जमुई के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के 4 ठिकानों पर ईओयू की बड़ी कार्रवाई: आय से 81.5 फीसदी अधिक संपत्ति का मामला दर्ज, पटना से जमुई तक हड़कंप

पटना/जमुई, 16 मई 2026। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत प्रशासनिक महकमे में एक बार फिर बहुत बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। राज्य की विशेष जांच एजेंसी आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने शनिवार की अहसुबह अकूत संपत्ति अर्जित करने वाले एक बड़े सरकारी अधिकारी के खिलाफ विधिक मोर्चा खोल दिया। जमुई जिले में पदस्थापित ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) गोपाल कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का एक नियमित मामला दर्ज होने के बाद एजेंसी की विशेष टीमों ने उनके चार अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। न्यायालय से विधिक सर्च वारंट प्राप्त करने के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक अमले और विशेषकर इंजीनियरिंग विंग के भीतर भारी हड़कंप मच गया है। तड़के सुबह जब लोग सोकर उठे ही थे, तब ईओयू के अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस बल के सहयोग से इंजीनियर के पटना और जमुई स्थित ठिकानों पर दस्तक दी, जिसके बाद अवैध रूप से अर्जित की गई चल-अचल संपत्ति के कई विधिक साक्ष्य सामने आने लगे हैं।

सुबह-सुबह चार ठिकानों पर एक साथ शुरू हुई ईओयू की विधिक कार्रवाई

​आर्थिक अपराध इकाई के मुख्यालय से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार की संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों और पद का दुरुपयोग कर अवैध धन कमाने की लगातार गोपनीय शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों के आधार पर एजेंसी के तकनीकी और खुफिया विंग ने पिछले कई महीनों से उनके निवेश पैटर्न, बैंक खातों के लेन-देन और अचल संपत्तियों की खरीद-बिक्री की विधिक निगरानी शुरू कर रखी थी। आंतरिक जांच और गोपनीय भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आर्थिक अपराध इकाई थाना में उनके विरुद्ध प्रिवेन्शन ऑफ करप्शन एक्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की सुसंगत और कड़ी धाराओं के तहत एक नियमित प्राथमिकी दर्ज की गई।

​प्राथमिकी दर्ज होने के तुरंत बाद जांच अधिकारी ने पटना स्थित विशेष निगरानी अदालत के समक्ष छापेमारी के लिए विधिक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय से सर्च वारंट जारी होते ही ईओयू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के नेतृत्व में चार अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया गया। शनिवार की सुबह करीब 6:00 बजे इन चारों टीमों ने पटना के दो पॉश रिहायशी इलाकों, जमुई शहर में स्थित उनके किराए के आवास और झाझा स्थित उनके आधिकारिक कार्यालय परिसर में एक साथ प्रवेश किया। अचानक हुई इस विधिक दबिश के कारण आरोपी अधिकारी और उनके परिजनों को संभलने या किसी भी प्रकार के वित्तीय दस्तावेजों को छिपाने का कोई अवसर नहीं मिल सका।

आय के वैध स्रोतों से 81.5 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का विधिक प्रमाण

​इस पूरी मर्डर मिस्ट्री की तरह उलझी वित्तीय अनियमितता के आंकड़ों को देखें तो ईओयू के प्राथमिक सत्यापन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सरकारी सेवा में रहते हुए गोपाल कुमार को मिले कुल वेतन और अन्य वैध वित्तीय भत्तों की तुलना जब उनके द्वारा किए गए निवेश और संपत्तियों से की गई, तो भारी अंतर देखने को मिला। विधिक जांच के शुरुआती दौर में ही यह प्रमाणित हो गया कि कार्यपालक अभियंता ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर अवैध कमीशनखोरी और सरकारी धन का विचलन कर अकूत संपत्ति बनाई है।

​एजेंसी द्वारा जारी विधिक विवरण के अनुसार, शुरुआती जांच में कार्यपालक अभियंता के पास से प्रथम दृष्टया 2 करोड़ 61 हजार रुपये (2,00,61,000) मूल्य की ऐसी संपत्ति पाई गई है, जिसका उनके पास कोई वैध या विधिक आय का स्रोत नहीं है। यह अवैध संपत्ति उनकी वास्तविक और वैध स्रोतों से होने वाली कुल शुद्ध आय की तुलना में 81.5 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि छापेमारी के दौरान मिल रहे नए दस्तावेजों, गुप्त बैंक खातों, विभिन्न कंपनियों में किए गए शेयर निवेश और बेनामी संपत्तियों के विलेखों की जांच के बाद आय से अधिक संपत्ति का यह आंकड़ा और प्रतिशत कई गुना अधिक बढ़ सकता है।

पटना के पॉश इलाकों से लेकर जमुई-झाझा तक फैला है नेटवर्क

​आर्थिक अपराध इकाई की टीमों ने जिन चार ठिकानों को अपनी विधिक जांच और जब्ती सूची के दायरे में शामिल किया है, उनका भौगोलिक और व्यावसायिक फैलाव काफी बड़ा है। इसमें पटना के सबसे महंगे और संभ्रांत रिहायशी इलाके शामिल हैं, जहाँ जमीन और फ्लैट्स की कीमतें आसमान छू रही हैं।

छापेमारी के मुख्य केंद्र और ठिकाने:

  • मजिस्टेऊ कॉलोनी, ज्योतिपुरम (पटना): यहाँ स्थित आलीशान ‘जगत विला अपार्टमेंट’ के भीतर कार्यपालक अभियंता के स्वामित्व वाले एक भव्य और आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस फ्लैट पर ईओयू की पहली टीम ने धावा बोला। इस फ्लैट के आंतरिक साज-सज्जा और महंगे इंटीरियर को देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।
  • पूर्वी इंदिरा नगर, रोड नंबर-04, कंकड़बाग (पटना): पटना के केंद्र में स्थित इस प्रमुख आवासीय इलाके में स्थित गोपाल कुमार के पैतृक व निजी बहुमंजिला मकान पर दूसरी टीम ने विधिक तलाशी शुरू की। यहाँ परिवार के अन्य सदस्यों की मौजूदगी में कागजातों की जांच की जा रही है।
  • के.के.एम. कॉलेज के पास (जमुई): जमुई जिला मुख्यालय में अपनी पोस्टिंग के दौरान रहने के लिए कार्यपालक अभियंता ने के.के.एम. कॉलेज के समीप एक बड़ा और सर्वसुविधायुक्त मकान किराए पर ले रखा था। यहाँ तीसरी टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से कमरे के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली।
  • कार्यपालक अभियंता कार्यालय, झाझा (जमुई): ग्रामीण कार्य विभाग का मुख्य प्रबंधकीय कामकाज जहाँ से संचालित होता है, उस झाझा स्थित सरकारी कार्यालय कक्ष को चौथी टीम ने अपने विधिक नियंत्रण में ले लिया। यहाँ निविदाओं (टेंडर्स) से जुड़ी फाइलों और भुगतान रजिस्टरों की सघन जांच चल रही है।

कागजात खंगालने में जुटी विशेषज्ञों की टीम, बैंक खातों और लॉकरों पर नजर

​शनिवार की दोपहर तक जारी रही इस सघन छापेमारी के दौरान आर्थिक अपराध इकाई के जासूसों के साथ-साथ वित्तीय विश्लेषकों और नोट गिनने वाली मशीनों की भी मदद ली जा रही है। आवासीय परिसरों की तलाशी के दौरान अलमारियों और गुप्त लॉकरों से भारी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण, महंगी कलाई घड़ियां और विभिन्न बैंकों के पासबुक व फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के प्रमाण पत्र बरामद किए गए हैं। ईओयू के अधिकारी विभिन्न बैंकों के प्रबंधकों से संपर्क स्थापित कर गोपाल कुमार और उनके आश्रित परिजनों के नाम पर संचालित सभी बैंक खातों और लॉकरों को विधिक रूप से फ्रीज (लेन-देन पर रोक) करने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं।

​इसके अतिरिक्त, झाझा स्थित कार्यालय से पिछले दो वर्षों के भीतर आवंटित किए गए विभिन्न ग्रामीण सड़क निर्माण योजनाओं की निविदा फाइलों को जब्त किया गया है। पुलिस इस बात की भी गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या विभिन्न संवेदाकारों (कॉन्ट्रैक्टर्स) को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले में यह अवैध धन अर्जित किया गया था। कंकड़बाग और मजिस्ट्रेट कॉलोनी के ठिकानों से मिले कुछ संदेहास्पद भूमि विलेखों (सेल डीड्स) से यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि कार्यपालक अभियंता ने अपने करीबियों और बेनामी नामों से पटना के आसपास के विकासशील इलाकों में कीमती जमीनों की खरीद कर रखी है। ईओयू के महानिदेशक कार्यालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि चारों ठिकानों पर चल रही भौतिक तलाशी की विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाम तक एक विस्तृत और समेकित जब्ती सूची (सीजर लिस्ट) तैयार की जाएगी, जिसके बाद ही बरामद कुल नगदी, जेवरात और बेनामी निवेश के वास्तविक विधिक आंकड़ों की आधिकारिक घोषणा सार्वजनिक की जाएगी। फिलहाल, सभी ठिकानों पर सुरक्षा बलों का कड़ा पहरा है और भीतर मौजूद किसी भी व्यक्ति को बाहर जाने या मोबाइल का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

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