​शादी का झांसा देकर नाबालिग से यौन शोषण और 15 लाख की ठगी, उत्पाद विभाग का दारोगा संजय चौधरी गिरफ्तार

नालंदा। बिहार में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा अपने पद व रसूख का दुरुपयोग करने का एक बेहद संवेगात्मक और विधिक मामला सामने आया है। नालंदा जिले की दीपनगर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उत्पाद विभाग के एक दारोगा को पुलिस कस्टडी में लिया है। गिरफ्तार अधिकारी पर एक लड़की को शादी का झांसा देकर उस समय से शारीरिक संबंध बनाने का आरोप है जब वह विधिक रूप से नाबालिग थी। इसके साथ ही आरोपी पर लड़की के परिवार को ब्लैकमेल कर लाखों रुपये हड़पने और बाद में वादे से मुकर कर दूसरी जगह विवाह रचाने का संगीन आरोप है। पुलिस ने इस मामले की गहन तकनीकी और विधिक जांच के बाद आरोपी दारोगा को बांका जिले से गिरफ्तार किया है, जहां वह वर्तमान में कार्यरत था। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद मद्यनिषेध और उत्पाद विभाग के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

रिश्ते की आड़ में नजदीकियां और नाबालिग के शोषण का आरोप

​इस पूरे मामले की जड़ें वर्ष 2022 से जुड़ी हुई हैं। दीपनगर थाने में दर्ज कराई गई आधिकारिक शिकायत के अनुसार, आरोपी संजय चौधरी का रिश्ता पीड़िता के परिवार के साथ तय हुआ था। सामाजिक और पारिवारिक रजामंदी के बाद दोनों पक्षों में बातचीत और शादियों की रस्मों को लेकर चर्चाएं शुरू हुईं। इसी दौरान संजय चौधरी ने अपनी विधिक और सामाजिक स्थिति का प्रभाव दिखाते हुए लड़की के साथ बातचीत का दायरा बढ़ाया और धीरे-धीरे नजदीकियां स्थापित कर लीं।

​प्राथमिकी के अनुसार, वर्ष 2022 में जब पीड़िता विधिक रूप से नाबालिग थी, तभी से आरोपी ने उसे शादी का पूर्ण भरोसा देकर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। जब भी लड़की ने सामाजिक लोक-लाज और पारिवारिक मर्यादाओं का हवाला देकर इस कृत्य का विरोध करने का प्रयास किया, तो आरोपी दारोगा ने उसे यह कहकर शांत करा दिया कि वह जैसे ही वयस्क (बालिग) हो जाएगी, वह बिना किसी देरी के उसके साथ सामाजिक रीति-रिवाजों से विवाह कर लेगा। इस छलावे और भरोसे के कारण पीड़िता का परिवार लंबे समय तक आरोपी की हरकतों को नजरअंदाज करता रहा और उसकी बातों में आता रहा।

आपत्तिजनक वीडियो से ब्लैकमेलिंग और 15 लाख रुपये की रंगदारी

​समय के चक्र के साथ जब पीड़िता विधिक रूप से बालिग हो गई, तब उसने और उसकी मां ने संजय चौधरी पर विवाह की तारीख तय करने और विधिक रूप से घर ले जाने का दबाव बनाना शुरू किया। यहीं से आरोपी दारोगा का आचरण पूरी तरह से बदल गया। शादी की रस्मों को आगे बढ़ाने के बजाय वह पीड़िता को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगा। आरोप है कि जब लड़की ने अंतिम रूप से शादी करने की जिद पकड़ी, तो संजय चौधरी ने बातचीत के दौरान रिकॉर्ड किए गए कुछ आपत्तिजनक और निजी पलों के वीडियो व तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देनी शुरू कर दी।

​वह इन डिजिटल साक्ष्यों का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में कर पीड़िता को ब्लैकमेल करने लगा ताकि वह शादी का दबाव न बनाए। बात सिर्फ मानसिक प्रताड़ना तक ही सीमित नहीं रही; आरोपी ने शादी करने की विधिक शर्त के रूप में लड़की के परिवार से 15 लाख रुपये की भारी-भरकम नगद राशि की मांग कर दी। पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी बड़ी रकम देने की नहीं थी, लेकिन अपनी बेटी के भविष्य, गरिमा और सामाजिक प्रतिष्ठा को बचाने के लिए लाचार मां ने विभिन्न वित्तीय स्रोतों और रिश्तेदारों से भारी ब्याज पर कर्ज (लोन) लेकर 15 लाख रुपये की पूरी राशि संजय चौधरी को सौंप दी। पीड़ित पक्ष का दावा है कि उनके पास इस वित्तीय लेनदेन और आरोपी की ब्लैकमेलिंग गतिविधियों से जुड़े पुख्ता वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं।

विश्वासघात कर दूसरी शादी रचाना और दीपनगर थाने में विधिक मामला

​लाखों रुपये हड़पने और लगातार ब्लैकमेल करने का यह सिलसिला महीनों तक चलता रहा। जब भी पीड़ित परिवार की ओर से शादी का विधिक दबाव बनाया जाता, संजय चौधरी विभागीय व्यस्तताओं, सरकारी छापों और ट्रांसफर-पोस्टिंग का बहाना बनाकर टालमटोल कर देता था। इसी बीच, पिछले साल के अंत में पीड़िता को विश्वसनीय सूत्रों से यह स्तब्ध करने वाली जानकारी मिली कि आरोपी दारोगा ने उनके साथ पूरी तरह से विश्वासघात करते हुए गुपचुप तरीके से किसी अन्य युवती के साथ विवाह रचा लिया है और उसके साथ वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहा है।

​खुद को पूरी तरह छला हुआ और तबाह महसूस करने के बाद, पीड़िता की मां ने न्याय की गुहार लगाने का फैसला किया। उन्होंने पिछले साल 4 दिसंबर को नालंदा जिले के दीपनगर थाने में उपस्थित होकर संजय चौधरी के खिलाफ एक विस्तृत लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में अपनी बेटी को शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने, नाबालिग अवस्था में दैहिक शोषण करने, ब्लैकमेल करने और धोखाधड़ी कर लाखों रुपये हड़पने के गंभीर आरोप लगाए गए। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के विधिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए तुरंत नियमित धाराओं में केस दर्ज कर अनुसंधान शुरू कर दिया।

बांका के महेशाडीह से गिरफ्तारी और थाना प्रभारी का विधिक बयान

​मामले की विधिक प्रगति और गिरफ्तारी के संदर्भ में जानकारी देते हुए दीपनगर थाना अध्यक्ष सुमन कुमार ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही पुलिस तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों का संकलन कर रही थी। पीड़िता के न्यायालय के समक्ष कराए गए विधिक बयानों और परिवार द्वारा प्रस्तुत किए गए डिजिटल व वीडियो साक्ष्यों की प्रारंभिक जांच में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप सत्य और प्रमाणित पाए गए। आरोपी संजय चौधरी वर्तमान में बांका जिले के महेशाडीह प्रक्षेत्र में उत्पाद विभाग के दारोगा (सब-इनस्पेक्टर) के पद पर तैनात था और अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था।

​दीपनगर पुलिस की एक विशेष खोजी टीम ने तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर बांका जिले के महेशाडीह में घेराबंदी कर छापेमारी की और आरोपी संजय चौधरी को विधिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। थाना अध्यक्ष सुमन कुमार ने स्पष्ट किया कि रिश्ता तय होने के बाद आरोपी ने पद का दुरुपयोग कर नजदीकियां बढ़ाई थीं और संबंध स्थापित किए थे। जांच में दोष सिद्ध होने के बाद यह गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई है। आरोपी को नालंदा लाया गया है, जहां आवश्यक चिकित्सीय परीक्षण और कागजी विधाएं पूरी करने के बाद उसे माननीय न्यायालय के समक्ष न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेजने के लिए उपस्थापित किया जा रहा है। पुलिस इस मामले की चार्जशीट समय-सीमा के भीतर कोर्ट में दाखिल करने की तैयारी कर रही है।

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