बिहार के विकास की नई इबारत: सड़कों पर एआई की नजर और शहरों के लिए विश्व बैंक का साथ

बिहार सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे, तकनीक और जन-सुविधाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए बड़े फैसलों की झड़ी लगा दी है। सरकार की ओर से जारी ताजा प्रेस नोट के अनुसार, राज्य में अब सड़कों की निगरानी से लेकर प्रशासनिक कार्यों तक में आधुनिक तकनीक का समावेश किया जाएगा। इन फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण सड़क निर्माण विभाग की वह योजना है, जिसके तहत राज्य के लगभग 19305.58 किलोमीटर लंबे पथों के संधारण के लिए 15,967.03 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सड़कों के निरीक्षण और अनुश्रवण के लिए एआई (AI) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह कार्य सात वर्षों तक 100 पैकेजों के अधीन संचालित होगा। इसके साथ ही, राज्य के उच्च पथों और महत्वपूर्ण पुलों पर रोड यूजर फीस वसूली के लिए ‘बिहार रोड यूजर फीस (निर्धारण और संग्रहण) नियमावली 2026’ बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन और प्रशासनिक सुधार

​राज्य को तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के उद्देश्य से ‘बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन’ का गठन किया गया है। इस मिशन के तहत न केवल शोध और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा, बल्कि राज्य सरकार के अधिकारियों, कर्मचारियों और विधान मंडल के दोनों सदनों के सदस्यों को एआई के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इस प्रशिक्षण के लिए आईआईटी पटना, सी-डैक और एनआईईएलआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की मदद ली जाएगी। सरकार का मानना है कि एआई के उपयोग से प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और कृषि जैसे क्षेत्रों में पारदर्शी और डेटा आधारित परिणाम प्राप्त किए जा सकेंगे। सुशासन की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए, नगरपालिका चुनावों में बुजुर्गों, दिव्यांगों और प्रवासियों की सुविधा के लिए ई-वोटिंग सिस्टम (e-voting system) के उपयोग की स्वीकृति दी गई है, जिसके लिए सी-डैक हैदराबाद को एजेंसी के रूप में चुना गया है।

शहरी विकास के लिए $500 मिलियन का निवेश

​बिहार के शहरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार ने विश्व बैंक से 500 मिलियन डॉलर का ऋण लेकर ‘बिहार अर्बन ट्रान्सफॉर्मेशन प्रोग्राम’ चलाने का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शहरों में एकीकृत आर्थिक क्षेत्रों का विकास करना और निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है। इसके अतिरिक्त, सात निश्चय-3 के तहत ‘बिहार भवन (संशोधन) उपविधि 2026’ को मंजूरी दी गई है, जिससे भवन निर्माण की अनुमति प्रक्रिया सरल और तीव्र होगी। वहीं, राजधानी पटना सहित राज्य के प्रमुख शहरों जैसे मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, दरभंगा और पूर्णिया में परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 400 इलेक्ट्रिक एसी बसों का परिचालन किया जाएगा। इस योजना के लिए सरकार ने 517.16 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित राशि को मंजूरी दी है, जो अगले 12 वर्षों तक परिचालन घाटे की प्रतिपूर्ति करेगी।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

​शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार करते हुए, सरकार ने बीआईटी मेसरा, रांची के पटना स्थित विस्तार केंद्र के साथ हुए समझौते की अवधि को 16 दिसंबर 2030 तक बढ़ाने की स्वीकृति दी है। इसके साथ ही, अरवल और शेखपुरा जिलों में केंद्रीय विद्यालयों के निर्माण के लिए रास्ता साफ हो गया है। अरवल के करपी अंचल में 5 एकड़, शेखपुरा के कटनीकोल और जमुआरा में 5 एकड़ और शेखोपुरसराय में 4.56 एकड़ सरकारी भूमि केंद्रीय विद्यालय संगठन को मात्र एक रुपये के टोकन मूल्य पर 30 वर्षों की लीज पर देने का निर्णय लिया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में, सीतामढ़ी जिले में निर्माणाधीन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल का नाम बदलकर ‘माँ सीता चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल’ कर दिया गया है। यह निर्णय इस क्षेत्र के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए लिया गया है।

गंगा के कटाव से बचाव की बड़ी योजनाएं

​नदियों के किनारे बसे गांवों को सुरक्षित रखने के लिए जल संसाधन विभाग ने तीन बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी है। आरा जिले के शाहपुर प्रखंड में गंगा नदी के कटाव से बचाव के लिए 5256.41 लाख रुपये की योजना स्वीकृत की गई है। इसी तरह, सारण जिले के सोनपुर प्रखंड में 1890 मीटर की लंबाई में कटाव निरोधक कार्य के लिए 5755.34 लाख रुपये और वैशाली जिले के सहदेई बुजुर्ग प्रखंड में 6412.53 लाख रुपये की लागत से सुरक्षा कार्य कराए जाएंगे। इन योजनाओं के तहत बोल्डर रिवेटमेंट और जीयो बैग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे हजारों ग्रामीणों को नदी के कटाव से राहत मिलेगी।

औद्योगिक और वित्तीय स्थिरता के प्रयास

​राज्य में औद्योगिक निवेश को बनाए रखने के लिए ‘बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025’ की अवधि को 30 जून 2026 तक विस्तारित कर दिया गया है। पटना हवाई अड्डे के पास आधारभूत संरचना के विकास के लिए बियाडा की 1.85 एकड़ भूमि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। वित्तीय मोर्चे पर, सातवें राज्य वित्त आयोग का कार्यकाल 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए भी राहत की खबर है; उन्हें अब बैंकों के माध्यम से वेतन या पेंशन के आधार पर पारदर्शी तरीके से ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे शोषणकारी ऋणदाताओं के चंगुल से बच सकें।

न्याय और शासन के अन्य फैसले

​मुकदमों के त्वरित निष्पादन के लिए विधि विभाग ने दरभंगा और मधुबनी न्यायमंडलों में नए न्यायालयों के गठन के साथ 18 नए अराजपत्रित पदों के सृजन को हरी झंडी दी है। इन पदों पर होने वाले वेतन खर्च के लिए सालाना 1.02 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की गई है। अंत में, राजभवन की जरूरतों को देखते हुए राज्यपाल और उनके सचिवालय के लिए छह नए मोटर वाहनों की खरीद हेतु 1.53 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि बिहार आकस्मिकता निधि से मंजूर की गई है।

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