भागलपुर : विक्रमशिला सेतु का स्लैब गंगा में समाया; बाल-बाल बचीं सैकड़ों जानें, मुंगेर के रास्ते आवागमन का आदेश

भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले की लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु पर रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात एक ऐसी खौफनाक वारदात हुई, जिसने पूरे सूबे के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। जब घड़ी की सुइयां रात के लगभग 12:50 बजे का समय बता रही थीं और पूरा शहर गहरी नींद में आगोश में था, तभी गंगा नदी पर बने इस विशालकाय पुल के पिलर नंबर 133 के पास एक बड़ा स्लैब अचानक टूटकर सीधे गंगा की उफनती लहरों में समा गया। यह हादसा इतना अचानक और भयावह था कि अगर मौके पर तैनात ट्रैफिक पुलिस ने चंद मिनटों की फुर्ती न दिखाई होती, तो यह एक जल समाधि की बड़ी त्रासदी बन सकता था। इस घटना ने न केवल भागलपुर और नवगछिया के बीच के सीधे संपर्क को पूरी तरह काट दिया है, बल्कि पुल की संरचनात्मक मजबूती और रखरखाव पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में जिला प्रशासन ने पूरी एहतियात बरतते हुए सेतु पर आवागमन को अनिश्चितकाल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है और वैकल्पिक मार्ग के रूप में मुंगेर की ओर ट्रैफिक को मोड़ने का निर्देश जारी किया है।

आधी रात का वो खौफनाक मंजर: जब साक्षात मौत सामने थी

​विक्रमशिला सेतु, जो उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करता है, पर रात के समय भी वाहनों का भारी दबाव रहता है। रविवार देर रात भी स्थिति सामान्य थी और ट्रक-बसें अपनी रफ्तार में गुजर रही थीं। तभी अचानक पिलर नंबर 133 के पास सड़क की सतह पर एक अजीब सी दरार (गैप) दिखाई देने लगी। मौके पर तैनात ट्रैफिक पुलिस के जवानों और स्थानीय थाना अध्यक्ष ने इस असामान्य स्थिति को तुरंत भांप लिया।

​जिस वक्त यह दरार चौड़ी हो रही थी, उस समय पुल के उस खास हिस्से पर कई भारी वाहन और यात्री गाड़ियां मौजूद थीं। पुलिस कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत मोर्चा संभाला और टॉर्च व संकेतों के जरिए चीखते-चिल्लाते हुए वाहनों को पीछे हटने का इशारा किया। अफरा-तफरी के उस माहौल में जैसे ही आखिरी वाहन को सुरक्षित दूरी पर हटाया गया, उसके चंद सेकंड बाद ही कंक्रीट का वह विशाल स्लैब एक जोरदार धमाके के साथ गंगा नदी में विलीन हो गया। वहां मौजूद यात्रियों के चेहरे पर मौत का खौफ साफ देखा जा सकता था। पुलिस की इस तत्परता ने आज भागलपुर को एक बड़े मातम से बचा लिया है।

जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी की त्वरित कार्रवाई और निर्देश

​घटना की भयावहता की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी बिना किसी देरी के मध्य रात्रि में ही घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने टॉर्च की रोशनी में उस ध्वस्त हिस्से का निरीक्षण किया जहाँ से स्लैब गिरा था। जिलाधिकारी ने पुष्टि की कि पिलर नंबर 133 के पास का ढांचा अब यातायात के लायक नहीं रह गया है और एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने मीडिया और जनता के लिए जारी संदेश में स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

​नवल किशोर चौधरी ने बताया कि रात के 1:00 बजे जैसे ही उन्हें इस दरार और स्लैब गिरने की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग करने और ट्रैफिक को सील करने का आदेश दिया। जिलाधिकारी ने आम जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे अगले आदेश तक किसी भी स्थिति में इस पुल की ओर आने का प्रयास न करें। उन्होंने तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को सुबह ही मौके पर पहुँचने का निर्देश दिया है ताकि इस बात का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सके कि आखिर आधुनिक तकनीक से बने इस सेतु की यह हालत कैसे हुई। क्या यह ओवरलोडिंग का नतीजा है या पुल के पुराने हो चुके स्ट्रक्चर में आई कोई आंतरिक खराबी, इसका पता विशेषज्ञों की विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही चल पाएगा।

एसएसपी प्रमोद यादव की सुरक्षा घेराबंदी और वैकल्पिक मार्ग

​वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमोद यादव ने भी आधी रात को ही कमान संभाल ली और जिले के सभी महत्वपूर्ण एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की। एसएसपी ने बताया कि पुलिस का मुख्य उद्देश्य अब भागलपुर शहर के भीतर होने वाले संभावित ट्रैफिक जाम को रोकना और वाहनों को सुरक्षित वैकल्पिक रास्तों पर भेजना है।

​प्रशासन ने अब यातायात के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में मुंगेर और सुल्तानगंज के रास्ते को आधिकारिक रूप से चिन्हित कर दिया है। अब जो भी वाहन भागलपुर से नवगछिया, पूर्णिया, कटिहार या किशनगंज की ओर जाना चाहते हैं, उन्हें वाया सुल्तानगंज होकर मुंगेर गंगा पुल का सहारा लेना होगा। यद्यपि यह मार्ग दूरी के लिहाज से काफी लंबा है, लेकिन वर्तमान में सुरक्षा के दृष्टिकोण से यही एकमात्र विकल्प शेष है। प्रमोद यादव ने विशेष रूप से एम्बुलेंस चालकों और गंभीर मरीजों के परिजनों को चेतावनी दी है कि वे रेफरल मामलों में विक्रमशिला सेतु का रुख बिल्कुल न करें, क्योंकि वहां बैरिकेडिंग के कारण एक साइकिल तक निकलने की जगह नहीं छोड़ी गई है। मुंगेर का रास्ता ही अब जीवनदायिनी मार्ग साबित होगा।

उत्तर बिहार और सीमांचल का संपर्क कटा: आर्थिक प्रभाव की आशंका

​विक्रमशिला सेतु केवल कंक्रीट का एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह भागलपुर संभाग की आर्थिक धड़कन है। इस सेतु के बंद होने का सीधा असर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर पड़ेगा। रोजाना सैकड़ों ट्रक यहाँ से खाद्यान्न, निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी सामान लेकर सीमांचल और पूर्वोत्तर राज्यों की ओर जाते हैं। पुल के अचानक बंद होने से नवगछिया और भागलपुर के बीच का दूध, सब्जी और दैनिक उपभोग की वस्तुओं का व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है।

​व्यापारियों का मानना है कि यदि पुल लंबे समय तक बंद रहा, तो बाजार में महंगाई बढ़ सकती है और आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा सकती है। सेतु का एक बड़ा स्लैब गिरना इसके भविष्य के स्थायित्व पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि पुल की समय-समय पर मरम्मत और लोड टेस्टिंग की रिपोर्ट क्या कह रही थी। 4 मई की सुबह भागलपुर के लिए एक नई चुनौती लेकर आई है, जहाँ मुख्य सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं और लोग भ्रम की स्थिति में हैं।

तकनीकी जांच और भविष्य की रणनीति

​अब पूरी नजरें उन इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों पर टिकी हैं जो सोमवार की सुबह पुल की जांच करेंगे। यह जांच केवल गिरे हुए स्लैब तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पिलर नंबर 133 के आसपास के सभी पिलरों और स्लैबों की स्कैनिंग की जाएगी। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि क्या पुल के अन्य हिस्से भी इसी तरह के जोखिम में तो नहीं हैं।

​भवन निर्माण विभाग और पुल निर्माण निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे युद्ध स्तर पर मरम्मत की योजना तैयार करें। हालांकि, स्लैब के गंगा में गिरने के कारण अब इसकी मरम्मत में काफी समय और आधुनिक संसाधनों की जरूरत होगी। जिलाधिकारी ने यह भी संकेत दिया है कि जब तक तकनीकी टीम अपनी ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ जारी नहीं कर देती, तब तक पुल पर पैदल यात्रियों के आवागमन की भी अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस विभाग ने अतिरिक्त बल मंगाया है ताकि मुंगेर और सुल्तानगंज मार्ग पर लगने वाले संभावित जाम को नियंत्रित किया जा सके। भागलपुर प्रशासन के लिए अगले 48 घंटे परीक्षा की घड़ी हैं, जहाँ उन्हें जनता की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना है।

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