि पूरी प्रक्रिया को तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
चयनित लाभुकों में विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। औपबंधिक रूप से चयनित 9347 लाभुकों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के 2000, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के 2000, महिला वर्ग के 2000, युवा वर्ग के 2000, अल्पसंख्यक वर्ग के 1247 और दिव्यांगजन वर्ग के 100 लाभुक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कोटिवार और जिलावार 30 प्रतिशत आवेदनों को प्रतीक्षा सूची में भी रखा जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार चयनित आवेदनों की स्क्रूटनी और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद अंतिम चयन सूची उद्यमी पोर्टल पर प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में उद्यमिता प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक संचालित कर सकें।
सरकार ने जानकारी दी कि अंतिम रूप से चयनित लाभुकों को योजना की गाइडलाइन के अनुसार तीन किस्तों में लगभग 910.25 करोड़ रुपये की परियोजना राशि उपलब्ध कराई जाएगी। यह राशि नए उद्योग और व्यवसाय स्थापित करने के लिए दी जाएगी, जिससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना को बिहार सरकार की प्रमुख स्वरोजगार योजनाओं में माना जाता है। इसका उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को नौकरी तलाशने के बजाय खुद उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित करना है। सरकार का मानना है कि छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों को बढ़ावा देकर राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री ने कहा कि यह योजना अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने से सामाजिक और आर्थिक बदलाव तेजी से संभव होंगे। सरकार चाहती है कि वंचित समुदाय के युवा भी उद्योग और व्यवसाय के क्षेत्र में आगे बढ़ें और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करें।
उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्यमी योजना केवल आर्थिक सहायता देने की योजना नहीं है, बल्कि यह युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का व्यापक अभियान है। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शी चयन प्रक्रिया के जरिए योग्य अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध करा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में उद्यमिता संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि अधिक से अधिक युवा खुद का व्यवसाय शुरू करें और दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करें।
उद्योग विभाग के सचिव एवं के प्रबंध निदेशक ने कहा कि विभाग द्वारा चयन प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक आधारित और जवाबदेह बनाया गया है। उन्होंने कहा कि चयनित लाभुकों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वे सफल उद्यमी बन सकें।
उन्होंने बताया कि चयनित लाभुकों को व्यवसाय प्रबंधन, विपणन, वित्तीय प्रबंधन और उत्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा बैंकिंग और सरकारी प्रक्रियाओं में भी सहायता प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आवेदन प्रक्रिया 15 फरवरी 2026 से शुरू हुई थी और 23 मार्च 2026 तक ऑनलाइन आवेदन प्राप्त किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार इस बार बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं ने आवेदन किया, जिससे योजना के प्रति बढ़ती रुचि का संकेत मिलता है।
कार्यक्रम में MSME निदेशालय के निदेशक , हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय के निदेशक और उद्योग निदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे राज्य में स्वरोजगार आधारित योजनाएं आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। राज्य में बड़ी युवा आबादी है और हर वर्ष लाखों युवाओं को रोजगार की आवश्यकता होती है। ऐसे में उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाएं रोजगार सृजन में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि चयनित लाभुकों को समय पर प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता मिलती है, तो इससे राज्य में छोटे उद्योगों और स्थानीय कारोबार को मजबूती मिलेगी। साथ ही ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
फिलहाल मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत हुए इस चयन को राज्य सरकार की बड़ी पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में यह योजना बिहार में स्वरोजगार और उद्यमिता संस्कृति को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


