नारायणपुर में छात्रा से बदसलूकी के आरोप में शिक्षक की बेरहमी से पिटाई, अंदरूनी गुटबाजी और हाजिरी विवाद का भी एंगल आया सामने

नारायणपुर (भागलपुर), 16 मई 2026। भागलपुर जिले के बिहपुर और नारायणपुर प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक विद्यालय में शुक्रवार की सुबह भारी हंगामा और कानून-व्यवस्था बिगड़ने जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। विद्यालय में कार्यरत एक शिक्षक पर एक छात्रा के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार और मर्यादामुक्त आचरण करने का आरोप लगा, जिसके बाद स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते विद्यालय परिसर के बाहर सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित लोगों की भीड़ जमा हो गई। उत्तेजित भीड़ ने कानून को अपने हाथ में लेते हुए संबंधित शिक्षक को घेर लिया और उनकी जमकर धुनाई कर दी। इस हिंसक झड़प और मारपीट की घटना में आरोपी शिक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए। विद्यालय परिसर में अचानक हुई इस मारपीट से पठन-पाठन का माहौल पूरी तरह बाधित हो गया और स्कूली बच्चों के बीच अफरा-तफरी मच गई। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। हालांकि, इस पूरे मामले में पुलिस और शिक्षा विभाग की प्रारंभिक विधिक जांच के बाद एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है, जो विद्यालय के भीतर चल रही शिक्षकों की आंतरिक राजनीति की ओर इशारा कर रहा है।

विद्यालय परिसर में अचानक भड़का जन-आक्रोश और मारपीट

​स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की सुबह जैसे ही विद्यालय में नियमित कक्षाओं का संचालन शुरू हुआ, वैसे ही एक छात्रा के साथ शिक्षक द्वारा की गई कथित अभद्रता की खबर आग की तरह पूरे गांव में फैल गई। ग्रामीण अंचलों में इस प्रकार की संवेदनशील खबरों को लेकर तात्कालिक आक्रोश पनपना स्वाभाविक माना जाता है। पीड़ित छात्रा के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने बिना किसी विधिक प्राधिकारी को सूचित किए सीधे विद्यालय का रुख कर लिया।

​शुरुआत में विद्यालय के गेट पर पहुंचे लोगों ने शिक्षक के खिलाफ नारेबाजी शुरू की, लेकिन कुछ ही मिनटों के भीतर विवाद इतना बढ़ गया कि लोग विद्यालय के भीतर तक प्रवेश करने का प्रयास करने लगे। स्थिति को भांपते हुए संबंधित शिक्षक जब परिसर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, तभी आक्रोशित भीड़ ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। लात-घूसों और डंडों से की गई इस अचानक पिटाई में शिक्षक के शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं और वे लहू-लुहान होकर जमीन पर गिर पड़े। विद्यालय के अन्य कर्मियों ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया, लेकिन उग्र भीड़ के सामने उनकी एक न चली।

पुलिस का त्वरित हस्तक्षेप और घायल शिक्षक का उपचार

​मामले की सूचना जैसे ही क्षेत्र में फैली, भवानीपुर थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई। भवानीपुर थाना के पीएसआई हरिश्चंद्र उपाध्याय ने बिना कोई समय गंवाए सशस्त्र पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर धावा बोला। पुलिस टीम ने सूझबूझ का परिचय देते हुए सबसे पहले उग्र भीड़ को तितर-बितर किया और गंभीर रूप से घायल शिक्षक को अपने विधिक संरक्षण में लिया। पुलिस ने ग्रामीणों को शांत कराते हुए आश्वासन दिया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई की जाएगी।

​इसके बाद, पीएसआई हरिश्चंद्र उपाध्याय ने एम्बुलेंस और पुलिस वाहन की मदद से घायल शिक्षक को तुरंत इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), नारायणपुर भेजा। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, शिक्षक के सिर और पीठ पर गंभीर चोटों के निशान हैं, हालांकि प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। पुलिस बल को एहतियात के तौर पर विद्यालय परिसर और उसके आसपास के संवेदनशील चौराहों पर तैनात कर दिया गया है ताकि दोबारा किसी भी प्रकार की हिंसक घटना या तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो सके।

शिक्षा विभाग की जांच में सामने आया हाजिरी और छुट्टी का विवाद

​इधर, इस पूरे सामाजिक और विधिक घटनाक्रम की गूंज जिला शिक्षा विभाग तक भी पहुंची। घटना की सूचना मिलते ही नारायणपुर के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) शमी अहमद तुरंत विद्यालय पहुंचे। उन्होंने विद्यालय के प्रधानाध्यापक, अन्य शिक्षकों, गैर-शैक्षणिक कर्मियों और मौके पर उपस्थित कुछ प्रबुद्ध नागरिकों से अलग-अलग कमरों में जाकर गहन पूछताछ की। इस विधिक जांच के दौरान प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के सामने जो तथ्य आए, उन्होंने मामले की पूरी दिशा ही बदल दी है।

​प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी शमी अहमद ने प्रारंभिक जांच के बाद आधिकारिक तौर पर बताया कि विद्यालय के अंदर पिछले कुछ दिनों से शिक्षकों के बीच आंतरिक गुटबाजी और तीखा मनमुटाव चल रहा था। इस विवाद की मुख्य वजह विद्यालय की आधिकारिक उपस्थिति पंजी (अटेंडेंस रजिस्टर) में आकस्मिक अवकाश (Casual Leave – CL) दर्ज करने की विधा थी। कुछ शिक्षक बिना पूर्व सूचना के गायब रहने के बाद पिछले दिनों की हाजिरी बनाने का दबाव बना रहे थे, जिसका कुछ अन्य शिक्षक विधिक रूप से विरोध कर रहे थे। शुक्रवार की सुबह भी प्रार्थना सत्र से ठीक पहले शिक्षकों के दो गुटों के बीच इसी उपस्थिति पंजी और छुट्टी को लेकर तीखी बहस और गाली-गलौज हुई थी। शिक्षा विभाग अब इस बात की कड़ियों को जोड़ रहा है कि क्या हाजिरी के इस प्रशासनिक विवाद का इस्तेमाल छात्रा वाले मामले को तूल देने के लिए किया गया है।

घायल शिक्षक के आरोप: साजिश के तहत ग्रामीणों को उकसाने का दावा

​अस्पताल में उपचाराधीन घायल शिक्षक ने पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के समक्ष अपना विधिक बयान दर्ज कराते हुए पूरी घटना को एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा करार दिया है। शिक्षक का सीधा आरोप है कि उनके साथ विद्यालय के भीतर ही कार्यरत कुछ अन्य सहकर्मी शिक्षक लंबे समय से पेशेवर ईर्ष्या और रंजिश रखते थे। उपस्थिति पंजी में अवैध रूप से हाजिरी दर्ज करने का विरोध करने के कारण वे उन्हें सबक सिखाना चाहते थे।

​घायल शिक्षक के अनुसार, छात्रा के साथ अभद्र व्यवहार का जो आरोप उन पर लगाया गया है, वह पूरी तरह से मनगढ़ंत, निराधार और असत्य है। उन्होंने दावा किया कि विवादित गुट के शिक्षकों ने ही अपनी विधिक कमियों को छिपाने और उन्हें नौकरी से सस्पेंड कराने के उद्देश्य से स्थानीय स्तर पर कुछ असामाजिक तत्वों और ग्रामीणों को झूठी कहानी सुनाकर उकसाया। साजिशन भीड़ को विद्यालय परिसर के बाहर बुलाया गया ताकि उन पर जानलेवा हमला कराया जा सके। भवानीपुर थाना पुलिस ने दोनों पक्षों के तर्कों और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की रिपोर्ट को अपने अनुसंधान के दायरे में शामिल कर लिया है। पुलिस का कहना है कि छात्रा और उसके परिजनों के विधिक बयान दर्ज करने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि बदसलूकी की घटना में कितनी सत्यता है और इसके पीछे अंदरूनी गुटबाजी का कितना हाथ है। दोनों ही पहलुओं पर एफआईआर दर्ज करने की विधिक प्रक्रिया जारी है।

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