
भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले में संचार की जीवनरेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद उत्पन्न हुई गंभीर परिवहन समस्या को हल करने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। 3 मई 2026 की देर रात पुल का एक स्लैब नीचे गिर जाने के कारण भागलपुर और नवगछिया के बीच भारी वाहनों का परिचालन पूरी तरह ठप हो गया था। इस आपात स्थिति ने न केवल आम नागरिकों बल्कि व्यापारियों, किसानों और नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी थी। इस संकट को दूर करने के लिए जिलाधिकारी भागलपुर की अध्यक्षता में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक आयोजित की गई, जिसमें गंगा नदी में निजी जलयानों के माध्यम से फेरी और कार्गो सेवा शुरू करने का आदेश जारी किया गया है। ज्ञापांक 695 के माध्यम से जारी इस नए आदेश में जलयानों के संचालन के लिए विस्तृत मार्ग, जिम्मेदार कंपनियां और यात्रियों व वाहनों के लिए आधिकारिक दरें निर्धारित कर दी गई हैं।
पुल टूटने से पैदा हुए आर्थिक और सामाजिक गतिरोध का अंत
विक्रमशिला सेतु के एक स्लैब के अचानक गिर जाने के बाद से भागलपुर और उत्तर बिहार के बीच संपर्क सूत्र लगभग कट गया था। हालांकि निजी छोटी नावों से यात्रियों का आना-जाना किसी तरह जारी था, लेकिन दो चक्का से लेकर 16 चक्का तक के व्यावसायिक वाहनों के लिए कोई रास्ता नहीं बचा था। रसद आपूर्ति प्रभावित होने के कारण बाजारों में जरूरी सामानों की कमी और महंगाई का खतरा मंडराने लगा था। किसानों की फसलें मंडियों तक नहीं पहुँच पा रही थीं और भारी ट्रकों का आवागमन बंद होने से निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे थे। प्रशासनिक स्तर पर नियमित टेंडर और बंदोबस्ती की प्रक्रिया में कम से कम एक माह का समय लग सकता था, जिसे देखते हुए जनहित में इस आकस्मिक फेरी सेवा को मंजूरी दी गई है। यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी जब तक पुल पर सामान्य यातायात बहाल नहीं हो जाता।
तीन प्रमुख रूटों पर तीन कंपनियों को मिली कमान
प्रशासन ने गंगा नदी के विभिन्न घाटों के बीच निर्बाध यातायात सुनिश्चित करने के लिए तीन अलग-अलग कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी है। इन कंपनियों ने भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) से प्राप्त अनुमति के आधार पर आवेदन दिया था।
संचालन का विवरण इस प्रकार है:
- कन्हैया लॉजिस्टीक, साहेबगंज (झारखंड): यह कंपनी बाबूपुर घाट (सबौर) से महादेवपुर घाट के बीच परिचालन करेगी। इसके लिए 2 यात्री जलयान (फेरी) और 6 मालवाहक जलयान (कार्गो) की अनुमति दी गई है।
- सार्क सीपिंग, भागलपुर: यह कंपनी कहलगांव घाट से तीनटंगा घाट के बीच अपनी सेवाएं देगी। इसके पास 4 यात्री जलयान और 4 मालवाहक जलयान संचालित करने का जिम्मा है।
- जिरीया प्राइवेट लिमिटेड, मनिहारी (कटिहार): इस कंपनी को बरारी घाट से जाहन्वी चौक घाट के बीच जलयान चलाने के लिए अधिकृत किया गया है। इसके बेड़े में 2 यात्री जलयान और 4 कार्गो जलयान शामिल होंगे।
इन जलयानों के जरिए अब छोटे वाहन ही नहीं, बल्कि 18 चक्का वाले भारी ट्रक भी गंगा पार कर सकेंगे, जिससे जिले की व्यापारिक रफ़्तार को फिर से पंख मिलेंगे।
प्रशासन द्वारा अनुमोदित किराए की विस्तृत सूची
जिला प्रशासन ने मनमानी वसूली रोकने के लिए प्रत्येक श्रेणी के यात्री और वाहन के लिए दरें तय कर दी हैं। इसमें खास बात यह है कि एम्बुलेंस को इस सेवा के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी गई है। कुल प्राप्त राजस्व का 70 प्रतिशत हिस्सा सेवा संचालक को मिलेगा, जबकि 30 प्रतिशत राशि सरकारी खजाने में जमा की जाएगी।
प्रमुख श्रेणियों की दरें (रुपये में):
यात्री / वाहन का प्रकार | अनुमोदित दर (कुल) | संचालक का हिस्सा (70%) | सरकार का हिस्सा (30%) |
|---|---|---|---|
यात्री (12 वर्ष से ऊपर) | 50 | 35 | 15 |
यात्री (12 वर्ष से नीचे) | 25 | 17.50 | 7.50 |
एम्बुलेंस | निःशुल्क | निःशुल्क | निःशुल्क |
मोटर साईकिल / लोडेड साईकिल | 50 | 35 | 15 |
तीन पहिया टोटो / ऑटो | 150 | 105 | 45 |
जीप / कार / बोलेरो / स्कॉर्पियो | 700 | 490 | 210 |
ट्रैक्टर (लोडेड) | 500 | 350 | 150 |
पिकअप (लोडेड) | 600 | 420 | 180 |
10 चक्का ट्रक (लोडेड) | 3800 | 2660 | 1140 |
14 चक्का ट्रक (लोडेड) | 4500 | 3150 | 1350 |
18 चक्का ट्रक (लोडेड) | 5000 | 3500 | 1500 |
अनलोडेड (खाली) वाहनों के लिए दरें लोडेड वाहनों की तुलना में लगभग आधी रखी गई हैं।
राजस्व संग्रहण और सुरक्षा के सख्त मानक
प्रशासन ने जलयानों के सुरक्षित और पारदर्शी संचालन के लिए नियमावली भी जारी की है। सभी संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे स्वीकृत दरों की सूची को घाटों और टिकट काउंटरों पर सीमेंटेड बोर्ड या फ्लेक्स के माध्यम से प्रदर्शित करें, ताकि यात्रियों को जानकारी रहे। भाड़े की कुल राशि का 30 प्रतिशत हिस्सा प्रतिदिन शाम 06:30 बजे तक संबंधित अंचल या अनुमंडल कार्यालय के नाजिर के पास जमा करना अनिवार्य होगा। कहलगांव घाट का राजस्व कहलगांव अनुमंडल कार्यालय में, जबकि अन्य घाटों का राजस्व उनके संबंधित अंचलों (सबौर, गोपालपुर, नवगछिया) में जमा होगा। नाजिरों का दायित्व होगा कि वे इस राशि को अगले दिन पूर्वाह्न 11:00 बजे तक सरकारी ट्रेजरी में जमा कर उसकी चालान प्रति गोपनीय शाखा और अपर समाहर्ता (राजस्व) को उपलब्ध कराएं।
सुरक्षा के मोर्चे पर किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आदेश के अनुसार, किसी भी परिस्थिति में जलयानों का संचालन सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले नहीं होगा। जलयानों पर बैठने की क्षमता से अधिक यात्री या वाहन नहीं लादे जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक क्रूज या स्टीमर पर पर्याप्त संख्या में लाइफ जैकेट, हवा भरी हुई ट्यूब और रस्सी जैसे जीवन रक्षक उपकरण रखना अनिवार्य है। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि इन निर्देशों का उल्लंघन पाया गया, तो आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 की सुसंगत धाराओं के तहत संचालकों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निगरानी और अनुश्रवण की व्यवस्था
इस पूरी व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए संबंधित अंचल अधिकारियों, प्रखंड विकास पदाधिकारियों और अनुमंडल पदाधिकारियों को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है। अपर समाहर्ता (राजस्व) और उप विकास आयुक्त को भी इस कार्य के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वरीय पुलिस अधीक्षक को सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सूचित किया गया है। प्रशासन का मानना है कि यह वैकल्पिक जलमार्ग सेवा न केवल विक्रमशिला सेतु के मरम्मत होने तक एक मजबूत सहारा बनेगी, बल्कि यह जिले के व्यापारिक पारिस्थितिकी तंत्र को टूटने से भी बचाएगी। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे निर्धारित दरों पर ही यात्रा करें और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए प्रशासन का सहयोग करें।


