
नवगछिया (भागलपुर)। बिहार के भागलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले नवगछिया पुलिस जिला में कानून का खौफ किस कदर समाप्त हो चुका है, इसकी एक खौफनाक बानगी मंगलवार की शाम खरीक थाना क्षेत्र के गरैया मुख्य चौक पर देखने को मिली। जिस चौक पर सैकड़ों लोगों की मौजूदगी रहती है, वहां महज चंद रुपयों के लेन-देन को लेकर उपजे विवाद में एक 19 वर्षीय युवा दुकानदार को गोली मार दी गई। दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने न केवल प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है, बल्कि आम नागरिकों के मन में यह सवाल भी पैदा कर दिया है कि क्या अब खून इतना सस्ता हो गया है कि महज डेढ़ हजार रुपयों के लिए किसी की जान ली जा सकती है। घायल युवक की पहचान इस्माइलपुर थाना क्षेत्र के छोटी परबत्ता निवासी अखिलेश मंडल के पुत्र सौरभ कुमार के रूप में हुई है। इस खूनी वारदात के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल व्याप्त है, जहाँ लोग अपनी सुरक्षा को लेकर सशंकित नजर आ रहे हैं।
ईमानदारी की कमाई और खूनी तगादा
वारदात के पीछे की कहानी अत्यंत मर्माहत करने वाली है। घायल सौरभ और उसका बड़ा भाई गौरव कुमार भागलपुर शहर में घूम-घूमकर मोमोज बेचने का काम करते हैं। कड़ी धूप और मेहनत के बाद जो चंद पैसे ये भाई कमाते हैं, उसी से उनके घर का चूल्हा जलता है। गौरव ने बताया कि गरैया का ही रहने वाला एक व्यक्ति, जो पहले उनके साथ काम कर चुका था, उसने कुछ समय पहले गौरव से करीब 1500 रुपये उधार लिए थे। अपनी ही मेहनत की गाढ़ी कमाई को वापस मांगने के लिए दोनों भाई मंगलवार को गरैया चौक पहुँचे थे।
गौरव ने अपनी मोटरसाइकिल मुख्य चौक पर खड़ी की और अपने छोटे भाई सौरभ को वहीं रुकने के लिए कहा। गौरव खुद उस व्यक्ति के पास गया ताकि अपने पैसे वापस मांग सके। गौरव का कहना था कि उसे उम्मीद थी कि उसका पुराना साथी उसके पैसे लौटा देगा, लेकिन वहां पहुँचते ही उसे तल्खी का सामना करना पड़ा। आरोपी ने पैसे देने से न केवल साफ इनकार कर दिया, बल्कि वह टालमटोल और बदतमीजी पर उतारू हो गया। निराश होकर गौरव जब वापस अपनी बाइक की ओर लौटने लगा, तो उसे क्या पता था कि पीछे से मौत उसके भाई का पीछा कर रही है।
गरैया चौक पर तांडव और ‘गमछा’ धारी हमलावर
अभी गौरव अपने भाई के पास पहुँच भी नहीं पाया था कि अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा बाजार गूंज उठा। गौरव ने देखा कि एक हमलावर ने, जिसने अपना चेहरा गमछे से पूरी तरह ढका हुआ था, सौरभ पर गोली चला दी। गोली लगते ही 19 साल का सौरभ चीखते हुए जमीन पर गिर पड़ा और देखते ही देखते सड़क खून से लाल हो गई। व्यस्त बाजार में सरेराह हुई इस फायरिंग के बाद भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-बदल भागने लगे, जिसका फायदा उठाकर हमलावर बड़े आराम से मौके से फरार हो गया।
गौरव जब अपने भाई के पास पहुँचा, तो उसकी हालत देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। सौरभ के शरीर के संवेदनशील हिस्से में गोली लगी थी और वह दर्द से कराह रहा था। हमलावर के चेहरे पर बंधा गमछा इस बात की तस्दीक कर रहा था कि यह वारदात अचानक नहीं हुई, बल्कि इसकी पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी ताकि पहचान छुपाई जा सके। हालांकि, गौरव ने उस व्यक्ति पर गहरा संदेह जताया है जिससे वह पैसे मांगने गया था, क्योंकि विवाद की शुरुआत वहीं से हुई थी।
अस्पताल में जिंदगी की जंग और परिजनों का विलाप
सौरभ को तुरंत स्थानीय लोगों की मदद से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन वहां उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे भागलपुर के मायागंज अस्पताल (JLNMCH) रेफर कर दिया। मायागंज अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती सौरभ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों की एक टीम उसे बचाने के लिए लगातार प्रयासरत है, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव और शरीर के अंदरूनी हिस्से में चोट लगने के कारण वह खतरे से बाहर नहीं है।
अस्पताल परिसर में मौजूद सौरभ के माता-पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता अखिलेश मंडल का कहना है कि उन्होंने अपने बेटों को शहर में मेहनत करने के लिए भेजा था ताकि वे ईमानदारी से जी सकें, लेकिन समाज में बढ़ती नफरत ने उनके हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। सौरभ अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ है और इतनी कम उम्र में उसके साथ हुई इस दरिंदगी ने पूरे गांव को आक्रोशित कर दिया है।
पुलिस की तफ्तीश: सीसीटीवी और संदिग्धों पर नजर
वारदात की सूचना मिलते ही नवगछिया पुलिस की टीम हरकत में आई और घटनास्थल पर पहुँचकर साक्ष्य जुटाने शुरू किए। पुलिस ने चौक के आसपास मौजूद चश्मदीदों के बयान दर्ज किए हैं और गौरव कुमार की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे उस संदिग्ध व्यक्ति की तलाश कर रहे हैं जिससे गौरव का विवाद हुआ था।
जांच के प्रमुख बिंदु:
- सीसीटीवी फुटेज: गरैया चौक के पास लगे दुकानों के कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि हमलावर के भागने की दिशा और उसकी बाइक का नंबर पता लगाया जा सके।
- पुराना रिकॉर्ड: पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या पैसे के लेन-देन के अलावा कोई और रंजिश थी, हालांकि परिजनों ने इससे साफ इनकार किया है।
- छापेमारी: पुलिस की अलग-अलग टीमें संदिग्ध के ठिकानों पर दबिश दे रही हैं, जो वारदात के बाद से ही घर छोड़कर फरार बताया जा रहा है।
बाजार में दहशत और गिरती सुरक्षा व्यवस्था
गरैया चौक पर हुई इस घटना ने स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों के बीच भारी डर पैदा कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि अगर दिनदहाड़े मुख्य चौक पर भी लोग सुरक्षित नहीं हैं और महज 1500 रुपये के लिए गोलियां चल सकती हैं, तो फिर कानून का इकबाल कहाँ है? स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी भारी नाराजगी है कि इलाके में पुलिस की गश्ती नगण्य है। यदि पुलिस की मौजूदगी होती, तो शायद अपराधी इस तरह की हिमाकत नहीं करते।
नवगछिया का यह क्षेत्र पहले भी कई आपराधिक वारदातों का गवाह रहा है, लेकिन एक गरीब मोमोज विक्रेता को निशाना बनाना समाज की संवेदनहीनता को दर्शाता है। यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह उस असुरक्षा की भावना का प्रतीक है जो छोटे व्यवसायियों और मेहनतकश लोगों के मन में घर कर रही है। लोगों की मांग है कि पुलिस न केवल हमलावर को गिरफ्तार करे, बल्कि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को भी चाक-चौबंद करे।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
सौरभ जैसे युवाओं के लिए, जो छोटे शहरों से आकर बड़े शहरों में अपनी मेहनत से पहचान बनाते हैं, इस तरह की घटनाएं उनके हौसले तोड़ देती हैं। 1500 रुपये एक मजदूर के लिए सप्ताह भर की कमाई हो सकती है, लेकिन एक अपराधी के लिए यह किसी की जान लेने का बहाना बन गया। इस खूनी संघर्ष ने यह साफ कर दिया है कि अपराध की जड़ें अब बहुत गहरे धंस चुकी हैं, जहाँ मानवीय संवेदनाओं का कोई स्थान नहीं रह गया है।
फिलहाल, पुलिस की कई टीमें छापेमारी कर रही हैं और आला अधिकारी मामले की निगरानी कर रहे हैं। भागलपुर के मायागंज अस्पताल में सौरभ के स्वास्थ्य पर सबकी नजरें टिकी हैं। ग्रामीण और परिजन बस यही प्रार्थना कर रहे हैं कि 19 साल का यह नौजवान एक बार फिर खड़ा हो सके और अपने परिवार का सहारा बने। नवगछिया पुलिस के लिए यह साख का सवाल बन गया है कि वह कितनी जल्दी इस ‘गमछा धारी’ हमलावर को सलाखों के पीछे पहुँचाती है।


