प्रथम पंच ग्राममाता सोनिया देवी की पुण्यतिथि पर संतमत सत्संग, श्रद्धांजलि सभा में उमड़ी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आस्था

भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड अंतर्गत श्रीमतपुर हुजूरनगर पंचायत के विनोबाटोला में प्रथम पंच ग्राममाता सोनिया देवी की दूसरी पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाई गई। इस अवसर पर मैय्यो बाबू घर परिसर में संतमत सत्संग एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और संतमत अनुयायियों ने भाग लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान भजन, प्रवचन और आध्यात्मिक विचारों की गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और सोनिया देवी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। श्रद्धांजलि के दौरान लोगों ने उनके धार्मिक जीवन, समाज के प्रति समर्पण और सेवा भावना को याद करते हुए उन्हें एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व बताया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि उनके द्वारा किए गए सामाजिक और धार्मिक कार्य आज भी क्षेत्र के लोगों को प्रेरणा देते हैं।

संतमत सत्संग के दौरान मुख्य प्रवाचिका साध्वी शीला ने अपने भजनों और आध्यात्मिक प्रवचन से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने संतमत के सिद्धांतों, गुरु भक्ति और मानव जीवन में आध्यात्मिक साधना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके मधुर भजनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया और पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

अपने संबोधन में साध्वी शीला ने सोनिया देवी के जीवन को संतमत की सच्ची साधिका का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सोनिया देवी ने अपने जीवन में सादगी, सेवा, अनुशासन और आध्यात्मिक मूल्यों को सर्वोच्च स्थान दिया। उनका जीवन केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने समाज में धार्मिक जागरूकता और सद्भाव का संदेश भी फैलाया। उन्होंने कहा कि सोनिया देवी संत शाही स्वामी से दीक्षित थीं और महर्षि मेंहीं परमहंस की शिक्षाओं को अपने जीवन में पूरी निष्ठा के साथ अपनाया था। यही कारण है कि आज भी लोग उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते हैं।

साध्वी शीला ने अपने प्रवचन में कहा कि किसी भी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके पद या संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके विचारों, व्यवहार और समाज के प्रति किए गए कार्यों से होती है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जीवन मनुष्य को विनम्रता, प्रेम और सेवा की भावना सिखाता है। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाए तो समाज में सुख, शांति और सद्भाव का वातावरण मजबूत हो सकता है।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. शिवनाथ बाबा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विनोबाटोला आज भी सोनिया देवी के योगदान को सम्मान के साथ याद करता है। उनके अनुसार गांव के लगभग हर परिवार पर सोनिया देवी का किसी न किसी रूप में उपकार रहा है। उन्होंने अपने जीवनकाल में लोगों की सहायता करने, धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाने और समाज को जोड़ने का कार्य किया। यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को याद करने और उन्हें आगे बढ़ाने का अवसर बन गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि गांव की सामाजिक और धार्मिक परंपराओं को मजबूत बनाने में सोनिया देवी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके कार्यों ने लोगों के बीच आपसी सहयोग, भाईचारे और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा दिया। आज नई पीढ़ी को भी उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज सेवा और नैतिक मूल्यों के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।

डॉ. शिवनाथ बाबा ने अपने संबोधन में बाबू कार्तिक भगत के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वे भगवान शिव के प्रति अत्यंत समर्पित थे और धार्मिक गतिविधियों में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाते थे। उनके जीवन का उद्देश्य भी समाज में धार्मिक आस्था और सकारात्मक सोच को मजबूत करना था। ऐसे व्यक्तित्वों की स्मृतियां समाज को सही दिशा देने का कार्य करती हैं।

कार्यक्रम में मौजूद पूर्व मुखिया प्रत्याशी नीतु कुमारी उर्फ पुतुल गुप्ता ने भी सोनिया देवी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन धार्मिक आस्था, सेवा और सादगी का अद्भुत उदाहरण था। उन्होंने बताया कि सोनिया देवी हमेशा जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए तत्पर रहती थीं और गांव में धार्मिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को जोड़ने का प्रयास करती थीं। उनका व्यवहार सभी के प्रति समान और स्नेहपूर्ण था, जिसके कारण हर वर्ग के लोगों के बीच उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त था।

सत्संग के दौरान संतमत से जुड़े भजन प्रस्तुत किए गए, जिनमें श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ भाग लिया। भजनों के माध्यम से गुरु महिमा, ईश्वर भक्ति, आत्मज्ञान और मानव जीवन के उद्देश्य का संदेश दिया गया। प्रवचन के साथ-साथ भजन सुनने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे थे। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन और धार्मिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा गया।

ग्रामीणों ने कहा कि इस तरह के धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। ऐसे कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज को एकजुट करने और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत बनाने का माध्यम भी बनते हैं।

कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने सोनिया देवी के बताए आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। उपस्थित लोगों ने कहा कि सेवा, सद्भाव, धार्मिक आस्था और मानवता के मूल्यों को जीवन में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। आयोजन के सफल संचालन में स्थानीय ग्रामीणों और संतमत अनुयायियों ने सक्रिय सहयोग दिया।

इस अवसर पर नन्दलाल रविदास, ओमराम, बोलोबम, हेगुरु, श्रेयांश राज, सुप्रिया विकास, भारत विकास, किरण विकास, आकांक्षा, आरोही, लाडो रानी, विक्की, विशाल, रजनी देवी, बरुण दास, कंचन कुमारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने श्रद्धापूर्वक कार्यक्रम में भाग लेते हुए आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया और सोनिया देवी के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में प्रेम, सेवा और सद्भाव का संदेश आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

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