
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अल्पसंख्यक मामलों तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह इस्तीफा सामने आया है।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
जून 2024 में बने थे केंद्रीय मंत्री
65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी एनडीए सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने 9 जून 2024 को मंत्री पद की शपथ ली थी और 11 जून 2024 को अल्पसंख्यक मामलों तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय का कार्यभार संभाला था।
बीजेपी के पुराने और अनुभवी नेता
जॉर्ज कुरियन भारतीय जनता पार्टी के शुरुआती नेताओं में गिने जाते हैं। वे 1980 में पार्टी की स्थापना के समय से ही भाजपा से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
उनका जन्म 20 सितंबर 1960 को केरल के कोट्टायम जिले के एट्टुमानूर स्थित नाम्बियाकुलम में हुआ था। उन्होंने विधि (Law) में स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में निभा चुके हैं अहम भूमिका
केंद्रीय मंत्री बनने से पहले जॉर्ज कुरियन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वे पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कार्याधिकारी (OSD) भी रह चुके हैं।
राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद छोड़ा पद
सूत्रों के अनुसार, जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल पूरा हो चुका है। चूंकि उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया गया, इसलिए संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें मंत्री पद भी छोड़ना पड़ा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केरल में पार्टी के हालिया चुनावी प्रदर्शन और संगठनात्मक समीकरणों के चलते उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने पर विचार नहीं किया गया।
बीजेपी नेतृत्व का करीबी चेहरा
जॉर्ज कुरियन को दक्षिण भारत, विशेषकर केरल में भाजपा के महत्वपूर्ण ईसाई चेहरों में माना जाता है। अल्पसंख्यक समुदायों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने में उनकी भूमिका को अहम माना जाता रहा है।
अब उनके इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार में उनके विभागों की जिम्मेदारी को लेकर नई नियुक्तियों पर नजरें टिकी हुई हैं।


