शिक्षा मंत्री बनते ही एक्शन मोड में मिथिलेश तिवारी, बोले- डिग्री नहीं, रोजगार से जुड़ी होगी बिहार की नई शिक्षा व्यवस्था

बिहार की नई सरकार में शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालते ही मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बड़ा विजन सामने रखा है। शुक्रवार को पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि अब बिहार की शिक्षा व्यवस्था केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसे रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जाएगा। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, युवाओं के कौशल विकास और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया जैसे मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बताया।

पदभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत में मिथिलेश तिवारी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आभार जताया और कहा कि उन पर जो भरोसा जताया गया है, उस पर पूरी ईमानदारी और गंभीरता के साथ काम करेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य को आकार देने का माध्यम है।

मंत्री ने बिहार की ऐतिहासिक शैक्षणिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि यह वही धरती है जिसने पूरी दुनिया को ज्ञान और शिक्षा का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि बिहार की पहचान केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि शैक्षणिक और बौद्धिक परंपरा से भी जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि राज्य को फिर से शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की जरूरत है।

मिथिलेश तिवारी ने कहा कि बिहार में शिक्षा का दायरा लगातार बढ़ा है। उन्होंने चरवाहा विद्यालय से लेकर आईआईएम जैसे संस्थानों तक के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह बदलाव बिहार की शिक्षा व्यवस्था के विस्तार को दिखाता है। हालांकि उन्होंने माना कि अभी भी कई क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है और आने वाले समय में सरकार इसी दिशा में काम करेगी।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब शिक्षा व्यवस्था को रोजगार से जोड़ना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। उनके अनुसार केवल डिग्री हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो युवाओं को रोजगार, कौशल और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाए।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा को इस तरह विकसित करना होगा कि छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे रोजगार के अवसरों से जुड़ सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शिक्षा को आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढालने पर काम करेगी। डिजिटल शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और व्यावसायिक कौशल को मजबूत करने की दिशा में विशेष योजनाएं बनाई जाएंगी ताकि बिहार के युवाओं को दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े।

TRE-4 शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर मिथिलेश तिवारी ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और पूरी स्थिति की समीक्षा करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अभ्यर्थियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाएगा और समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मामले में ऐसा रास्ता निकाला जाएगा जिससे अभ्यर्थियों को राहत मिल सके और भर्ती प्रक्रिया भी पारदर्शी तरीके से आगे बढ़े। उनके बयान के बाद TRE-4 अभ्यर्थियों के बीच उम्मीद बढ़ी है, क्योंकि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया और नोटिफिकेशन को लेकर लगातार प्रदर्शन और विरोध हो रहा है।

मिथिलेश तिवारी ने खुद के अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि वह केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति भी रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह शिक्षक के रूप में काम कर चुके हैं और कोचिंग सेंटर संचालन का अनुभव भी रखते हैं। इसी वजह से वह छात्रों और शिक्षकों की वास्तविक समस्याओं को करीब से समझते हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ होता है। उनके अनुसार शिक्षक केवल पढ़ाने का काम नहीं करता, बल्कि वह समाज और आने वाली पीढ़ियों का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक खुद संघर्ष करके दूसरों के जीवन में रोशनी फैलाता है और इसी वजह से शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है।

नई शिक्षा नीति और विभागीय सुधारों को लेकर भी मंत्री ने सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि विभाग को अधिक जवाबदेह, आधुनिक और परिणाम आधारित बनाने की दिशा में काम होगा। स्कूलों और कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ पढ़ाई की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था को ऐसा मॉडल बनाना होगा जिसकी चर्चा पूरे देश में हो। इसके लिए केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर मजबूत काम करने की जरूरत है। मंत्री के अनुसार सरकार शिक्षा को राज्य के विकास की सबसे बड़ी ताकत बनाना चाहती है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से कई चुनौतियों का सामना कर रही है। शिक्षक नियुक्ति, स्कूलों में संसाधनों की कमी, छात्रों का पलायन और रोजगार से जुड़ी शिक्षा की कमी जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। ऐसे में नए शिक्षा मंत्री के सामने चुनौतियां भी बड़ी हैं और उम्मीदें भी।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मिथिलेश तिवारी का शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा अनुभव विभाग के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। खासकर शिक्षक भर्ती और कोचिंग संस्कृति को लेकर उनकी समझ नीति निर्माण में मदद कर सकती है।

TRE-4 को लेकर उनका बयान भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्योंकि पिछले कई महीनों से अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं और सरकार से भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में शिक्षा मंत्री की ओर से समाधान निकालने का संकेत राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी मिथिलेश तिवारी के बयान को लेकर प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने रोजगारपरक शिक्षा की बात का स्वागत किया, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि सरकार को अब केवल घोषणा नहीं, बल्कि तेजी से ठोस कदम उठाने होंगे।

फिलहाल नए शिक्षा मंत्री ने साफ संकेत दे दिए हैं कि उनका फोकस शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, रोजगार से जुड़ी पढ़ाई और शिक्षक भर्ती जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर रहेगा। अब आने वाले समय में यह देखना होगा कि उनके नेतृत्व में बिहार की शिक्षा व्यवस्था कितनी तेजी से बदलाव की ओर बढ़ती है।

बिहार के लाखों छात्र, शिक्षक और अभ्यर्थी अब इस उम्मीद में हैं कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद शिक्षा विभाग में लंबे समय से रुके सुधारों को गति मिलेगी और राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल सकेगी।

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