विक्रमशिला सेतु पर यातायात हुआ बंद, स्लैब गिरने से भागलपुर-नवगछिया संपर्क टूटा

भागलपुर: बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बना ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु एक बार फिर गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। 3 मई 2026 की देर रात अचानक सेतु का एक बड़ा स्लैब टूटकर गंगा में गिर गया, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से इस पुल पर सभी प्रकार के यातायात को पूरी तरह बंद कर दिया। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया, बल्कि भागलपुर और नवगछिया के बीच सीधा संपर्क भी पूरी तरह बाधित हो गया।

यह घटना रात करीब 12:50 बजे की बताई जा रही है, जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे। उसी दौरान विक्रमशिला सेतु के पिलर नंबर 133 के पास अचानक सड़क के बीच एक बड़ी दरार उभर आई। मौके पर तैनात पुलिस और ट्रैफिक कर्मियों ने स्थिति की गंभीरता को तुरंत समझ लिया। उस समय पुल पर कई छोटे-बड़े वाहन गुजर रहे थे, लेकिन पुलिस की तत्परता ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया।

पुलिसकर्मियों ने बिना समय गंवाए वाहनों को पीछे हटाना शुरू किया और लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। कुछ ही मिनटों में वह हिस्सा पूरी तरह धंस गया और स्लैब गंगा नदी में गिर गया। यदि थोड़ी भी देर होती, तो कई वाहन और उनमें सवार लोग नदी में गिर सकते थे। इस त्वरित कार्रवाई ने संभावित बड़े हादसे को टाल दिया।

घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमोद यादव मौके पर पहुंचे। जिलाधिकारी ने स्थिति का जायजा लेने के बाद स्पष्ट निर्देश दिया कि सुरक्षा को देखते हुए पुल को पूरी तरह बंद कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और किसी भी संभावित खतरे को टालना है।

प्रशासन ने पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर उसे पूरी तरह सील कर दिया है। किसी भी व्यक्ति को पैदल या वाहन से पुल पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

एसएसपी प्रमोद यादव ने बताया कि पूरे जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है और ट्रैफिक को सुचारू रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। सभी थाना प्रभारियों और ट्रैफिक अधिकारियों को सड़कों पर तैनात किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

अब भागलपुर और नवगछिया के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए मुंगेर और सुल्तानगंज के रास्ते को वैकल्पिक मार्ग के रूप में निर्धारित किया गया है। हालांकि यह रास्ता लंबा है, लेकिन वर्तमान स्थिति में यही एक सुरक्षित विकल्प है। प्रशासन ने विशेष रूप से एम्बुलेंस और गंभीर मरीजों को ले जाने वाले वाहनों को निर्देश दिया है कि वे गलती से भी विक्रमशिला सेतु की ओर न जाएं।

विक्रमशिला सेतु की अहमियत को देखते हुए यह घटना और भी गंभीर हो जाती है। यह पुल न केवल भागलपुर को नवगछिया, पूर्णिया, कटिहार और सीमांचल क्षेत्र से जोड़ता है, बल्कि यह उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग भी है। रोजाना हजारों वाहन इस पुल से गुजरते हैं, जिससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ता है।

पुल के अचानक क्षतिग्रस्त होने से अब व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने की आशंका है। ट्रकों और मालवाहक वाहनों को लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ेंगे। इसके अलावा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भी बाधा आ सकती है।

विक्रमशिला सेतु पर यातायात हुआ बंद, स्लैब गिरने से भागलपुर-नवगछिया संपर्क टूटा विक्रमशिला सेतु पर यातायात हुआ बंद, स्लैब गिरने से भागलपुर-नवगछिया संपर्क टूटा

इस घटना ने पुल की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह निर्माण में किसी प्रकार की कमी का परिणाम है या समय के साथ संरचना कमजोर हो गई थी, इसका पता जांच के बाद ही चल पाएगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंचकर पूरे पुल की जांच करेगी। पिलर नंबर 133 के आसपास के अन्य हिस्सों की भी गहन जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और भी कोई खतरा तो नहीं है।

मरम्मत कार्य शुरू करने से पहले विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि पुल को दोबारा कब और कैसे खोला जा सकता है। तब तक के लिए पुल पूरी तरह बंद रहेगा।

इस बीच, प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती वैकल्पिक मार्गों पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को संभालना है। मुंगेर और सुल्तानगंज मार्ग पर वाहनों की संख्या अचानक बढ़ गई है, जिससे जाम की स्थिति बन सकती है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस लगातार गश्त कर रही है और वाहनों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर चिंता और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहा है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि इतने महत्वपूर्ण पुल की नियमित जांच और रखरखाव क्यों नहीं किया गया। वहीं प्रशासन लोगों से धैर्य बनाए रखने और सहयोग करने की अपील कर रहा है।

जिलाधिकारी ने कहा है कि जब तक विशेषज्ञों की टीम पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक किसी भी कीमत पर पुल को चालू नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि मरम्मत कार्य को प्राथमिकता दी जाएगी और जल्द से जल्द यातायात बहाल करने की कोशिश की जाएगी।

कुल मिलाकर, विक्रमशिला सेतु की यह घटना एक बड़ा चेतावनी संकेत है, जो न केवल बुनियादी ढांचे की स्थिति पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सतर्क प्रशासन और त्वरित कार्रवाई किस तरह बड़े हादसों को टाल सकती है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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