गया में तिलक समारोह बना अफरा-तफरी का कारण, खाना खाते ही 55 लोग बीमार; फूड पॉइजनिंग की आशंका

बिहार के गया जिले में एक पारिवारिक खुशी का माहौल उस समय अचानक अफरा-तफरी में बदल गया जब तिलक समारोह में शामिल दर्जनों लोगों की तबीयत भोजन करने के बाद बिगड़ गई। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया और एक-एक कर लोग पेट दर्द, उल्टी और बेचैनी की शिकायत करने लगे। देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। प्राथमिक जांच में फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है।

यह घटना गया जिले के गुरुआ प्रखंड अंतर्गत मंडा पंचायत के धाना बिगहा गांव की बताई जा रही है। यहां शिक्षक रमेश रविदास के भांजे राहुल कुमार के तिलक समारोह का आयोजन किया गया था। समारोह में आसपास के गांवों के अलावा बाराचट्टी थाना क्षेत्र के भगवती गांव से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होने पहुंचे थे।

जानकारी के अनुसार समारोह के लिए करीब 600 लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम में सभी कुछ सामान्य चल रहा था और मेहमान भोजन कर रहे थे। लेकिन खाना खाने के कुछ समय बाद कई लोगों को अचानक पेट दर्द, उल्टी, घबराहट और बेचैनी की शिकायत होने लगी।

शुरुआत में लोगों ने इसे सामान्य समस्या समझा, लेकिन थोड़ी ही देर में बीमार पड़ने वालों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। एक-एक कर कई लोग जमीन पर बैठ गए और कुछ की हालत ज्यादा खराब होने लगी। इसके बाद समारोह स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

ग्रामीणों और परिजनों ने तुरंत एंबुलेंस और अन्य वाहनों की मदद से बीमार लोगों को गुरुआ स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना शुरू किया। अस्पताल में अचानक बड़ी संख्या में मरीज पहुंचने से स्वास्थ्यकर्मियों में भी हलचल मच गई। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने तुरंत इलाज शुरू किया।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक करीब 55 लोगों को गुरुआ स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। वहीं लड़की पक्ष के लगभग 33 लोगों की तबीयत भी बिगड़ गई, जिन्हें बाराचट्टी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। इसके अलावा कई लोग निजी क्लीनिकों में भी इलाज करा रहे हैं।

अस्पताल में भर्ती मरीजों में महिलाओं, पुरुषों और बुजुर्गों के साथ कुछ बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। डॉक्टरों ने अधिकांश मरीजों को प्राथमिक उपचार दिया और उनकी हालत में सुधार बताया है। हालांकि कुछ मरीजों की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर भी किया गया।

जानकारी के अनुसार एक मरीज को अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया है। वहीं कई मरीजों को इलाज के बाद घर भेज दिया गया, जबकि दर्जनों लोग अब भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और निजी क्लीनिकों में भर्ती हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम धाना बिगहा गांव पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की। चिकित्सा प्रभारी डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि प्राथमिक जांच में फूड पॉइजनिंग की आशंका सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि भोजन के नमूने और अन्य चीजों की जांच की जा रही है ताकि बीमारी की वास्तविक वजह का पता लगाया जा सके।

ग्रामीणों के अनुसार समारोह में परोसे गए भोजन के बाद ही लोगों की हालत बिगड़नी शुरू हुई थी। लोगों का कहना है कि खाने में इस्तेमाल किसी सामग्री में गड़बड़ी हो सकती है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

सूत्रों के अनुसार समारोह में भोजन बनाने का काम गुरारू थाना क्षेत्र के बडौरा गांव के रसोइयों द्वारा किया गया था। वहीं राशन और अन्य खाद्य सामग्री गुरुआ बाजार से मंगाई गई थी। अब जांच टीम यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं खाद्य सामग्री खराब तो नहीं थी या भोजन तैयार करने में स्वच्छता मानकों की अनदेखी तो नहीं हुई।

विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े आयोजनों में भोजन तैयार करते समय साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। गर्मी के मौसम में भोजन जल्दी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे फूड पॉइजनिंग की घटनाएं सामने आ सकती हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मरीजों में उल्टी, पेट दर्द, घबराहट और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं। डॉक्टर लगातार मरीजों की निगरानी कर रहे हैं और आवश्यक दवाएं दी जा रही हैं।

घटना के बाद गांव में चिंता और दहशत का माहौल बना हुआ है। परिवार के लोग और ग्रामीण अस्पतालों में भर्ती मरीजों का हालचाल लेने पहुंच रहे हैं। वहीं समारोह की खुशियां पूरी तरह फीकी पड़ गईं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ ही घंटों पहले जहां गांव में जश्न का माहौल था, वहीं अचानक अस्पताल और एंबुलेंस की आवाजों से पूरा इलाका दहल गया। कई लोगों ने बताया कि उन्होंने पहली बार किसी पारिवारिक समारोह में इतनी बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ बीमार पड़ते देखा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सामाजिक आयोजनों में भोजन की गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए। लंबे समय तक खुले में रखा भोजन या दूषित पानी भी फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है।

घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आसपास के क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

गया जिले की यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि बड़े समारोहों में भोजन व्यवस्था को लेकर सावधानी कितनी जरूरी है। खासकर गर्मी के मौसम में साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

फिलहाल राहत की बात यह है कि अधिकांश मरीजों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज में जुटी है और मरीजों पर नजर रखी जा रही है। वहीं ग्रामीणों और परिवार के लोगों को उम्मीद है कि सभी लोग जल्द स्वस्थ होकर घर लौटेंगे।

इस घटना ने पूरे इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है और लोग अब स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि बीमारी की असली वजह सामने आ सके।

  • ये भी पढ़े..

    खान सर-ज्ञान बिंदु विवाद पर बोले पप्पू यादव: “दोनों मेरे दिल के टुकड़े, शिक्षा को मत बनाइए जंग का मैदान”

    Share Add as a preferred…

    मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष का दायरा बढ़ा, अब ₹4 लाख तक आय वाले परिवारों को मिलेगा इलाज में आर्थिक सहारा

    Share Add as a preferred…