स्वास्थ्य मंत्री बनते ही निशांत का बड़ा संदेश, बोले- अमीर और गरीब सभी को मिले समान इलाज की सुविधा

बिहार की नई सरकार में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद निशांत ने अपने पहले ही बयान से बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश देने की कोशिश की है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और नई कैबिनेट में शामिल मंत्री निशांत ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से स्वास्थ्य विभाग का पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालते ही उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, गरीब और अमीर के बीच इलाज के अंतर को कम करने और आम लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने की बात कही।

मंत्री बनने के बाद मीडिया से बातचीत में निशांत ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह होगी कि बिहार के हर व्यक्ति को समान स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं में आर्थिक स्थिति के आधार पर अंतर नहीं होना चाहिए। राज्य के गरीब, मध्यम वर्ग और जरूरतमंद लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार का लक्ष्य रहेगा।

निशांत ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी दी गई है, उसे वह पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग आम जनता से सीधे जुड़ा हुआ विभाग है और यहां काम करने का मतलब केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाना नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी और उम्मीदों से जुड़ना है।

उन्होंने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कामों का भी विशेष रूप से जिक्र किया। निशांत ने कहा कि पिछले करीब 20 वर्षों में बिहार में स्वास्थ्य क्षेत्र में कई बड़े बदलाव हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अस्पतालों की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और आम लोगों तक इलाज की पहुंच बढ़ाने के लिए लगातार काम किया गया।

निशांत ने कहा कि वह अपने पिता द्वारा शुरू किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि स्वास्थ्य विभाग में निरंतरता और सुधार दोनों साथ-साथ चलेंगे। उनके अनुसार बिहार को स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है।

मंत्री ने कहा कि वह अभी विभाग को समझने और उसकी कार्यप्रणाली को जानने पर ध्यान देंगे। उन्होंने माना कि स्वास्थ्य विभाग एक बड़ा और जटिल विभाग है, इसलिए जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय पहले पूरी व्यवस्था को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के साथ बैठक कर विभाग की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जाएगी और उसके बाद प्राथमिकताएं तय की जाएंगी।

निशांत ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग से लोगों की अपेक्षाएं काफी अधिक होती हैं। किसी भी परिवार के लिए बीमारी सबसे बड़ी चिंता होती है और ऐसे समय में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश होगी कि लोगों को बेहतर इलाज और सुविधाएं समय पर मिलें।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वह जनता का विश्वास अपने काम के जरिए जीतना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में लोगों का भरोसा सबसे बड़ी ताकत होती है और उसे केवल काम के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए गंभीरता से काम किया जाएगा।

पटना के आईजीआईएमएस अस्पताल में छात्रों के चल रहे प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर निशांत ने कहा कि वह पहले पूरे मामले की जानकारी लेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे पर फैसला लेने से पहले स्थिति को समझना जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।

बिहार की नई कैबिनेट में निशांत की एंट्री को राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्योंकि पहली बार नीतीश कुमार के परिवार से कोई व्यक्ति सीधे सरकार में शामिल हुआ है। राजनीतिक गलियारों में इसे जदयू और बिहार की राजनीति के लिए बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार में भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और आरएलएम के नेताओं को जगह मिली है। नई कैबिनेट में भाजपा के सबसे ज्यादा मंत्री हैं, जबकि जदयू को भी अहम विभाग दिए गए हैं। इसी क्रम में निशांत को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी मिली है, जिसे सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में गिना जाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी देकर सरकार ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था हमेशा चुनावी और जनहित का बड़ा मुद्दा रही है। ऐसे में इस विभाग का प्रदर्शन सरकार की छवि पर सीधा असर डालता है।

फिलहाल निशांत किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। वह न तो विधायक हैं और न ही विधान परिषद के सदस्य। हालांकि संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति बिना सदन का सदस्य बने छह महीने तक मंत्री रह सकता है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में उन्हें विधान परिषद के जरिए सदन में भेजा जा सकता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री के रूप में निशांत के सामने चुनौतियां भी बड़ी होंगी। बिहार में सरकारी अस्पतालों की स्थिति, डॉक्टरों की कमी, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और मेडिकल शिक्षा जैसे कई मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं।

कोरोना महामारी के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लोगों की अपेक्षाएं और भी बढ़ गई हैं। ऐसे में नई सरकार पर दबाव रहेगा कि वह स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से सुधार करे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक सेवाओं में सुधार कर पाती है तो इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा।

निशांत के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा हो रही है। समर्थकों ने उनके सादगी भरे अंदाज और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर दिए गए संदेश की तारीफ की, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक लॉन्चिंग का हिस्सा बताया।

हालांकि यह साफ है कि स्वास्थ्य मंत्री के रूप में निशांत की भूमिका आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाली है। अब जनता की नजर इस बात पर रहेगी कि उनके नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग जमीन पर कितना बदलाव ला पाता है।

बिहार के लाखों लोग अब इस उम्मीद में हैं कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की रफ्तार तेज होगी और सरकारी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था पहले से बेहतर बन सकेगी।

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