
खगड़िया, 3 मई 2026, बिहार के खगड़िया जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी बेटी को दहेज के लिए ज़हर देकर मार दिया गया। मामला सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
मृतका की पहचान कन्हैयाचक निवासी स्वर्गीय नरेश गुप्ता की 21 वर्षीय पुत्री नीलू कुमारी के रूप में हुई है। उसकी शादी कुछ वर्ष पहले परबत्ता थाना क्षेत्र के रूपौली गांव निवासी मुकेश कुमार के साथ हुई थी। परिवार का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही ससुराल पक्ष की ओर से दहेज को लेकर दबाव बनाया जा रहा था।
फोन पर मिली सूचना, अस्पताल पहुंचते-पहुंचते टूटी उम्मीद
मायके पक्ष के अनुसार, 30 अप्रैल की सुबह उन्हें अचानक फोन पर सूचना मिली कि उनकी बेटी ने ज़हर खा लिया है और उसकी हालत गंभीर है। यह खबर सुनते ही परिवार के लोग घबराकर ससुराल पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें बेटी नहीं मिली।
बाद में जानकारी मिली कि नीलू को परबत्ता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जब परिजन अस्पताल पहुंचे, तब तक उसकी हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने प्रारंभिक रूप से सल्फास (ज़हरीला पदार्थ) खाने की आशंका जताई है।
मां ने लगाया हत्या का आरोप
मृतका की मां पार्वती देवी ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने परबत्ता थाना में दिए गए बयान में कहा कि उनकी बेटी की शादी करीब चार-पांच साल पहले पूरे रीति-रिवाज के साथ हुई थी। शुरुआत में सब कुछ ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे ससुराल वालों का व्यवहार बदलने लगा।
उनका आरोप है कि ससुराल पक्ष लगातार तीन लाख रुपये की अतिरिक्त मांग कर रहा था। जब यह मांग पूरी नहीं हुई, तो उनकी बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा।
पार्वती देवी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि पति मुकेश कुमार, सास ललिता देवी और देवर मोहित कुमार ने मिलकर उनकी बेटी को ज़हर देकर हत्या कर दी। उनका कहना है कि यह कोई आत्महत्या नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया है, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल सभी आरोपों और पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह मामला आत्महत्या है या हत्या।
दहेज प्रथा पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर समाज में दहेज प्रथा की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है। आज भी कई जगहों पर विवाहिता महिलाओं को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता है, जो कई बार उनकी जान तक ले लेता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कानून सख्त होने के बावजूद इस तरह की घटनाएं रुक नहीं रही हैं, क्योंकि सामाजिक सोच में बदलाव अभी भी अधूरा है।
समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी
ऐसे मामलों में न केवल पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है, बल्कि समाज को भी आत्ममंथन करने की जरूरत है। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना केवल कानून का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई होती, तो शायद इस घटना को रोका जा सकता था।
खगड़िया की यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि दहेज जैसी कुप्रथा आज भी समाज में जड़ें जमाए हुए है। एक बेटी, जो अपने नए जीवन की शुरुआत के लिए ससुराल गई थी, वह संदिग्ध परिस्थितियों में अपनी जान गंवा बैठी।
अब सबकी नजर पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे सच्चाई सामने आ सके। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होना बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।


