​मधेपुरा में मां की डांट से क्षुब्ध दो सगी बहनों ने एक साथ फंदे पर लटककर की खुदकुशी, जांच में जुटी पुलिस

मधेपुरा, 16 मई 2026। बिहार के कोसी प्रमंडल अंतर्गत मधेपुरा जिले के ग्वालपाड़ा थाना क्षेत्र से एक बेहद ही दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ खोखसी पंचायत के एक सुदूरवर्ती गांव में क्षणिक गुस्से और पारिवारिक डांट-फटकार की ऐसी खौफनाक परिणति हुई, जिसने पूरे इलाके के जनमानस को स्तब्ध कर दिया है। मां द्वारा काम में देरी करने पर दी गई डांट और पिटाई से आहत होकर दो सगी नाबालिग बहनों ने बंद कमरे के भीतर फंदे से लटककर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह दुखद वाकया शुक्रवार की दोपहर बाद घटित हुआ, जिसकी भनक लगते ही पूरे गांव में कोहराम मच गया। किशोरावस्था के नाजुक दौर में मानसिक आघात और स्वाभिमान को लगी ठेस के कारण उठाए गए इस आत्मघाती कदम ने ग्रामीण समाज में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संवाद के तरीकों पर एक गंभीर बहस खड़ी कर दी है। पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वैज्ञानिक अनुसंधान शुरू कर दिया है।

खेत से शुरू हुआ विवाद और घर के भीतर की मूक त्रासदी

​इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत शुक्रवार की सुबह बेहद सामान्य तरीके से हुई थी। ग्वालपाड़ा प्रखंड की खोखसी पंचायत के अमौना गोढ़ियारी (वार्ड नंबर 11) निवासी अरुण मुखिया का पूरा परिवार रोजाना की तरह अपनी आजीविका के संघर्ष में जुटा हुआ था। अरुण मुखिया भूमिहीन मजदूर हैं और उनका पूरा परिवार खेतों में दिहाड़ी मजदूरी करके ही अपना जीवनयापन करता है। शुक्रवार की सुबह अरुण मुखिया की दो बेटियां, 14 वर्षीय रीका कुमारी और 12 वर्षीय अनीता कुमारी, अपनी मां कविता देवी के साथ गांव के ही एक किसान के खेत में काम करने गई थीं। दोपहर के समय जब कड़ी धूप और भूख के कारण काम प्रभावित होने लगा, तो मां कविता देवी ने अपनी दोनों बेटियों को खेत से वापस घर भेजा। मां का विधिक निर्देश था कि दोनों बहनें घर जाकर दोपहर का भोजन तैयार करेंगी और उसे लेकर वापस खेत पर आएंगी ताकि पूरा परिवार वहीं खाना खाकर दोबारा काम में जुट सके।

​दोनों बहनें घर तो आ गईं, लेकिन ग्रामीण परिवेश में पारंपरिक चूल्हे पर खाना पकाने और अन्य घरेलू काम समेटने में उन्हें उम्मीद से कहीं अधिक समय लग गया। इधर, खेत में भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच काम करते हुए भोजन के इंतजार में मां कविता देवी का धैर्य जवाब दे गया। जब दोनों बहनें काफी देरी से खाना लेकर खेत पर पहुंचीं, तो गुस्से से लाल मां ने आव देखा न ताव, दोनों बेटियों को सबके सामने कड़ी डांट पिलानी शुरू कर दी। बात सिर्फ डांट-फटकार तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि मां ने गुस्से के आवेग में आकर दोनों बच्चियों की शारीरिक रूप से पिटाई भी कर दी। 14 और 12 वर्ष की इन किशोरियों के लिए सार्वजनिक रूप से हुई यह पिटाई और शब्दों के बाण अत्यधिक अपमानजनक साबित हुए। वे रोती हुई खाना वहीं छोड़कर चुपचाप वापस अपने घर की ओर लौट आईं।

अपमान के गहरे बोध में बहनों ने सामूहिक रूप से लिया आत्मघाती फैसला

​खेत से लौटने के बाद रीका और अनीता के भीतर अपनी ही मां के प्रति गहरे दुख और क्षोभ का संचार हो चुका था। किशोरावस्था की दहलीज पर खड़ी दोनों बहनों को मां का यह व्यवहार और सजा इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने घर पहुंचते ही एक खौफनाक रास्ता चुनने की ठान ली। दोपहर के समय जब गांव के अधिकांश लोग खेतों में थे और घर के आसपास सन्नाटा था, दोनों बहनों ने अपने खपरैल नुमा घर के मुख्य दरवाजे को अंदर से विधिक रूप से बंद कर लिया। कमरे के भीतर की खामोशी में दोनों ने एक-दूसरे का संबल बनते हुए घर की छत के धरन (शहतीर) से कपड़े का फंदा तैयार किया।

​कुछ ही मिनटों के भीतर दोनों सगी बहनें एक साथ फंदे पर झूल गईं। दोपहर बाद जब मां कविता देवी और परिवार के अन्य सदस्य काम खत्म कर खेत से वापस घर लौटे, तो उन्हें घर का दरवाजा अंदर से पूरी तरह अवरुद्ध मिला। शुरुआत में परिजनों ने सोचा कि दोनों बेटियां गुस्से में सो रही होंगी। लेकिन काफी देर तक आवाज देने, दरवाजा पीटने और खिड़की के झरोखों से पुकारने के बाद भी जब अंदर से कोई आवाज नहीं आई, तो परिजनों का माथा ठनका। पिता अरुण मुखिया ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से जब लकड़ी के दरवाजे को धक्का देकर तोड़ा, तो भीतर का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। दोनों लाडली बेटियों के शव फंदे से लटक रहे थे।

मजदूर परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, रो-रोकर बदहवास हुई मां

​इस हृदयविदारक घटना के बाद अरुण मुखिया के साधारण से आशियाने के सामने पूरे गांव की भीड़ जमा हो गई। दो मासूम बच्चियों की एक साथ मौत की खबर ने हर आंख को नम कर दिया। सबसे ज्यादा बुरी स्थिति मृतका की मां कविता देवी की है, जो अपनी ही डांट और गुस्से को अपनी बेटियों की मौत का कारण बनते देख पूरी तरह से मानसिक संतुलन खो चुकी हैं। कविता देवी बार-बार छाती पीटकर रो रही हैं और खुद को कोस रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने केवल बच्चों के सुधार और समय पर काम न करने के कारण गुस्से में हाथ उठाया था, उन्हें कतई अंदाजा नहीं था कि उनकी बेटियां इतना बड़ा और खौफनाक कदम उठा लेंगी।

​पिता अरुण मुखिया भी अपनी बेटियों के शवों को देखकर बदहवास हैं। ग्रामीणों ने बताया कि अरुण मुखिया बेहद गरीब हैं और अपनी बेटियों की पढ़ाई और परवरिश के लिए दिन-रात मेहनत करते थे। इस हादसे ने उनके हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह से उजाड़ दिया है। गांव के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि अक्सर आर्थिक तंगी और अत्यधिक काम के तनाव के कारण ग्रामीण इलाकों में माता-पिता का व्यवहार बच्चों के प्रति हिंसक हो जाता है, जिसका ऐसा आत्मघाती परिणाम समाज को भुगतना पड़ता है।

एसपी संदीप कुमार सिंह के निर्देश पर फॉरेंसिक टीम ने संभाली कमान

​घटना की विधिक सूचना मिलते ही ग्वालपाड़ा थाना पुलिस की टीम दलबल के साथ अमौना गोढ़ियारी गांव पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित करते हुए मामले की विधिक जांच शुरू की। मधेपुरा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) संदीप कुमार सिंह ने इस दोहरे सुसाइड मामले को अत्यंत संवेदनशीलता से लेते हुए तुरंत मुख्यालय स्तर से एक विशेष फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को ग्वालपाड़ा के लिए रवाना किया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि चूंकि मामला दो नाबालिग सगी बहनों की एक साथ मौत से जुड़ा है, इसलिए पुलिस किसी भी प्रकार की तकनीकी या विधिक चूक नहीं करना चाहती।

​फॉरेंसिक टीम ने बंद कमरे के भीतर से फंदे की रस्सी, कपड़ों के नमूने, पैरों के निशान और फंदे की ऊंचाई के विधिक साक्ष्य एकत्र किए हैं ताकि यह पूरी तरह स्पष्ट हो सके कि यह मामला शुद्ध रूप से आत्महत्या का ही है और इसमें कोई बाहरी संदेहास्पद कोण शामिल नहीं है। थानाध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस बल ने मृतका के माता-पिता, भाई और पास-पड़ोस के प्रत्यक्षदर्शियों के विधिक बयान दर्ज किए हैं। पुलिस ने दोनों बच्चियों के शवों को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए मधेपुरा सदर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार सिंह ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के विधिक कारणों और समय की वास्तविक स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। तब तक पुलिस सभी पक्षों से पूछताछ जारी रखे हुए है।

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