शिवहर के डीडीसी बृजेश कुमार सस्पेंड, 1.86 करोड़ की अवैध संपत्ति का खुलासा

शिवहर, 3 मई 2026, बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शिवहर के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) बृजेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में हुई विजिलेंस जांच के बाद की गई है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) की छापेमारी में करीब 1.86 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का खुलासा होने के बाद सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है।

विजिलेंस की छापेमारी में बड़ा खुलासा

दरअसल, 24 मार्च 2026 को विशेष निगरानी इकाई (SVU) की टीम ने बृजेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके सरकारी आवास और कार्यालय पर एक साथ छापेमारी की थी। यह छापेमारी उनके खिलाफ मिली शिकायतों और प्रारंभिक जांच के आधार पर की गई थी।

छापेमारी के दौरान टीम को भारी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, बैंक निवेश से जुड़े दस्तावेज और अन्य संपत्तियों के प्रमाण मिले। जांच में पाया गया कि यह संपत्ति उनकी घोषित आय से कहीं अधिक है। विशेष निगरानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपये की आय से अधिक संपत्ति के साक्ष्य मिले हैं।

इस मामले में कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी गई थी, जिसके बाद अब सरकार ने निलंबन की कार्रवाई की है।

सरकार का सख्त संदेश: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस

बिहार सरकार ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में बृजेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी प्रेम प्रकाश ने भी इस निलंबन आदेश की पुष्टि की है। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई विजिलेंस रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच में आरोपों के सही पाए जाने के बाद की गई है।

नए डीडीसी के रूप में एडीएम मेधावी को जिम्मेदारी

बृजेश कुमार के निलंबन के बाद प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए जिलाधिकारी प्रतिभा रानी के निर्देश पर एडीएम मेधावी को उप विकास आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

अब जिले के विकास कार्यों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी एडीएम मेधावी के पास होगी। प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि निलंबन के कारण सरकारी कामकाज पर कोई असर न पड़े।

प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप

इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई ने अन्य अधिकारियों को भी सतर्क कर दिया है।

बृजेश कुमार न केवल डीडीसी के पद पर थे, बल्कि जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। ऐसे में उनके खिलाफ हुई कार्रवाई को काफी गंभीर माना जा रहा है।

छापेमारी में मिले अहम दस्तावेज

सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों में कई निवेश योजनाओं, जमीन-जायदाद और बैंक खातों से संबंधित जानकारी सामने आई है। इन दस्तावेजों के आधार पर यह जांच की जा रही है कि संपत्ति कैसे और किन माध्यमों से अर्जित की गई।

जांच एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस मामले में अन्य लोगों की भी संलिप्तता है या नहीं।

आगे की जांच प्रक्रिया तेज

निलंबन के बाद अब विभागीय जांच की प्रक्रिया को और तेज कर दिया गया है। बृजेश कुमार के खिलाफ विस्तृत जांच की जाएगी और यदि आरोप साबित होते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय निर्धारित कर दिया गया है और उन्हें विभागीय नियमों का पालन करना होगा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान

बिहार में पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई देखने को मिल रही है। सरकार और निगरानी विभाग मिलकर ऐसे मामलों पर नजर रख रहे हैं और दोषी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

शिवहर के डीडीसी बृजेश कुमार का निलंबन एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक संदेश है। यह दर्शाता है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती बरतने के लिए प्रतिबद्ध है।

अब सभी की नजर आगे की जांच और कार्रवाई पर टिकी है। यदि आरोप पूरी तरह साबित होते हैं, तो यह मामला अन्य अधिकारियों के लिए भी एक सख्त चेतावनी साबित हो सकता है।

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